BLOG: क्यों केजरीवाल के लोकपाल को ‘धोखापाल’ या ‘जोकपाल’ कहा जा रहा है?

By: | Last Updated: Saturday, 28 November 2015 9:40 AM

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में यूं तो धोखेबाजों की कोई कमी नहीं रही है लेकिन जनता को धोखा देने वाले छलियों की सूची में अरविंद केजरीवाल का नाम सबसे ऊपर रहेगा.

 

जिस शख्स का राजनीतिक जन्म लोकपाल आंदोलन की कोख से हुआ उस शख्स ने अपनी राजनीतिक जननी को ही झूठ और ठगी के पुलिंदों से किस तरह ढक दिया है उसे आप दिल्ली सरकार के प्रस्तावित कथित जनलोकपाल बिल में देख-पढ़ सकते हैं.

 

अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन के मैदान से डंका पीट-पीट कर एलान किया था कि उनका जनलोकपाल कितना ताकतवर और आजाद किस्म का होगा. केजरीवाल ने कहा था कि जनलोकपाल की नियुक्ति नेताओं की मर्जी से नहीं होगी. मतलब राजनीतिज्ञों से लोकपाल को मुक्त रखा जाएगा. पर अब देखिये केजरीवाल के नए बिल में क्या है.

 

दिल्ली सरकार के प्रस्तावित बिल में लोकपाल को नियुक्त करने वाली समिति में 4 में से 3 लोग राजनीतिक पार्टी के होंगे. मतलब लोकपाल की होगी राजनीतिक बहाली. यानी अपने पॉकेट में रखने वाले लोकपाल की नियुक्ति की कोशिश.

 

केजरीवाल ने पहले कहा था कि जनलोकपाल को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट हटा सकता है. अब केजरीवाल कह रहे हैं कि जनलोकपाल को विधानसभा दो तिहाई बहुमत से हटा सकती है. यानी अगर केजरीवाल जी जनलोकपाल से मनमाफिक काम नहीं करवा पाए तो उसे आसानी से हटा सकते हैं.

 

राजा हरिश्चंद्र केजरीवाल ने पहले कहा था कि जनलोकपाल के पास स्वतंत्र जांच एजेंसी होगी. अब सरकार चला रहे केजरीवाल कह रहे हैं जनलोकपाल जांच एजेंसियां, ट्रिब्यूनल पर आश्रित होगा और इन पर जनलोकपाल का नियंत्रण नहीं होगा.

 

ईमानदारी का सर्टिफिकेट बांटने वाले केजरीवाल पहले कहा कहते थे कि गलत शिकायत करने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी अब सरकार चला रहे ‘भ्रष्ट्राचारी मंत्रियों और विधायकों’ से घिरे केजरीवाल कह रहे हैं शिकायत झूठी निकली तो शिकायतकर्ता पर ही जुर्माना लगाया जाएगा. मतलब ये हुआ कि अगर आपने किसी भ्रष्टाचारी अधिकारी के खिलाफ लोकपाल से शिकायत की और आप उसे साबित नहीं कर सके तो आप ही को जलील होना पड़ेगा.

 

सबसे दिलचस्प बात ये है कि नए बिल में केंद्र सरकार को भी घसीटने की कोशिश की गई है. केजरीवाल का मकसद साफ है. वो हर बात पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे. आरोप लगाएंगे और रोना रोएंगे ताकि 2019 तक खुद को केंद्र सरकार के मुखिया के समानांतर स्थापित किया जा सके.

 

जब मनमोहन सरकार ने लोकपाल विधेयक लाया था तो इसी केजरीवाल ने उसे जोकपाल कहा था आज केजरीवाल खुद जोकपालों के देवता बन गए हैं.

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Web Title: Reasons why Arvind Kejriwal’s Lokpal is ‘Jokepal’
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