रामचंद्र छत्रपति: वह जाबांज पत्रकार जिसने राम रहीम की चूलें हिला दीं!

दडबी गांव के रहने वाले रामचंद्र छत्रपति सिरसा जिले से रोज शाम को निकलने वाला अखबार ‘पूरा सच’ छापते थे.

By: | Last Updated: Monday, 28 August 2017 7:21 PM
Ram Rahim Rape Case: Know the story of Ram Chander Chhatrapati, journalist who played key role in case

नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सोमवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने रेप केस में 20 साल की सजा सुनाई. इस पूरे केस में एक शख्स ऐसा रहा जिसे इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा. उस शख्स का नाम है रामचंद्र छत्रपति. लोगों को कम ही पता है कि रामचंद्र ने ही सबसे पहले गुरमीत राम रहीम के खिलाफ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी पीड़ित साध्वी की चिट्ठी छापी थी. साल 2002 में इस रेप केस की जानकारी पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने पहली बार दी थी. बाद में रामचंद्र को इसकी कीमत चुकानी पड़ी और उनकी गोली मार कर हत्या कर दी गई.

‘पूरा सच’ नाम का अखबार छापते थे रामचंद्र

सिरसा मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर दडबी गांव के रहने वाले रामचंद्र छत्रपति सिरसा जिले से रोज शाम को निकलने वाला अखबार ‘पूरा सच ’ छापते थे. छत्रपति के साथ काम करने वाले वरिष्ठ पत्रकार युसूफ किरमानी ने इस मामले की बारीकियां साझा करते हुए बताया कि छत्रपति दिल्ली और चंडीगढ़ से से प्रकाशित कई समाचारपत्रों के लिए फ्रीलांसिंग का काम करते थे. जब यह चिट्ठी उनके हाथ लगी तो उन्होंने इन सभी समाचार पत्रों को यह चिट्ठी समाचार के रूप में छापने के लिए भेजी थी लेकिन किसी अखबार ने इसे नहीं छापा. उसके बाद ही उन्होंने इसे अपने अखबार ‘पूरा सच ’ में छापने का फैसला किया.

चिट्ठी छापने के बाद मिलने लगीं जान से मारने की धमकियां

किरमानी ने बताया कि ना सिर्फ छत्रपति ने चिट्ठी छापी बल्कि उस पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पीड़ित साध्वी से इस पत्र को प्रधानमंत्री , सीबीआई और अदालतों को भेजने को कहा. उन्होंने उस चिट्ठी को 30 मई 2002 के अंक में छापा था जिसके बाद उनको जान से मारने की धमकियां दी गईं. उसी साल 24 सितंबर 2002 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए. इस बीच छत्रपति को जान से मारने की धमकियां मिलती रहीं.

24 अक्टूर 2002 को रामचंद्र को गोली मारी गई

किरमानी याद करते हैं कि वह 24 अक्टूबर का दिन था. छत्रपति शाम को आफिस से लौटे थे. उस समय उनकी गली में कुछ काम चल रहा था और वह उसी को देखने के लिए घर से बाहर निकले थे. उसी समय दो लोगों ने उन्हें आवाज देकर बुलाया और गोली मार दी. 21 नवंबर को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में उनकी मौत हो गई. इसके बाद उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता की मौत की सीबीआई जांच की मांग की.

2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए गए

जनवरी 2003 में अंशुल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सीबीआई जांच करवाने के लिए याचिका दायर की, जिस पर हाईकोर्ट ने नवंबर 2003 में सीबीआई जांच के आदेश दिए. अपने पैतृक गांव दडबी में खेती किसानी करने वाला अंशुल अपनी मां कुलवंत कौर, छोटे भाई अरिदमन और बहन क्रांति और श्रेयसी के साथ अपने पिता को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा है . ‘पूरा सच’ आज भी प्रकाशित हो रहा है लेकिन नियमित रूप से नहीं.

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Web Title: Ram Rahim Rape Case: Know the story of Ram Chander Chhatrapati, journalist who played key role in case
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