DEPTH INFORMATION: बाबा रामदेव ने योग के साथ किराना के सामान का साम्राज्य कैसे बनाया?

By: | Last Updated: Friday, 9 October 2015 4:33 PM
Ramdev products to now sell at Big Bazaar

नई दिल्ली: क्या बिग बाजार अब बन जाएगा बिग बाबा बाजार. चौंकिए मत आज खबर ही कुछ ऐसी है. खबर ये है कि बाबा रामदेव के नाम वाले तमाम उत्पाद यानी आयुर्वेदिक दवाइयों से लेकर शैंपू साबुन हल्दी आटा तेल सब कुछ आपको बिग बाजार में भी मिलेगा. इसके लिए बाबा रामदेव और बिग बाजार के मालिक किशोर बियानी के बीच बाकायदा करार हो गया है.

 

आखिर बाबा रामदेव ने योग के साथ साथ किराना के सामान का साम्राज्य कैसे बनाया?

 

योग सिखाते सिखाते वक्त मिल जाए तो बाबा रामदेव भगवान की भक्ति भी सिखाते हैं. लेकिन आज बाबा रामदेव का जिक्र ना तो योग के लिए और ना ही भक्ति के रंग में रंगे उनके भगवा चोले वाले इस अवतार के लिए.

 

आज बाबा रामदेव को एक सुलझे हुए कारोबारी के अवतार में जानें. मामला योग का नहीं बल्कि एक सौदे का का है जिसका ऐलान करने के लिए दोनों शख्सियतें मीडिया के सामने आई हैं.

 

बाबा रामदेव और किशोर बियानी के बीच हुआ है एक बड़ा सौदा

बाबा रामदेव की देखरेख में चलने वाली कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और बिग बाजार को चलाने वाले फ्यूचर ग्रुप के बीच करार हुआ है. और इस करार से आपको अपने ही बिग बाजार में मिल जाएगा शुद्ध और सुरक्षित पतंजलि के उत्पादों का पूरा संसार.

 

करार ये हुआ है कि अब देश भर में 45 हजार से ज्यादा बिग बाजार स्टोर्स पर बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के प्रोडक्ट मिलेंगे. सिर्फ आयुर्वेदिक दवाइयां नहीं बल्कि शैंपू से लेकर घी तेल और जूस जैसा हर वो उत्पाद जो अब तक सिर्फ पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के अपने स्टोर्स में मिलता था. सौदा कितना बड़ा है इसका अंदाजा आपको इसी बात से चल जाएगा कि पतंजलि को बिग बाजार के 20 करोड़ से ज्यादा ग्राहक और बदले में बिग बाजार को 1000 करोड़ का नया कारोबार मिलेंगे.

 

किशोर बियानी जैसे सधे हुए कारोबारी ने रामदेव के साथ हाथ मिलाया है तो इसकी भी वजह है लेकिन इस वजह को समझाने के लिए आपको बिग बाजार को चलाने वाले किशोर बियानी की कारोबारी समझ का अंदाजा होना जरूरी है.

 

साल 2001 में तीन स्टोर्स के साथ बिग बाजार की शुरुआत करने वाले किशोर बियानी ने महज 15 साल में 245 शहरों में अपना कारोबार फैला लिया. इस वक्त 400 से ज्यादा बिग बाजार स्टोर्स कामयाबी के साथ चल रहे हैं. बिग बाजार को चलाने वाली कंपनी फ्यूचर रीटेल का टर्नओवर 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जा पहुंचा है. यही नहीं बिग बाजार ने भारती ग्रुप 126 इजी डे स्टोर्स भी खरीद लिए हैं और अब वो उसकी रीटेल चेन का हिस्सा हैं. कामयाबी ऐसी कि किशोर बियानी की कंपनी ने 30 करोड़ ग्राहकों का भरोसा जीत लिया है.

 

यानी बड़ी योजनाएं और बड़े सपनों को जमीन पर उतारने वाले किशोर बियानी कच्चे सौदे नहीं करते और यही वजह है कि अब सारी दुनिया कि जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर बाबा रामदेव के साथ कारोबारी सौदे के लिए किशोर बियानी ने हाथ बढ़ाए तो क्यों?

 

इसके लिए आपको बाबा रामदेव की कारोबारी दुनिया में चलना होगा. यहां तक कैसे पहुंचा बाबा रामदेव का कारोबार ये बताने से पहले आपको उस दौर में ले चलते हैं जहां बाबा रामदेव सिर्फ अपने योग शिविरों के लिए जाने जाते थे.

 

1990 के दशक में बाबा रामदेव ने योग की दुनिया में कदम रखा. लेकिन उनकी पहचान बननी शुरू हुई 2000 के पहले दशक में. टीवी चैनलों पर बाबा ने योग क्लास शुरू की और देखते ही देखते ही भारतीय जनमानस में योग की अलख जगा दी.

 

योग के साथ-साथ बाबा रामदेव ने आयुर्वेद का प्रचार शुरू किया. सिर्फ प्रचार ही शुरू नहीं किया बल्कि असली दवाई जनता तक पहुंचाने का दावा करते हुए ट्रस्ट भी बनाए. बाबा रामदेव का दिव्य योग ट्रस्ट 2003 में बना और फिर 2006 में बनाई गई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड. 

 

पतंजलि आयुर्वेद में बाबा रामदेव का शेयर नहीं है. जबकि बाबा रामदेव के सहयोगी आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण की इस कंपनी में 92 फीसदी की हिस्सेदारी है. जबकि बाकी 8 फीसदी शेयर स्कॉटलैंड में रहने वाले प्रवासी भारतीय सरवन और सुनीता पोद्दार के पास हैं.

 

3 साल 2006 में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर हुई थी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और अगले ही साल यानी साल 2007 इसे पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदल दिया गया. तब से अब तक बाबा रामदेव के ब्रैंड का इस्तेमाल करके ग्राहकों के दिलों में पैठ बनाने वाली इस कंपनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

 

योगगुरु बाबा रामदेव अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना स्टोर तक कई बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रहे हैं. क्योंकि बाबा रामदेव के उत्पाद का साम्राज्य काफी विशाल हो चुका है.

 

डिटर्जेंट से लेकर टूथ ब्रश तक, साबुन से लेकर सरसों के तेल तक और आटे से लेकर आंवले के मुरब्बे तक. शायद ही कुछ ऐसा हो जो बाबा रामेदव की पतंजलि आयुर्वेद कंपनी ना बनाती हो. रामदेव के कॉस्मेटिक से लेकर किराना स्टोर तक बढ़ते कदम के पीछे है उनके कारोबार की दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की.

 

कंपनी के सालाना टर्नओवर ने जो छलांग मारी है उसे समझने के लिए इन आंकड़ों पर नजर डालिए. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 में रामदेव के पतंजलि आर्युवेद कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 450 करोड़ था. 2013 में टर्नओवर दोगुने से थोड़ा कम 850 करोड़ पहुंचा. 2014 में सालाना टर्नओवर 1200 करोड़ पर पहुंच गया. और 2014-15 वित्तीय वर्ष में कंपनी का सालाना टर्नओवर 67 फीसदी की छलांग के साथ 2000 करोड़ पहुंच चुका है. इसके साथ ही दिव्य योग फार्मेसी से बनने वाली दवाओं की बिक्री भी करीब 400 करोड़ है. यानी करीब 2500 करोड़ का आंकड़ा छू चुकी है कंपनी

 

कारोबारी आंकड़े का मतलब भी समझा देते हैं. इसका सबसे बड़ा संकेत तो ये है कि बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद देश की सबसे बड़ी एफएमसीजी कंपनी बन गई है. एफएमसीजी का मतलब है – रोज मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सौंदर्य प्रसाधन, खाने-पीने की चीजें, सफाई में इस्तेमाल होने वाले साबुल शैंपू जैसे उत्पाद जिसे आसान शब्दो में आप किराना भी कह सकते हैं.

 

इसका असर ये हुआ है कि पिछले वित्तीय वर्ष यानी साल 2014-2015 के बीच योगगुरू बाबा रामदेव के नाम का इस्तेमाल करके पतंजलि ने 316 करोड़ का मुनाफा कमाया जबकि एफएमसीजी में ही काम करने वाली कंपनी इमामी ने कुल 486 करोड़ का मुनाफा कमाया. यानी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड अब बरसों से जमी जमाई कंपनियों को टक्कर दे रही है

 

पतंजलि आयुर्वेद ने सबसे पहले शुरुआत दवाइयों से की थी. पेट में तकलीफ से लेकर कील मुंहासों जैसी बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां बनाई गईं. लेकिन धीरे-धीरे पतंजलि आयुर्वेद ने खाने-पीने की चीजों से लेकर ब्यूटी प्रोडक्ट तक पैर पसार दिए.

 

वैसे बाबा रामदेव ने अपनी पहचान योगाचार्य और आयुर्वेदाचार्य के तौर पर बनाई है. बाबा रामदेव चर्चा में आए थे देश और दुनिया को योग का पाठ पढ़ाकर. लेकिन धीरे-धीरे बाबा रामदेव ने आयुर्वेद के उत्पादों का प्रचार किया और फिर स्वदेशी किराना भी बेचने लगे. आज बाबा रामेदव के ट्रस्टों के पास करीब 14000 करोड़ की संपत्ति है.

 

इसी ट्रस्ट के तहत आयुर्वेद से जुड़े प्रयोग किए जाते हैं और आयुर्वेदिक दवाएं बनाई जाती हैं. कितने प्रोडक्ट बेचते हैं रामदेव के ट्रस्ट ये गिनना बेहद मुश्किल है पर अगर साइट पर दी जानकारी पर गौर करें तो 15 तरह के केवट, 53 तरह की वटी 19 तरह के चूर्ण, 18 तरह के गुग्गल, 61 तरह के भस्म, 21 तरह के फूड सप्लीमेंट, 28 तरह के आयुर्वेदिक कॉस्मेटिक्स सिर्फ इतना ही मिला दें तो भी 215 तरह के आयुर्वेदिक उत्पाद हो जाते हैं.

 

जबकि इसमें किराना तो शामिल ही नही हैं. कम से कम 20 तरह के जूस पतंजलि योगपीठ बनाता और बेचता है. जबकि नमक मिर्च से लेकर आटे और तेल तक खानेपीने के बीस उत्पाद पतंजलि योगपीठ बनाता है. यानी करीब करीब 300 तरह के उत्पाद हैं जो बाबा रामदेव के ट्रस्ट तैयार करते हैं.

 

इन्हें तैयार करने के लिए कंपनियों का जाल खड़ा किया गया है. एक अनुमान के मुताबिक बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की देखरेख में चलने वाली कंपनियों की तादाद ही कम से कम चौंतीस है. यानी कुल मिलाकर पिछले एक दशक में बाबा रामदेव ने एक योग और आयुर्वेद से एक साम्राज्य खड़ा कर लिया है.

 

किराना में कदम रखने के बाद बाबा रामदेव गली-गली और घर घर में पहुंच चुके हैं. पतंजलि आर्युवेद 45 तरह के कॉस्मेटिक उत्पाद बनाती है जिसमें सिर्फ 13 तरह के बॉडी क्लींजर शामिल हैं. शैंपू, साबुन, लिप बाम, स्किन क्रीम… दांत से लेकर बाल तक.. शरीर के हर हिस्से के लिए प्रोडक्ट मौजूद हैं.

 

अब किराना के सामान पर भी नजर डाल लीजिए

30 अलग-अलग तरह का खाद्य सामान रामदेव की कंपनी तैयार करती है जिसमें सरसों  तेल, आटा, घी, बिस्किट, मसाले, तेल, चीनी, जूस शहद और बहुत कुछ मौजूद है.

 

साल दर साल पतंजलि आयुर्वेद का बढ़ता टर्नओवर बाजार में दूसरी कंपनियों को तगड़ा मुकाबला देने के लिए तैयार हो चुका है. दरअसल कारोबार बढ़ने के पीछे एक वजह ये भी है कि दूसरी कंपनियों की तुलना में रामदेव के प्रोडक्ट सस्ते होते हैं. वो इसलिए क्योंकि तमाम कंपनियों की तरह पतंजलि आयुर्वेद अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन पर बहुत कम खर्च करता है जबकि इस तरह के उत्पाद बनाने वाली तमाम कंपनियां विज्ञापन पर कमाई का करीब 20 से 30 फीसदी खर्च करती हैं.

 

साल 2007 से पतंजलि आयुर्वेद के प्रोडक्ट ने बाजार में दस्तक देने की शुरू की थी लेकिन अब रामदेव की कंपनी का ये बढ़ता कारोबार बाजार में हलचल मचा रहा है पतंजलि आयुर्वेद ने तमाम बड़े शहरों में फ्रेंचाइजी के जरिए अपने प्रोडक्ट बेचना शुरू किया था. दवाइयों से शुरु हुआ ये सिलसिला अब कॉस्मेटिक से लेकर किराना तक पहुंच चुका है. और यही वजह है कि साल 2012 में करीब 150 से 200 के बीच रहने वाली पतंजलि आउटलेट की संख्या बढ़कर 4000 हो चुकी है.

 

इतना ही नहीं पतंजलि आर्युवेद के तमाम प्रोडक्ट पतंजलि आयुर्वेद की ऑफिशियल वेबसाइट पतंजलिआयुर्वेद डॉट नेट, और अमेजॉन डॉट कॉम पर ऑनलाइन भी बेचे जा रहे हैं. ये प्रोडक्ट अब रिलायंस के रिटेल स्टोर में बिकने लगे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक देश भर के 400 रिलायंस स्टोर्स में पतंजलि के प्रोडक्ट बिक रहे हैं. पतंजलि के उत्पादों को 2015 के आखिर तक 1000 रिलायंस स्टोर्स तक पहुंचाने की योजना है. यही नहीं इसी महीने यानी 15 अक्टूबर को बाबा रामदेव पतंजलि नूडल्स लेकर भी आ रहे हैं. नेस्ले की मैगी के विवादों में फंसने के बाद बाबा रामदेव की नजर मैगी के बाजार पर है. अनुमान है कि 3800 करोड़ रुपये के इस बाजार में भी पतंजलि पैर जमा लेगी.

 

तमाम तरह के प्रोडक्ट तैयार करने के लिए रामदेव ने कंपनियों का जाल खड़ा किया . एक अनुमान के मुताबिक बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की देखरेख में चलने वाली कंपनियों की तादाद ही कम से कम 34 हैं. यानी कुल मिलाकर पिछले एक दशक में बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद से एक साम्राज्य खड़ा कर लिया है. और अब इस साम्राज्य की एक झलक आपको बिग बाजार में भी देखने को मिलेगी. 

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