व्यापम घोटाले में 46वीं मौत, आरोपी कांस्टेबल का शव पंखे से लटकता मिला

By: | Last Updated: Tuesday, 7 July 2015 2:06 AM

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आज एक बार फिर व्यापम घोटाले में आरोपी एक कांस्टेबल की मौत की खबर है.

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक व्यापम घोटाले में एक और मौत हुई है. टीकमगढ़ के ओरछा में पुलिस कांस्टेबल रमाकांत पांडेय का शव पंखे से लटकता हुआ मिला है.

 

पांडेय व्यापम घोटाले में आरोपी था. कुछ महीने पहले एसटीएफ ने पांडे से पूछताछ भी की थी. अब तक 33 ऐसी मौतें हुई है जो सीधे व्यापम घोटाले से जुड़ी हुई हैं लेकिन 12 मौत का कनेक्शन व्यापम से जुड़ा है या नहीं, इसकी जांच हो रही है.

 

TOI में छपी खबर के मुताबिक, टीकमगढ़ के ओरछा में तैनात कांस्टेबल रमाकांत पांडेय का शव मिला है. ओरछा के टूरिस्ट आउट पोस्ट में पंखे से लटकता शव मिला है. इस घोटाले के केस में पिछले दिनों STF ने उनसे पूछताछ की थी. एसपी के मुताबिक पांडे को शराब पीने की लत थी.

व्यापम घोटाला: पंखे से लटका मिला आरोपी कांस्टेबल का शव 

रमाकांत पांडेय की मौत व्यापम की 46वीं मौत हो सकती है. सोमवार को व्यापम घोटाले में व्यापम के जरिए भर्ती हुई महिला ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर अनामिका की संदिग्ध मौत हुई थी, जबकि रविवार को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण शर्मा की दिल्ली के रिसॉर्ट में मौत हो गई थी.

 

उमा भारती का बड़ा बयान

व्यापम घोटाले में लगातार हो रही मौतों के बाद केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम उमा भारती ने बड़ा बयान दिया है.  उमा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है कि उन्हें भी डर लग रहा है.

 

क्या है व्यापम घोटाला?

उच्च शिक्षा मंत्री के तहत काम करने वाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी व्यावसायिक पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाने और छात्रों के चयन का काम करता है. व्यापम घोटाला दो हिस्सों में बंटा हुआ है. पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई. वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई.

शिवराज की कुर्सी डोल रही है? 

व्यापम मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अधीन था-घोटाले के तार लक्ष्मीकांत शर्मा से जुड़ रहे थे. उन्हें भी गिरफ्तार किया जा चुका है. साथ ही घोटाले के कर्ताधर्ता उनके ओएसडी ओ पी शुक्ला, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा नितिन महिंद्रा पर शिकंजा कसा जा चुका है. इनकी ही मिलीभगत से भर्ती घोटाले का खेल चल रहा था.

 

आरोप है कि सिफारिश करने वालों में राज्यपाल रामनरेश यादव, उनके बेटे शैलेश यादव, ओएसडी धनराज यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती से लेकर संघ के सुरेश सोनी, केसी सुदर्शन और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं.

 

इस बीच घोटाले से जुडे आरोपियों की संदिग्ध मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया. एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी 24 मार्च को लखनऊ में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी.

 

मामले की जांच कर रही एसटीएफ की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई है. कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की जांच शुरू कराने का श्रेय खुद को देते हैं. जबकि कांग्रेस घोटाले का आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगा चुकी है.

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