अगर जाति आधारित आंकड़े जारी किये गये तो लालू और नीतीश पर होगा सबसे ज्यादा असर: पासवान

By: | Last Updated: Sunday, 19 July 2015 1:07 PM
ram vilas paswan

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को जारी करने से पहले इनके व्यापक वर्गीकरण की वकालत करते हुए आज कहा कि एक बार ये आंकड़े सार्वजनिक हो गये तो सबसे ज्यादा असर लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जैसे नेताओं पर डालेंगे.

 

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष पासवान ने यह दावा भी किया कि अन्य पिछड़ा वगोर्ं :ओबीसी: में शामिल अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) की निष्ठा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले राजग की ओर बढ़ी है जो खुद भी ईबीसी से ताल्लुक रखते हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘लोजपा की मांग है कि भले ही थोड़ी देर हो जाए लेकिन सरकार को जाति आधारित आंकड़ों को पूरे वर्गीकरण के बाद ही सार्वजनिक करना चाहिए. वर्गीकरण में समय लगेगा, लेकिन जब ये सार्वजनिक होंगे तो उन लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा जो सबसे ज्यादा शोर मचा रहे हैं.’’ बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार तथा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद फौरन आंकड़े जारी करने पर जोर दे रहे हैं.

 

सपा, जदयू, राजद और द्रमुक जैसे दलों ने 1912 के बाद से आठ दशकों में पहली बार हुई सामाजिक आर्थिक और जाति आधारित जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को जारी नहीं करने के लिए केंद्र की आलोचना की है.

 

सरकार ने गुरूवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में जाति आधारित आंकड़ों के लिए एक विशेषज्ञ समूह बनाया था और विभिन्न श्रेणियों में एकत्रीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाने के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराया था.

 

पासवान ने पीटीआई-भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा, ‘‘मंडल राजनीति का फायदा उठाने वाले लालू प्रसाद और नीतीश कुमार को सबसे ज्यादा नुकसान होगा क्योंकि पिछड़ों में शामिल अन्य छोटी जातियां सत्ता में अपना हिस्सा मांगेंगी जो मिलकर कुछ प्रभावशाली उंची जातियों से संख्या में अधिक हैं.’’

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