राजभवन में भी हुआ व्यापम का लेन-देन?

By: | Last Updated: Thursday, 9 July 2015 2:02 AM

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले में नया खुलासा हुआ है. एसटीएफ के सामने आरोपी वीरपाल का दिया बयान सामने आया है. इसमें वीरपाल ने आरोप लगाया है कि उसने शिक्षकों की संविदा नियुक्ति के लिए राजभवन में राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेष यादव को पैसे दिए थे. वीरपाल इस वक्त जेल में है जबकि शैलेष यादव की मौत हो चुकी है. शैलेष भी घोटाले में आरोपी था.

 

वहीं व्यापम घोटाले में दर्ज FIR से एक और नया खुलासा खुलकर सामने आया है. एक मंत्री की पत्नी ने भी इस मामले में सिफारिश की थी. लेकिन अभी उनके नाम का खुलासा नहीं किया गया है.

 

राज्यपाल रहें या जाए के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

 

आपको बता दें कि राज्यपाल पर भी व्यापम घोटाले के आरोप लगे हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर आज सुनवाई होनी है.

 

 

राज्यपाल का भी नाम आया

यूपीए सरकार के दौरान बनाए गए 11 राज्यपालों को हटाने वाली मोदी सरकार राम नरेश यादव को अभयदान दे चुकी है. आज सुप्रीम कोर्ट में राज्यपाल रामनरेश यादव को पद से हटाए जाने और उनसे पूछताछ करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी. सवाल ये है कि राज्यपाल को क्यों बचा रही है मोदी सरकार?

 

व्यापम घोटाले में नाम आने के बावजूद राम नरेश यादव मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने रहे और बने हुए हैं. मोदी सरकार आने के बाद शीला दीक्षित और शिवराज पाटिल से लेकर बी एल जोशी और एम के नारायणन तक कांग्रेस सरकार के बनाए कई राज्यपालों की कुर्सी जाती रही. राम नरेश यादव भी पिछली सरकार के वक्त राज्यपाल बने थे. उनके खिलाफ वनरक्षक भर्ती घोटाले में एफआईआर दर्ज है और आरोप है कि राज्यपाल ने वनरक्षक भर्ती में पांच लोगों के नाम की सिफारिश की थी. इसी साफ फरवरी में राज्यपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें पद से हटाने की मांग जोरों से उठी थी लेकिन मोदी सरकार ने अभयदान दे दिया. अब आजीवन कांग्रेसी रहे राज्यपाल रामनरेश यादव को हटाने की मांग कांग्रेस ही कर रही है, लेकिन बीजेपी कुछ नहीं बोल रही.

 

राजभवन से घोटाले का खुलासा पिछले साल हुआ था. राज्यपाल के पूर्व ओएसडी धनराज यादव पर व्यापम के निलंबित अधिकारियों से सांठगांठ कर बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को पास कराने का आरोप है. धनराज को पिछले साल ही गिरफ्तार कर लिया गया था. राज्यपाल के बेटे और पुलिस कांस्टेबल भर्ती घोटाले में आरोपी शैलेश यादव का संदिग्ध हालात में लखनऊ में इसी साल मार्च में शव मिला था.

 

फिलहाल राज्यपाल पद पर होने की वजह से जांच से रियायत मिली हुई है लेकिन एसआईटी ने कहा है कि जैसे ही राज्यपाल पद से हटेंगे कार्रवाई होगी. रामनरेश यादव का कार्यकाल अगले साल सितंबर में खत्म हो रहा है.

 

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक 11 राज्यपालों को हटाया जा चुका है लेकिन केंद्र सरकार ने राम नरेश यादव को नहीं हटाया था. राम नरेश यादव शायद पहले ऐसे राज्यपाल हैं जिन्होंने मोदी सरकार के शासन में राजभवन में चार साल पूरे कर लिए हैं. अब सवाल उठ रहे हैं कि सरकार राज्यपाल को क्यों बचा रही है? क्या शिवराज सरकार को डर है कि अगर राम नरेश यादव के खिलाफ जांच हुई तो और भी बड़े नामों से पर्दाफाश हो जाएगा?

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Web Title: ram naresh yadav_Madhya Pradesh_Shivraj Singh Chauhan_Narendra Modi_Anant Kumar_
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