ब्लॉग: हाशिए पर आधी आबादी!

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विश्व की आधी आबादी कहां सुरक्षित है? अमेरिका में, एशिया में, अफ्रिका में, ऑस्ट्रेलिया में या कहीं और? इसका एक ही जवाब है, कहीं नहीं. साल 2014 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनापूर जिले में पहली कक्षा में पढ़ने वाली 7 साल की एक छात्रा का गैंगरेप हुआ. गैंगरेप के बाद छात्रा के शव को पेड़ से टांग दिया गया. कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश के बदांयू जिले में दो बहनों को गैंगरेप के बाद पेड़ पर टांग दिया गया. आखिर महिलाओं के प्रति इतनी बर्बरता क्यों?

भारतीय समाज में दुर्गा, लक्ष्मी, काली का दर्जा पाने वाली आधी आबादी आखिर क्यों हाशिए पर है. आखिर क्यों उन्हें सिर्फ मजे देने वाली वस्तु के रूप में देखा जाता है. सवाल कई हैं और शायद जवाब भी सब जानते हैं लेकिन पुरूष प्रधान समाज सब कुछ जानते हुए भी अनजान की मुद्रा में है.

इसी समाज ने सदियों तक महिलाओं को शिक्षा, समानता, सत्ता और संपत्ति से दूर रखा. स्त्री होने के नाम पर तरह-तरह के जुल्म किए और आज भी कमोबेश यही कोशिश की जा रही है कि उन्हें मुख्यधारा से दूर रखा जाए. महिलाओं को संसद में 33 फीसदी आरक्षण देने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि यदि महिलाओं को आरक्षण दे दिया गया तो संसद में सीटियां बजेंगी.

दरअसल कानून बनाने वाले हमारे देश के राजनेता यह चाहते ही नहीं है कि इस तरह के विधेयक से महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिया जाए. इसी तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान एकबार उन्होंने बलात्कार पर दिया था. उनके मुताबिक लड़के हैं गलतियां हो जाती हैं.

जब कानून बनाने वाले लोग ऐसा बयान देंगे तो उनके समर्थकों का हौसला बढ़ना लाजिमी है. देश के कई ऐसे बड़े राजनेता हैं जो महिलाओं पर तमाम तरह की पाबंदी लगाने की बातें आए दिन बोलते रहते हैं. कोई एक दल नहीं है, तकरीबन सभी दलों के नेता इस तरह के बेतुकी भरा बयान देते रहते हैं जिनपर शायद ही कार्रवाई होती हो.

कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के जाड़वाड़ गांव में वहां कि पंचायत ने तालिबानी फरमान जारी करते हुए लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर पाबंदी लगा दी. पंचायत का तर्क था कि मोबाइल रखने और जींस पहनने से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ती हैं. ये कैसा तर्क है कि बलात्कार पुरूष करे और तमाम तरह की बंदिश महिलाओं पर लगाई जाए.

सवाल यह है कि जिस देश में 2 साल की बच्ची से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिला तक का बलात्कार किया जाता है वहां क्या इस तरह के रोक लगाने से बलात्कार रुक जाएंगे. 2 साल की बच्ची ने ऐसा कौन सा कपड़ा पहन लिया था कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

ये रीत पुरानी है!

भारत में कभी सती प्रथा के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर शुरू से ही महिलाओं की बलि दी जाती रही है. शिया मुस्लिम धर्म गुरू कल्बे जव्वाद के मुताबिक “लीडर बनना औरतों का काम नहीं है, उनका काम लीडर पैदा करना है. कुदरत ने उन्हें इसलिए बनाया है कि वे अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा करें.“ कुछ इसी तरह का बयान हिन्दू धर्म गुरू भी देते रहते हैं.

भारतीय समाज में बड़े धर्म गुरू जब ऐसे बयान देते हैं तो उनके मानने वालों में यह बात घर कर जाती है कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा प्राप्त नहीं है. और फिर दोयम दर्जे के तथ्यों से उनके अंधेभक्त अपने गुरूओं का बचाव करते रहते हैं. भक्तों के सर्वसम्माननीय आसाराम का बलात्कार कांड किसी से छुपा नहीं है.

आज भी आंध्र प्रदेश और तेलांगाना में देवदासी प्रथा के नाम पर महिलाओं को दान में दिया जाता हैं जहां धर्म के ठेकेदार लोग ताउम्र उनका शारीरिक शोषण करते हैं. देवदासी बनने का मतलब है अपनी सारी जिंदगी धर्म के नाम पर मंदिर को दान में दे देना. जहां महिलाओं के लिए किसी भी तरह के शोषण का विरोध कर पाना बेहद ही मुश्किल है. तेलांगाना में दलित महिलाओं को जबरन देवदासी बनाने की घटनाएं ज्यादा हैं. सदियों से ऐसी तमाम तरह की प्रथाएं महिलाओं पर थोप कर उन्हें हाशिए पर रखा गया है. मुस्लिम धर्म में भी खासकर महिलाओं पर जबरन फतवा थोपने के कई उदाहरण सामने आए हैं.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि महिलाओं पर किसी तरह के रोक-टोक या उनके अधिकारों से संबंधित किसी भी फतवे को मानने के लिए किसी को भी बाध्य नहीं किया जा सकता है. पहले जारी किए गए कई सारे फतवों में महिलाओं को अपने पति के अधीन रहने, सेक्स की जरूरत पूरा करने और बच्चे पैदा करने तक ही सीमित रखने की बात कही गई जो कि इस्लाम धर्म की समानता के खिलाफ है.

मशहूर सुधारवादी इस्लामिक लेखक असगर अली इंजीनियर के मुताबिक कुरान महिलाओं को समान दर्जा और पूरी आजादी देता है. महिलाएं अपनी जिंदगी अपने अनुसार जी सकती हैं. कुरान महिलाओं को एकतरफा तलाक देने की भी बात करता है (खुला), मस्जिदों में नमाज पढ़ने और यहां तक कि नमाजियों के मिश्रित समूह का नेतृत्व करने और काज़ी की तरह व्यवहार करने का भी अधिकार देता है.

कुरान में एक पूरा अध्याय सुरा-अल-निसा महिलाओं के अधिकारों के ऊपर केंद्रित है. इन सब अधिकारों के बावजूद जबरन महिलाओं पर फतवे थोपने की कोशिश की जाती है.

कुछ ही दिन पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद तपस पाल ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महिला कार्यकर्ताओं को रेप करने की धमकी तक दे डाली थी. उन्होंने कहा था, हम अपने लड़कों को भेजेंगे कि वे जाकर माकपा की महिला सदस्यों का रेप करें.

देश के हुक्मरां जब पुरूषों को महिलाओं से ज्यादा ताकतवर समझेंगे तब आम लोगों में इस तरह का विचार घर करेगा ही. तपस पाल के ऐसे बयान के बाद उन्हें संसद और पार्टी से निकाला क्यों नहीं गया यह एक गंभीर सवाल है. शिवसेना की तरफ से भी एक बयान आया था कि रेप का आरोप लगाना फैशन बन गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिस देश में हर 21 मिनट पर बलात्कार होता हो वहां इन नेताओं के मुताबिक रेप का आरोप लगाना फैशन हो गया है. जब तक ऐसे नेताओं को लोग संसद में भेजते रहेंगे तब तक शायद ही देश और महिलाओं का भला हो पाए.

बॉलीवुड भी महिलाओं के शोषण में पीछे नहीं

खुद को सबसे ज्यादा लिबरल कहने वाला बॉलीवुड भी महिलाओं के शोषण में पीछे नहीं है. सुपरस्टार का दर्जा पाने वाले अक्षय कुमार फिल्म राउडी राठौड़ के एक दृश्य में सामने से आ रहीं ‘सोनाक्षी को मेरा माल’ कहकर संबोधित करते हैं. नारियों को आगे बढ़ाने और उनकी प्रगति की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ये सुपरस्टार्स माल, आइटम, पीस आदि शब्दों का प्रयोग करेंगे तो जाहिर है कि उनके चाहने वाले भी ऐसे ही बेहुदा शब्दों का इस्तेमाल करेंगे. अधिकतर फिल्मों में ठंड या पहाड़ वाले सीन में तथाकथित हीरो तो भर बदन कपड़ों में नजर आते हैं लेकिन हीरोइनों को कंपकंपा देने वाले ठंड में भी बहुत ही कम कपड़े पहनाएं जाते हैं.

कॉस्टिंग काउच जैसे उदाहरण भी इसी बॉलीवुड में होते हैं. हनी सिंह और मिका जैसे गायकों को सुपरस्टार बनाने वाला हमारा समाज क्या उनके गानों को पूरे परिवार के सामने गा या सुन सकता है? इनके गानों में महिलाओं को कैसे संबोधित किया जाता है क्या इससे वाकिफ नहीं है हमारा समाज. वैसे भी हमारे सिनेमा में महिलाओं को नाचने, गाने और प्यार करने तक ही सीमित कर दिया गया है. फिल्मों में सभी कारनामों को अंजाम तो हीरो ही देता है. तकरीबन हर क्षेत्र में महिलाओं को उपभोग या मजे देने वाली वस्तु के तौर पर ही पेश किया जा रहा है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार 2012 में 24,923 रेप की घटनाएं दर्ज हुई है जिसमें सबसे ज्यादा 3425 रेप की घटनाएं मध्य प्रदेश में हुई है. इन्हीं आंकड़ो के मुताबिक सबसे ज्याद रेप महिला के जानने वालों ने ही किया, इनकी संख्या 56.2 फीसदी है. यानि महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा आस-पड़ोस के लोगों से ही है. तो क्या ऐसा समझा जाए कि संस्कृति और सभ्यता के धनी भारत में एक महिला को उसी के आप पास के लोगों से अब खतरा पैदा हो गया है? ऐसा हर रेप केस में नहीं होता लेकिन इस कड़वी सच्चाई से मुंह भी नहीं मोड़ा जा सकता. अभी भी 1,00,727 रेप के केस अदालतों में न्याय पाने के इंतजार में हैं.

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के एक अन्य आंकड़े के मुताबिक भारत में तकरीबन 33.66 फीसदी मामलों में ही FIR दर्ज हो पाती है. यदि 100 महिलाओं ने रेप की शिकायत की है तो सिर्फ 33 महिलाओं की शिकायत पर ही FIR दर्ज हो पाती है. जिनमें से 56.6 प्रतिशत मामलों में ही चार्जशीट दाखिल हो पाती है और इसमें भी 14.6 फीसदी मामलों में ही ट्रायल पूरा होता है. ट्रायल में केवल 24.2 प्रतिशत आरोपी दोषी पाये जाते हैं.

यानि मोटे-मोटे तौर पर इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि यदी 1000 महिलाएं पुलिस के पास रेप की शिकायत लेकर जाती है तो केवल 7 मामलों में ही आरोपी को अदालत दोषी ठहराती है. वहीं अदालतों में एक लाख से ज्यादा विचाराधीन पड़े बलात्कार के केस हमारी न्याय प्रणाली के ऊपर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. न्याय का इंतजार करती पीड़िता की मानसिक वेदना की कल्पना करना भी सोच से परे है.

नहीं हैं कहीं सुरक्षित!

16 दिसंबर के आंदोलन के बाद सरकार की तरफ से लोगों को भरोसा दिया गया था कि जल्द से जल्द बलात्कार से संबंधित केसों का निपटारा किया जाएगा लेकिन आंदोलन के ठंडा पड़ते ही सब कुछ पहले जैसा ही चलने लगा. लोग भी भूल गए और सरकार भी.

ऐसा नहीं कि ऐसी घटनाएं सिर्फ भारत में होती हैं. ब्रिटेन के अखबार द इंडिपेंडेंट में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य अफ्रीकी देश कांगो में वहां की सेना को बलात्कार करने का आदेश दिया जाता है. कांगो के मिनोवा शहर में घर से भागी महिला का सैनिक गैंगरेप करते हैं और उसके बाद उन्हें जान से मार दिया जाता है.

रिपोर्ट में नगजिरा नामक महिला का जिक्र है जिसके साथ तीन लोगों ने गैंगरेप किया. महिला के मुताबिक बलात्कारियों में से एक ने कहा कि मैं वहां नहीं जाऊंगा जहां उसके साथियों ने गंदगी गिराई है इसलिए उसने मेरे साथ अप्राकृतिक तरीके से यौन संबंध बनाया. मुझे लगा था कि अब मैं नहीं बचूंगी. अमुमन सभी देशों में किसी न किसी रूप में महिलाओं का शोषण जारी है.

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Web Title: Raja Babu Agnihotri abp news blog on women rape cases in India
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