बीजेपी की तरफ से बिहार में क्या ये राजपूत बनेगा मुख्यमंत्री?

By: | Last Updated: Tuesday, 13 October 2015 12:32 PM

नई दिल्ली: बिहार विधान सभा चुनाव में सूबे के मुखिया का ताज किस दल के हिस्से में आएगा ये तो भविष्य के गर्भ में छुपा है, लेकिन सियासत के गलियारे में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन, इसकी दावेदारी शुरू हो गई है. एनडीए ने मुख्यमंत्री पद बीजेपी के हिस्से छोड़ दिया है. दूसरी तरफ महागठबंधन की तरफ से नीतीश कुमार घोषित मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं.

अब महागठबंधन की तरफ से तो नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे ये स्पष्ट कर दिया गया है. एनडीए में भी बीजेपी के हिस्से सूबे के मुखिया की कुर्सी आ गई है. लेकिन अब असली लड़ाई बीजेपी के दावेदारों में है. मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बीजेपी की तरफ से कौन? इसकी चर्चा जोरों पर चल रही है. बीजेपी की तरफ से कई नेताओं के अलग-अलग बयान आ रहे हैं. बिहार से बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने प्रेम कुमार का नाम मुख्यमंत्री के रूप में उछाल दिया है. हुसैन ने गया में पार्टी की एक मीटिंग में यह घोषणा की. उन्होंने कहा, ‘मैं आपसे आग्रह करता हूं कि भारी संख्या में वोट देकर अपने नेता प्रेम कुमार को जिताएं. वह राज्य में मुख्यमंत्री पद के कैंडीडेट हैं. एनडीए सत्ता में आती है, तो वह ही राज्य के मुख्यमंत्री होंगे. आपको बता दें कि 6 बार बिहार के गया से विधायक चुने गए हैं डॉ. प्रेम कुमार.

 

उधर संघ और संगठन के सूत्र बता रहे हैं कि रोहतास के दिनारा से चुनाव लड़ रहे राजेंद्र सिंह बीजेपी की तरफ से सूबे के सीएम पद के मजबूत दावेदार हैं. इन पर नरेंद्र मोदी की विशेष कृपा है. सासाराम के सुअरा हवाई अड्डा मैदान में पीएम मोदी ने इशारों ही इशारों में इसका संदेश भी दे दिया. पीएम ने कहा कि देखिए राजेंद्र सिंह के पास अभी तक लोग टिकट मांगने जाते थे, हमने इनको जबरदस्ती टिकट देकर आपके पास भेजा है, अब आप समझ लीजिए….. नीतिन गडकरी ने भी इशारों में ही ये संदेश वहां दिया था.

 

राजेंद्र सिंह ने चुनाव लड़ने से पहले अब तक पूरी तरह से संगठन का काम संभाला था. लोकसभा में झारखंड के 14 में से 12 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी. वहीं विधानसभा में बीजेपी के गंठबंधन को पूर्ण बहुमत मिली. बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने राजेंद्र सिंह के संगठन में किये गये काम को महत्व देते हुए दिनारा से उम्मीदवार बनाया है. इनके क्षेत्र झारखंड के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक प्रचार के लिए डेरा डाले हुए हैं. हालांकि सिंह बिहार के ही रहने वाले हैं. पिछले तीन साल से झारखंड में प्रदेश संगठन महामंत्री का काम देख रहे हैं. कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि राजेंद्र सिंह बिहार के ‘मनोहर लाल खट्टर’ हैं.

 

अब आप इससे पहले हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री चयन पर जरा गौर करिये. दोनों ही जगहों पर मोदी ‘राज’ में मजबूत क्षेत्रीय क्षत्रपों का पत्ता काट दिया गया. नये और युवा को तरजीह दी गई. इसकी वजह मोदी स्टाइल भी है. मोदी संगठन और सरकार दोनों ही जगहों पर किसी मजबूत को मुखिया बनाने से कतराते हैं. इसलिए भी स्थानीय बड़े क्षत्रपों पर संशय बना हुआ है. इनके पक्ष में एक बात और है कि ये साफ छवि के साथ ही स्थानीय गुटबाजी से दूर हैं. इस तरह स्थानीय गुटबाजी पर भी कंट्रोल किया जा सकता है. इनकी और कुर्सी के बीच रूकावट इनका राजपूत होना हो सकता है. क्योंकि महागठबंधन इनकी जाति पर सवाल उठा सकता है. वैसे गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया था कि बिहार का मुख्यमंत्री पिछड़ा होगा. लेकिन हो सकता है कि उनका ये बयान सिर्फ चुनावी जुमला साबित हो. खैर.. बिहार के स्थानीय कद्दावर बीजेपी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी को दरकिनार करना भी लोहे के चने चबाने जैसा मुश्किल काम है. लेकिन सियासी गलियारे में इनका नाम जोरों से चल पड़ा है.

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Web Title: rajendra singh will be bjp cm candidate?
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