क्या दूसरी पार्टियों के लिए उद्धव और राज के हाथ मिलाने से खतरा पैदा हो जाएगा?

By: | Last Updated: Wednesday, 8 October 2014 4:59 PM

नई दिल्ली : क्या 2014 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव ठाकरे भाईयों को एक साथ ला सकता है. क्या 8 साल बाद महाराष्ट्र में भरत मिलाप हो सकता है. ये सारे सवाल इसलिए क्योंकि विधानसभा चुनाव में बदलते हुए राजनीतिक गणित से कुछ ऐसे ही संकेत मिल रहे हैं. राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के हाथ मिलाने के संकेत.

 

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद उद्धव और राज ठाकरे ने अगर हाथ मिला लिया तो महाराष्ट्र की राजनीति की ये सबसे अनूठी और दिलचस्प तस्वीर होगी. लेकिन दो भाईयों के साथ मिलने से महाराष्ट्र की राजनीति में क्या उतार चढ़ाव आएंगे. ठाकरे बंधुओं की ताकत कहां और कितनी बढ़ जाएगी. क्या दूसरी पार्टियों के लिए उद्धव और राज के हाथ मिलाने से खतरा पैदा हो जाएगा?

 

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राज ठाकरे के बयान ने इस कयास को मजबूती तो दे दी है कि चुनाव नतीजों के बाद उद्धव और राज का मिलन मुमकिन है. लेकिन इससे भी ज्यादा देखने वाली बात ये होगी कि ऐसा होने पर आगे क्या होगा. क्या सालों बाद दो भाईयों का गठजोड़ महाराष्ट्र की राजनीति की पूरी तस्वीर बदलकर रख देगा.

 

अलग होने के 8 साल बाद राज और उद्धव अगर साथ आए तो मंशा सिर्फ एक होगी बीजेपी को महाराष्ट्र में सरकार बनाने से रोकना. इस चुनावी समीकरण को हवा दे रहा है महाराष्ट्र के सटोरियों का गणित. द इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक मुंबई के सटोरियों को लग रहा है कि इस बार बीजेपी सबसे ज्यादा सीट पाने में कामयाब होगी लेकिन वह अकेले सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो पाएगी.

 

द इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट कहती है कि सट्टा बाजार के मुताबिक बीजेपी को 110 से 115 सीटें मिल सकती हैं. वहीं बीजेपी का साथ छोड़ अकेले लड़ रही शिवसेना को 50 ही सीटें मिल पाएंगी. शरद पवार की एनसीपी को इस बार 45 से 50 सीटें मिल सकती हैं जो कि 2009 में मिली 62 सीटों से काफी कम हैं. सटोरियों के मुताबिक कांग्रेस को अकेले लड़ने का नुकसान होगा और उसे 40 से 45 सीटें मिल सकती हैं.

 

जबकि पिछली बार उसे 82 सीटें मिलीं थीं. वहीं राज ठाकरे की एमएनएस 15 से 20 सीटें हासिल कर सकती है. जबकि निर्दलीय और अन्य को 12 से 15 सीटें मिलने का अनुमान है. मतलब सट्टा बाजार के मुताबिक इस बार कोई भी पार्टी बहुमत के लिए जरूरी 145 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाएगी.

 

अगर सट्टा बाजार के इस गणित को सही मान लिया जाए तो उद्धव और राज ठाकरे के साथ आने की राह खुलती दिखती है क्योंकि सरकार बनाने के लिए पार्टियों को आपस में हाथ तो मिलाना ही होगा. चर्चा तो यहां तक गर्म है कि चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और एनसीपी का गठजोड़ बन सकता है. अब अगर ये तीनों ही पार्टियां ही ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने में कामयाब रहीं तो महाराष्ट्र में कमल खिलने से रहा.

 

लेकिन हकीकत ये भी है कि महाराष्ट्र में इस बार का विधानसभा चुनाव उद्धव और राज ठाकरे दोनों के लिए ही अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. दोनों के लिए अपनी पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है.

 

राज के लिए चुनौती है कि वो अपनी 13 सीटें बरकरार रखें. 40 जगहों पर शिवसेना बीजेपी को हरवाया था. वहां राज का असर है. वहां से कितनी और सीटें निकाल सकते हैं ये देखने वाली बात होगी. उद्धव के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि किसी भी हाल में बीजेपी से ज्यादा सीटें लेकर आएं. मुंबई कोंकण में शिवसेना है. उन्हें मराठवाडा और विदर्भ में जो उनके सांसद हैं उन्हें सीटें खींचनी पड़ेंगी. 2009 विधानसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 288 सीटों में से शिवसेना ने 160 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे सिर्फ 44 सीट पर जीत मिली. जबकि उस समय शिवसेना के साथ गठबंधन करने वाली बीजेपी को 119 में 46 सीट मिली थीं. लेकिन इस बार कहानी बदल चुकी है बीजेपी शिवसेना का 25 साल पुराना गठबंधन टूट चुका है. और शिवसेना अकेले ही मैदान में है.

 

शिवसेना का प्रभाव मुंबई, ठाणे और कोंकण के इलाकों तक सीमित है. इन क्षेत्रों में विधानसभा की 80 सीट आती है. राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस की बात करें तो मुंबई और नासिक में एमएनएस का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है. नासिक महानगर पालिका पर एमएनएस का कब्जा है. नासिक से एमएनएस के तीन विधायक भी हैं.

 

हालांकि 2014 लोकसभा चुनाव में एमएनएस का हाल बहुत अच्छा नहीं रहा. राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस को लोकसभा चुनाव में 1 फीसदी (0.13% ) वोट भी नहीं मिला. महाराष्ट्र की किस्मत का फैसला करने जा रहे इस विधानसभा चुनाव में कोई किसी का साथी नहीं है. कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना, बीजेपी चारों अकेले ही मैदान में हैं एमएनएस ना किसी के साथ थी ना इस बार है. लेकिन लक्ष्य सबका एक है. ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल कर महाराष्ट्र पर राज करना.

 

अब अगर इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए 8 साल पहले अलग हुए दो भाई नतीजों के बाद हाथ मिला लें तो महाराष्ट्र की राजनीति की तस्वीर बदलनी तो तय है.

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Web Title: raj may support udhav after election!
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