रामपुर में पाकिस्तानी महिला के सरकारी टीचर बनने पर मचा बवाल

By: | Last Updated: Saturday, 6 June 2015 3:17 PM
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक पाकिस्तानी महिला को सरकारी टीचर बना दिया गया और पिछले पच्चीस साल से वो एक प्राइमरी स्कूल में बच्चों को पढ़ा रही है लेकिन अब जाकर यह मामला प्रकाश में आया है.

 

मामला प्रकाश में आने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव ने रामपुर के डीएम से जवाब तलब कर लिया है कि आखिर कैसे एक पाकिस्तानी नागरिकता वाली महिला को सरकारी नौकरी दे दी गयी और क्यूँ वो भारत में इतने लम्बे समय से रह रही है. मामला कुछ इस तरह है कि रामपुर के गंज थाना क्षेत्र की रहने वाली माहिर अख्तर उर्फ़ फरजाना बी का 1979 में पाकिस्तान के करांची शहर में शिगत अली से निकाह हुआ था.

 

शादी के बाद पाकिस्तान में फ़रज़ाना बी को वहां की नागरिकता भी मिल गयी थी और वो पाकिस्तान में अपने पति के साथ रहती थी जहाँ उसके दो बेटियां भी पैदा हुई.  लेकिन दो साल बाद उसके पति ने उसे तलाक दे दिया और सन 1982 में वो अपनी दोनों बेटियों के साथ विजा लेकर भारत आ गयी और रामपुर में अपने मयके में रहने लगी. 

 

वीजा की अवधि समाप्त होने पर फ़रज़ाना बी पर गंज थाने में एलआईयू की तरफ से मुकदमा लिखाया गया और 1984 में रामपुर की सीजेएम कोर्ट ने केस चलने तक हाज़िर रहने का आदेश दिया. लेकिन फ़रज़ाना के मामले में चौकाने वाली बात तब हुई जब  उन्होंने अपने पुराने दस्तावेजों के आधार पर महिरा अख्तर  के नाम से रामपुर के सैदनगर ब्लॉक के कुम्हारिया के सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी पा ली थी.

 

सैदनगर ब्लॉक के खमरिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में महिरा अख्तर उर्फ़ फरजाना बी को 1990 /92 में बतौर अध्यापक नियुक्ति मिली थी. दस्तावेजों के अनुसार तत्कालीन एडीएम ने नौकरी के समय माहिरा उर्फ़ फ़रज़ाना को किस आधार पर स्थाई निवास और चरित्र प्रमाणपत्र जारी किया था अब ये बात भी जाँच के दायरे में है.

 

मामला सामने आने पर रामपुर के जिलाधिकारी सी पी त्रिपाठी और रामपुर की एसपी साधना गोस्वामी को उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह ने तलब किया और मामले की जाँच कर रिपोर्ट मांगी है. डीएम के आदेश पर बीएसए ने महिला से तीन दिन के अंदर जवाब देने को कहा है.

 

पूरे प्रकरण पर स्थानीय अभिसूचना इकाई से भी नए सिरे से जाँच कर आख्या देने को कहा गया है. पाकिस्तानी महिला को सरकारी नौकरी देने वाले अधिकारीयों पर भी गाज गिर सकती है और फ़रज़ाना व उसकी बेटियों की मुश्किलें बढ़ सकती है. अब इस पूरे मामले में माहिर अख्तर उर्फ़ फरजाना बी या उनके परिवार का कोई भी सदस्य कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

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