मकान खरीदने वालों के आएंगे 'अच्छे दिन', रियल एस्टेट बिल पास

By: | Last Updated: Wednesday, 16 March 2016 8:32 AM
Real Estate Bill passed in both Houses of Parliament

नई दिल्ली : देश में बिल्डरों पर नकेल कसने के लिए रियल एस्टेट अथॉरिटी बनाने का रास्ता साफ़ हो गया है. अब बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी. क्योंकि, संसद ने बिल्डरों पर लगाम कसने के लिए रियल एस्टेट बिल पास कर दिया है. इस बिल के पास होने के बाद उपभोक्ता की सहूलियतें ही सर्वोपरी होंगी.

सालों से अपने मकान का सपना संजोने वाले आम फ्लैट या घर के खरीददारों को बिल्डरों की ठगी से निजात मिल सकेगी. राज्यसभा के बाद रियल एस्टेट अथॉरिटी बिल को लोकसभा ने भी पास कर दिया है. अब बिल्डर ना तो खरीददारों को झूठे सपने दिखाने के लिए फ़र्ज़ी विज्ञापन निकाल सकेगा और ना ही फ्लैट या मकान की गुणवत्ता में कमी कर पायेगा.

कानून में सबसे अहम बात ये है कि जब तक अथॉरिटी से किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल जाती, बिल्डर विज्ञापन नहीं दे पाएंगे. पजेशन में यदि देर हुई तो बिल्डरों को उतना ही ब्याज देना होगा जितना वो लेट पेमेंट पर ग्राहकों से वसूलते आए हैं. पहले बिल्डरों की ओर से मामूली ब्याज दिया जाता था. साथ ही बिना रजिस्ट्री कोई प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं होगा.

भ्रामक विज्ञापन देने पर बिल्डर को सजा मिल सकती है. साथ ही फ्लैट या मकान का निर्माण तय समय के तहत ही पूरा करना पड़ेगा. बिल के मुताबिक़ एक साथ कई प्लैट खरीदने वाले को किसी भी प्रोजेक्ट में फेरबदल के लिए केवल एक वोट का अधिकार दिया होगा. अब 500 स्कायर मीटर एरिया या आठ फ्लैट वाले प्रोजेक्ट को भी रेग्युलेटरी अथॉरिटी के साथ रजिस्टर कराना होगा.

पहले 1000 स्कायर मीटर वाले प्रोजेक्ट के लिए ही नियम के दायरे में आते थे. एग्रीमेंट ऑफ सेल की जगह एग्रीमेंट फॉर सेल लिखा जाएगा. कॉरपेट एरिया में ग्राहक जितना जगह इस्तेमाल करता है उतने ही जगह का जिक्र होगा. बिल्डर से परेशान घर खरीदार अब केवल अथारिटी ही नहीं बल्कि इसके अलावा देश में मौजूद 644 कंज्यूनर अदालत का भी दरवाजा खटखटा सकेंगे.

साथ ही मौजूदा जिन प्रोजेक्टस नें फ्लैट की बुकिंग चल रही है वो भी इस कानून के जद में आएंगे. अब बिल्डर को किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमा पैसे का 70 फीसदी पैसा उसी प्रोजेक्ट में निवेश करने के लिए अलग रखना होगा. पहले ये 50 फीसदी करने का प्रस्ताव था. और दो तिहाई बॉयर की मंज़ूरी के बगैर कोई प्रोजेक्ट में बदलाव संभव नहीं होगा.

बिल्डर को फ्लैट्स बेचने के तीन महीने के भीतर अलाटीज लोगों का एसोसिएशन बनाना होगा. एप्पेलेट ट्रिब्यूनल का आदेश नहीं मानने पर प्रोमोटर के खिलाफ 10 फीसदी प्रोजेक्ट कॉस्ट का जुर्माना और 3 साल की सज़ा का प्रावधान होगा. जबकि, एजेंटो और घर खरीदार को एक साल की सजा का प्रावधान किया गया है.

एप्पेलेट ट्राईब्युनल को 90 की बजाये 60 दिनों में शिकायत का निपटारा करना होगा. रेग्युलेटरी अथॉरिटी को 60 दिनों में. पहले कोई समय सीमा तय नहीं की गई थी. हालांकि, बिल का विरोध किया समाजवादी पार्टी ने और दलील दी की ज़मीन राज्यों का विषय है और ये नए क़ानून से बने रेगुलेटरी अथॉरिटी राज्यों के अधिकार में दखल देगी.

इससे रेगुलेटरी अथॉरिटी और डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में टकराव होगा. हालांकि सरकार और कांग्रेस संसद जयराम रमेश इसे खारिज करते हुए कहा की अटॉर्नी जनरल की राय के मुताबिक़ ये बिल संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक़ है. कांग्रेस के समर्थन के वजह कि कुछ दिन पहले फ्लैट खरीददारों ने राहुल गांधी से मुलाक़ात की थी उसके बाद कांग्रेस ने भी इस बिल का समर्थन वादा किया था और आज इसे इसे निभाया भी.

हालांकि कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने बिल को तैयार करने में की गयी शुरुआत के लिए कांग्रेस को श्रेय देने की मांग की. गौरतलब है कि देश में 76000 से ज्यादा रजिस्टर्ड बिल्डर हैं और हर साल 10 लाख लोग मकान खरीदते हैं. हर साल प्रॉपर्टी में 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होता है और हर साल प्रॉपर्टी से जुड़ी 20000 शिकायतें आती हैं.

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