दोबारा गिरफ्तार होगा मसरत आलम?

By: | Last Updated: Thursday, 12 March 2015 10:14 AM
Rajnath Singh comment in parliament on Masarat Alam

नई दिल्ली: मसरत आलम की रिहाई पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में दोबारा बयान दिया है. राजनाथ सिंह ने कहा है कि मसरत आलम की गिरफ्तारी के लिए कानून के तहत दोबारा कार्यवाही शुरू की जाएगी. ABP न्यूज ने दो दिन पहले ही साफ कर दिया था कि मसरत की रिहाई के पीछे मुफ्ती सरकार का हाथ नहीं बल्कि उमर सरकार का हाथ था.

 

मसरत रिहाई के विवाद को लेकर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि जम्मू कश्मीर की सरकार से फिलहाल वो बाहर आने के मूड में नहीं है .  इस बीच एबीपी न्यूज की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मसरत की रिहाई के पीछे मुफ्ती नहीं उमर अब्दुल्ला सरकार का हाथ रहा है.

 

गृहमंत्री ने आज संसद में अलगाववादी मसरत आलम की रिहाई पर रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये बताया कि मसरत आलम पर 27 क्रिमिनल केस है. इसके साथ ही गृहमंत्री ने एबीपी न्यूज की दो दिन पहले की रिपोर्ट पर मुहर लगाई.

 

एबीपी न्यूज 10 मार्च को ही बताया था कि अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई उमरअब्दुल्ला सरकार के समय ही तय हो गई थी और आज राजनाथ सिंह ने भी इस खबर पर मुहर लगाते हुए कहा कि मसरत की रिहाई पिछली सरकार की लापरवाही थी.

 

रिश्ते सुधारने की कोशिश में बीजेपी

मसरत आलम की रिहाई को लेकर विपक्ष के हमले झेल रही बीजेपी जम्मू कश्मीर सरकार में सहयोगी पीडीपी से संबंध सुधारने की कोशिशों में जुटी है.

 

जम्मू कश्मीर में पीडीपी -बीजेपी की सरकार बनवाने में बीजेपी महासचिव राम माधव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, अब वो रिश्तों में आई तल्खी को कम करने की कोशिशों में भी जुट गई है, इसी के तहत राम माधव ने मुफ्ती  मोहम्मद सईद से मुलाकात की और दोनों पार्टियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की अपील की .

 

पीटीआई के मुताबिक राम माधव ने सीएम सईद को अमित शाह का संदेश देते हुए कहा है कि संजीदा और देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत ही काम किया जाए .

 

पीटीआई के मुताबिक राम माधव ने मसरत की रिहाई को लेकर सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद से अपना विरोध दर्ज कराया है .

 

 

एबीपी न्यूज़ की पड़ताल

 

ABP न्यूज की पड़ताल के मुताबिक मसरत आलम  की PSA में यानी पब्लिक सेफ्टी एक्ट में हिरासत सितंबर में खत्म हो गई थी लेकिन उसे दोबारा हिरासत में लेने के लिए नियमों के मुताबिक कदम नहीं उठाए गए. इस वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या उमर सरकार की ओर से हिरासत को बढ़ाने के लिए क्या माकूल कदम नहीं उठाए गए.

 

दरअसल 30 सितंबर 2014 मसरत की हिरासत की अवधि समाप्त हो रही थी. लेकिन उससे पहले जम्मू के गृह सचिव ने एतिहातन जम्मू के डीएम को चिठ्ठी लिखी जिसमें कहा गया कि मसरत पर पीएसए खत्म हो रहा है.

 

इसके बाद 26 अक्टूबर को जम्मू कस्मीर में चुनावों का एलान हुआ इसके साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो गई. 9 दिसंबर को डजीएम ने गृह सचिव को लिखा कि मसरत की हिरासत को मंजूरी मिल गई है.

 

इसके बाद 4 फरवरी को गृह सचिव ने डीएम को जवाब दिया कि मंजूरी देने में ज्यादा वक्त लगा इसलिए हिरासत को अवैध माना जाएगा. मसरत को इसके बाद हिसरासत में नहीं रखा जा सकता.

 

4 मार्च को जम्मू के डीएम ने नई सरकार बनने के बाद एसपी को चिठ्ठी लिखी. इस चिठ्ठी में डीएम ने 15 फरवरी और 4 फरवरी का हवाला देकर मसरत को रिहा करने के लिए कहा इसके बाद 7 मार्च को मसरत आलम को रहा कर दिया गया.

 

इस पूरे घटना क्रम में उमर सरकार की लेटलतीफी साफ नजर आती है. डीएम ने गृह सचिव को जवाब देने में 12 दिन से ज्यादा का समय लगाया जिसके चलते मसरत आलम को रिहा करना सरकार की मजबूरी बन गई.

 

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