राम मंदिर निर्माण: पीएम कुछ कहना नहीं चाहते, बीजेपी खारिज नहीं कर सकती

By: | Last Updated: Friday, 4 December 2015 3:27 PM
Ram Mandir Issue: Mohan Bhagwat statement, PM silence and BJP stand

नई दिल्ली : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 2 नवंबर को कोलकाता के एक कार्यक्रम में राम मंदिर के निर्माण के लिए लोगों को तैयार रहने को कहा. भागवत ने कहा, ‘कोई नहीं कह सकता कि मंदिर कैसे और कब निर्माण होगा लेकिन हमें इसके लिए तैयारी करने और तैयार रहने की जरूरत है.’ भागवत का राम मंदिर पर दिया गया ये बयान एक बार फिर सुर्खियों में छा गया. ऐसा नहीं है कि भागवत ने पहली बार राम मंदिर पर बयान दिया हो. वीएचपी दिग्गज अशोक सिंघल की श्रद्धांजलि सभा में भागवत ने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर बना कर ही अशोक सिंघल को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है.

 

राम जन्म भूमि न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास भी समय-समय पर पूछते रहते हैं कि मोदी जी अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा? विश्व हिन्दू परिषद के दिग्गज अशोक सिंघल अब इस दुनिया में नहीं हैं. उन्होंने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तो राम तक कह दिया था. सिंघल ने कहा कि पीएम मोदी के अंदर राम की शक्ति है और यही शक्ति राम मंदिर बनवाएगी.

 

बार-बार राम मंदिर पर आने वाले बयानों से आखिर क्या निकाला जाए? क्या राम मंदिर बनाने को लेकर कुछ विशेष तैयारी तो नहीं चल रही है या मोदी की इच्छा के खिलाफ सरकार पर बेवजह दबाव बनाने की कोशिश चल रही है? या फिर कहीं ऐसा तो नहीं है कि सोची समझी रणनीति के तहत बीजेपी और आरएसएस मिलकर मामले को गरमाने की कोशिश कर रहे हैं.

 

बहरहाल मोहन भागवत के राम मंदिर की तैयारी वाले बयान के बाद राजनीति गर्म होने लगी है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी से पूछा है कि ‘मंदिर वहीं बनाएंगे पर कब बनाएंगे’?  मीडिया में भी इस सवाल पर बहस तेज हो गई है जबकि शुक्रवार 4 दिसंबर को संसद में भी इस मामले को उठाया गया.

कहीं ऐसा तो नहीं है कि मोहन भागवत ने जानबूझ कर राम मंदिर की मांग को लेकर अपनी बयानबाजी तेज कर दी है? ऐसा लगता है कि राम मंदिर पर जिस तरह से बार-बार बयान आ रहे हैं उसके पीछे कोई रणनीति नहीं छिपी है. दरअसल आरएसएस प्रमुख होने के नाते मोहन भागवत सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रमों में रोज शामिल होते हैं और स्वाभाविक है कि ऐसे कार्यक्रमों वो मंदिर जैसे विषयों पर ही बोलेंगे. आप क्या उम्मीद करते हैं कि अगर मोहन भागवत अशोक सिंघल या अयोध्या के मारे गए कार सेवकों के परिवार वालों से मिलेंगे तो वहां वो पीएम मोदी की जनधन योजना पर भाषण देंगे?

 

दरअसल हुआ ये है कि मोहन भागवत सहित वीएचपी के तमाम नेता पहले भी राम मंदिर जैसे विषयों पर खूब बोलते थे लेकिन तब न्यूज चैनलों का कैमरा उनके पीछ नहीं होता था. जब से बीजेपी की सरकार बनी है न्यूज चैनलों के कैमरों ने मोहन भागवत का पीछा करना शुरू कर दिया है. भागवत मंदिर वाली वही पुरानी बातें दोहराते हैं पर मीडिया को लगता है राम मंदिर को एक बार फिर जान बूझ कर हवा दी जा रही है.

 

राम मंदिर का विवाद सुप्रीम कोर्ट में करीब पांच साल से पड़ा हुआ है. मोदी सरकार के सत्ता में काबिज हुए करीब पौने दो साल हो चुके हैं. अगर मोदी सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर होती तो सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई में तेजी के लिए आग्रह कर सकती थी. विलंब की एक बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि चूंकि राम जन्मभूमि विवाद से जुड़े कागजात काफी संख्या में हैं लिहाजा उनके अनुवाद में काफी वक्त लग रहा है. जाहिर है मंदिर के मुद्दे पर मोदी सरकार अगर इस समय गंभीर होती तो वो कागजातों के अनुवाद सहित तमाम जरूरी सुविधाएं मुहैया करा सकती थी.

 

देश की जो वर्तमान राजनीतिक-आर्थिक स्थिति है उसे देखकर नहीं लगता है कि मोदी राम मंदिर के चक्कर में अभी पड़ना चाहते हैं, पर राजनीतिक रूप से ये मुद्दा इतना नशीला और रसीला है कि न तो प्रधानमंत्री इस पर कुछ कहना चाहते हैं और न ही बीजेपी इसे खारिज कर सकती है.

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Web Title: Ram Mandir Issue: Mohan Bhagwat statement, PM silence and BJP stand
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