एबीपी न्यूज का असर: इस 'सफेद हाथी' की कहानी आपको चौंका देगी?

By: | Last Updated: Friday, 18 September 2015 1:27 PM
rajeev gandhi super speciality hospital delhi

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जिस अस्पताल में 200 बेड लगाने और डॉक्टर को बुलाने की बात कर रहे हैं वो अस्पताल दिल्ली के ताहिरपुर का राजीव गांधी सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल है. एबीपी न्यूज ने रिपोर्ट दिखाई थी कि एक तरफ डेंगू से हाहाकार मचा है और दूसरी तरफ दिल्ली के दो सरकारी अस्पतालों में 950 बेड खाली हैं. एबीपी न्यूज के इस रिपोर्ट को दिखाने के 24 घंटे के भीतर असर हुआ है. राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी के खाली पड़े बेड पर डेंगू के मरीजों का इलाज शुरु हो गया है.

 

दिल्ली में डेंगू से हाहाकार मचा हुआ है और राजधानी के सीने पर 88 करोड़ की लागत से बना राजीव गांधी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल मुश्किलों का मजाक उड़ा रहा है.

 

ये दिल्ली सरकार का दूसरा सफेद हाथी है 72 करोड़ की लागत से बना जनकपुरी सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल. दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले इन अस्पतालों में सबकुछ है. कुछ नहीं है तो सिर्फ मरीज.

 

6 साल के अमन को चार अस्पतालों ने भर्ती करने से मना कर दिया था. 40 साल की मोनिका के दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों ने भी बेड नहीं होने की वजह से भर्ती नहीं किया था. दोनों ने दम तोड़ दिया. क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री ये बताएंगे कि उनके सरकारी अस्पतालों में सैकड़ों की संख्या में खाली पड़े बेड जब जनता की जान नहीं बचा सकते तो ये किस काम के हैं? यहां मौजूद सुविधाएं किस काम की?

 

दो दिन पहले ही केजरीवाल अपने औचक दौरे के बाद मरीजों को बेड नहीं मिलने पर नया कानून लाने की बात कर रहे थे. विशेष सत्र बुलाने वाले थे लेकिन केजरीवाल पहले ये तो बताएं कि अस्पताल भी उनका, जमीन भी उनकी, और अधिकार भी उनके फिर वो करोड़ों की लागत से जनता के लिए ही बने इस अस्पताल से जनता की ही मदद क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

 

पूर्वी दिल्ली के ताहिरपुर में करीब 13 एकड़ के बड़े हिस्से में बना राजीव गांधी अस्पताल साल 2009 से ही चल रहा है. राजीव गांधी अस्पताल में करीब 650 बेड हैं लेकिन यहां सिर्फ ओपीडी के मरीज आते हैं यानि सिर्फ चेकअप होता है भर्ती होने की कोई व्यवस्था नहीं है. वजह यहां बेड भी है सुविधाए भी लेकिन डॉक्टर्स नहीं है और इसलिए मरीज भी नहीं है.

 

दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार से लेकर केजरीवाल तक इस अस्पताल को पूरी तरह से चालू नहीं कर पाए हैं.

 

टाइम्स ऑफ इंडिया से दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि मैंने गुरु तेग बहादुर और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल से कहा है कि वो अपने कुछ मरीजों को इन अस्पतालों में शिफ्ट करें. कुछ वक्त के लिए डॉक्टर्स को राजीव गांधी अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा.

 

दिल्ली सरकार के इस सफेद हाथी पर होने वाले खर्च के बारे में भी जान लीजिए. साल 2011-12 में राजीव गांधी सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल को दिल्ली सरकार ने 5 करोड़ का बजट दिया था. जिसमें से 4 करोड़ 83 लाख खर्च हुए.

 

ऑडिट रिकॉर्ड्स के मुताबिक 1 करोड़ 1 लाख ऑफिस खर्च था. 2 करोड़ 80 लाख सप्लाई और सामान में खर्च हुआ. 93 लाख कर्मचारियों की तनख्वाह पर और यहां लोगों के लिए होने वाले इकलौते काम ओपीडी पर सिर्फ दो लाख खर्च हुए.

 

एक साल बाद 6 करोड़ का बजट तय हुआ. लेकिन जनता के मेडिकल ट्रीटमेंट पर इस बार भी सिर्फ दो लाख खर्च हुए.

 

2013 में दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने अस्पताल को पीपीपी मॉडल यानि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से चलाने की योजना बनाई थी लेकिन पार्टनर ही नहीं मिले.

 

दिल्ली में डेंगू से बढ़ते मौत के आंकड़ों के बाद दिल्ली हाई कोर्ट नोटिस भेजकर एमसीडी समेत दोनों सरकारों से जवाब मांगा है कि मौत रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

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