जनता के नहीं आए अच्छे दिन, फिर आएंगे रामलीला मैदान

By: | Last Updated: Monday, 23 February 2015 11:08 AM
rajnath meet ekta parishad leaders

नई दिल्ली: भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ आंदोलन करने वाले एकता परिषद के नेताओं से मुलाकात की है. राजनाथ सिंह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात किए हैं.

 

एक बार फिर अन्ना हजारे केंद्र सरकार के खिलाफ खम ठोक रहे हैं. बस अंतर इतना है कि पिछली बार कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी तो इस बार बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार. भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ अन्ना हजारे का धरना जंतर मंतर पर शुरू हो गया है . अन्ना सरकार को चेतावनी देने के लिए आज और कल दो दिनों का आंदोलन कर रहे हैं .

 

अन्ना ने अपने मंच पर किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को आने से रोक दिया है . शाम को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से उनकी मुलाकात होगी . जबकि संसद में सरकार ने भरोसा दिया है कि किसानों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी .

 

अन्ना ने जंतर मंतर पर मोदी सरकार के लिए कड़ी बातें कहीं. बहुत सारी ऐसी बातें जो यूपीए सरकार के लिए कहते रहे हैं. अन्ना ने कहा कि अच्छे दिन नहीं आए. अन्ना ने मांग की है कि वही जमीन अधिग्रहण कानून लाया जाए जो यूपीए सरकार लेकर आई थी. केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ समाजसेवी अन्ना हज़ारे जमकर गरजे. उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की तुलना अंग्रजों से कर दी. उन्होंने कहा कि अध्यादेश वापस लो, संशोधन से नहीं चलेगा काम.

 

किसानों का कोर्ट जाने का हक छिना-अन्ना

 

दिल्ली के जंतर-मंतर पर भाषण देते हुए अन्ना ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की सबसे खतरनाक बात ये है कि इसमें किसानों से कोर्ट जाने का हक भी छीन लिया गया है. अन्ना ने अपने समर्थकों से कहा कि वो गांव-गांव जाकर किसानों को बताएं कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ने किस तरह उनके वाजिब अधिकारों को छीनने का काम किया है. मोदी सरकार ने पिछले साल दिसंबर में अध्यादेश लाकर संसद में पारित भूमि अधिग्रहण कानून में कई अहम बदलाव किए हैं, जिसका बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है. अन्ना ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ देश भर में आंदोलन छेड़ने का एलान करते हुए कहा कि सरकार ने अध्यादेश वापस नहीं लिया तो फिर से रामलीला मैदान आएंगे.

 

अध्यादेश में क्या लिखा है?

 

समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश ने किसानों से अदालत जाने का हक भी छीन लिया है, क्योंकि अब कोर्ट जाने के लिए सरकार की इजाजत लेनी होगी. आइए जानते हैं कि इस मसले पर अध्यादेश में क्या लिखा है?

 

मोदी सरकार के विवादित अध्यादेश ने 2013 में संसद से पारित भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 87 में अहम बदलाव किया है. संसद में पारित कानून की धारा 87 में लिखा था कि अगर कोई सरकारी विभाग भूमि अधिग्रहण कानून पर अमल के दौरान गलती करता है, तो उसके लिए विभाग के प्रमुख को दोषी माना जाएगा. लेकिन दिसंबर 2014 में मोदी सरकार ने जो अध्यादेश जारी किया है, उसने धारा 87 को पूरी तरह बदल दिया है. अध्यादेश के जरिये लागू धारा 87 में लिखा है. केंद्र या राज्य सरकार का कोई मौजूदा या पूर्व अधिकारी अगर अपने पद पर रहने के दौरान इस कानून के तहत कोई अपराध करता है, तो कोई भी अदालत सरकार की इजाजत के बिना उस अपराध का संज्ञान नहीं ले सकती.

 

अन्ना ने अपने भाषण में इसी प्रावधान को निशाना बनाते हुए कहा है कि अध्यादेश ने किसानों से कोर्ट जाने का अधिकार भी छीन लिया है. भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का जिक्र राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में भी किया . राष्ट्रपति ने कहा कि जिन किसानों की भूमि अधिग्रहीत की जाएगी उनके हितों की रक्षा की जाएगी . भूमि अधिग्रहण बिल के मसौदे को लेकर कांग्रेस खुश नहीं है, उसका मानना है कि ये किसान विरोधी है .

 

जमीन के लिए मालिकों की सहमति जरूरी नहीं

 

सरकारी और निजी साझा प्रोजेक्ट के लिए जो जमीन ली जाएगी उसमें 70 फीसदी जमीन मालिकों की सहमति जरूरी नहीं रह गई है . जबकि यूपीए वाले कानून में इसे रखा गया था .  यानी रक्षा, ग्रामीण बिजली, गरीबों के लिए घर और ऑद्योगिक कॉरिडोर जैसे मामलों में अगर जमीन लिया जाता है तो फिर 70  फीसदी जमीन मालिकों की सहमति का प्रावधान मौजूदा अध्यादेश में खत्म किया जा चुका है . साथ ही सिर्फ निजी क्षेत्र के लिए ली जाने वाली जमीन के लिए पहले जहां 80 फीसदी किसानों की सहमति जरूरी थी वहीं इस अध्यादेश में इसे खत्म किया जा चुका है

 

जमीन वापस नहीं ले सकते

 

दूसरा विवाद इस बात को लेकर हो रहा है कि पहले की व्यवस्था के मुताबिक अधिग्रहित जमीन का इस्तेमाल अगर पांच साल तक नहीं होता है तो फिर उसे चाहे तो जमीन मालिक वापस मांग सकता है लेकिन मोदी सरकार ने ऐसी व्यवस्था खत्न कर दी है .

 

उपजाऊ जमीन पर भी आफत

 

पहले के कानून के मुताबिक जहां बंजर जमीन ही सरकार ले सकती थी वहीं अब कोई भी उपजाऊ जमीन भी सरकार किसान की मर्जी के बगैर ले सकती है .

इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार और अन्ना आज आमने सामने हैं .  वैसे खबर ये भी है कि सरकार कुछ फैसले वापस ले सकती है . सरकार की ओर से भरोसा दिया जा रहा है कि किसानों के हितों के साथ नाइंसाफी नहीं होगी . सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि पुराने कानून और अध्यादेश में किसानों के मुआवजे के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है यानी मुआवजा पहले जितना ही मिलेगा.

 

सरकार भले ही भरोसा दे रही है लेकिन संसद में इस अध्यादेश को पास कराना आसान नहीं है . विरोध तो हो ही रहा है राज्यसभा में सरकार के पास जरूरी बहुमत भी नहीं है . अन्ना ने सरकार को चार महीने का वक्त दिया है . अगर फैसला नहीं बदलता तो फिर अन्ना जेल भरो आंदोलन तक करने वाले हैं .