बीजेपी के नए प्रतीक पुरुष दिनकर

By: | Last Updated: Friday, 22 May 2015 5:34 PM
Ramdhari Singh Dinkar

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में जातिवादी राजनीति पर हमला बोला. मौका था हिंदी के यशश्वी कवि रामधारी सिंह दिनकर की दो कालजयी पुस्तकों की स्वर्ण जयंति के कार्यक्रम का.

 

दिल्ली के विज्ञान भवन में दिनकर के व्यक्तित्व और उनकी दोनों कालजयी रचनाओं ‘संस्कृति के चार अध्याय’ और ‘ परशुराम की प्रतीक्षा’ पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने दिनकर की 1961 की एक चिट्ठी का हवाला दिया जिसे दिनकर ने एक ऐसे व्यक्ति को लिखी थी जो उनसे जाति की समानता के आधार पर जुड़ना चाहता था.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने ये चिट्ठी पढ़ी- ” बिहार को सुधारने का सबसे अच्छा रास्ता ये है की लोग जातियों को भूल कर गुणवान के आदर में एक हों. याद रखिये कि एक या दो जातियों के समर्थन से राज नहीं चलता. वो बहुतों के समर्थन से चलता है. यदि जातिवाद से हम ऊपर नहीं उठे तो बिहार का सार्वजनिक जीवन गल जाएगा.”

 

साफ़ है कि ये हमला बिहार में दो-दो, चार-चार जातियों की राजनीति करने वाली और अब जनता परिवार के रूप में एकजुट हो रही पार्टियों पर था. बिहार में चुनाव सितम्बर-अक्टूबर में होने तय हैं. देश में इस वक्त सबसे बड़ा राजनैतिक सवाल यही है कि बिहार में किसकी बनेगी सरकार.

 

क्या बिहार में चुनावों का रंग और मूड पारंपरिक होगा ? यानि क्या हर बार की तरह इस बार भी नेता जातिवाद को आधार बनाके चुनाव लड़ेंगे और जनता भी जाति के आधार पर बंट कर वोट करेगी ?

 

एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए बिहार बीजेपी के दिग्गज नेताओं ने भी ये माना कि प्रधानमंत्री के इस भाषण से बिहार के आगामी चुनाव में एक सन्देश जरूर जाएगा.

 

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तो दिनकर के विपुल साहित्य से ऐसी पंक्तियाँ चुन कर सुना दीं जिनमे ‘कमल’ शब्द का प्रयोग हुआ है – “एक हाथ में कमल लिए एक हाथ में धर्म दीप्त विज्ञान लेकर उठने वाला है इस धरती पर कोई इंसान”

 

बिहार बीजेपी के कद्दावर नेता सुशील मोदी ने प्रधानमंत्री के भाषण के बाबत मेरे एक प्रश्न के जवाब में कहा- “लोक सभा में बिहार कि जनता ने जातिवाद से ऊपर उठ के विकास के मुद्दे पे वोट किया था. विकास के लिए बिहार को जातिवाद से बाहर आना ही होगा”

 

ध्यान रहे कि ये कार्यक्रम किसी साहित्यिक संस्था ने नहीं किया था. बल्कि बिहार बीजेपी के पुराने दिग्गज सी.पी. ठाकुर ही इसके सूत्रधार और आयोजन समिति के अध्यक्ष थे. पहले इस कार्यक्रम को साहित्य अकादमी से करवाये जानी की कोशिश की गई.

 

जब साहित्य अकादेमी ने इसमें असमर्थता दिखा दी तब ये कार्यक्रम बिना किसी संस्था के ही एक आयोजन समिति बना कर किया गया.दिनकर को अपने पाले में करने में एक सरलता ये है कि वो कभी किसी दल से नहीं जुड़े.

 

दिनकर को अपना आदर्श मानने वाले 90 बरस के कवि शारदा सैदपुरी बताते हैं कि दिनकर नेहरू के करीब थे लेकिन इमरजेंसी के दौरान अपनी कविताओं के मार्फ़त इंदिरा के खिलाफ जेपी के साथ थे.

 

ये अनायास नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी ने दिनकर को ऋषि की संज्ञा तक दे डाली. बीजेपी ये जानती है कि बिहार में जीत हासिल करने के लिए वो जातिवाद का सहारा नहीं ले सकती क्योंकि वहां इसके बेहतर खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं.

 

यही कारण है कि बीजेपी ने बिहार चुनाव के लिए अपना प्रतीक पुरुष राम धारी सिंह दिनकर को बनाया है बिहार के वोटरों को दिनकर के ‘जातिविहीन बिहार’ का सपना दिखा कर ही बीजेपी इस लड़ाई को नया मोड़ दे सकती है.

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Web Title: Ramdhari Singh Dinkar
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