आर्थिक सुधारों की प्र​क्रिया अधूरी, नई सोच की जरूरत: मनमोहन सिंह

आर्थिक सुधारों की प्र​क्रिया अधूरी, नई सोच की जरूरत: मनमोहन सिंह

उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वह जुड़े थे वह सामाजिक व आर्थिक तौर पर वंचित लोगों के लिए नये अवसर प्रदान करने पर केंद्रित थी. उन्होंने कहा-यह प्रक्रिया अभी अधूरी है और हमें नई सोच की जरूरत है.

By: | Updated: 05 Oct 2017 11:17 AM

बेंगलुरू: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को बेंगलुरू में एक कार्यक्रम में कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वे जुड़े हुए थे वह अब भी अधूरी है. उन्होंने कहा कि देश की सामाजिक व आर्थिक नीति के नये डिजाइन के लिए नई सोच की जरूरत है.


उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधारों की जिस प्रक्रिया से वह जुड़े थे वह सामाजिक व आर्थिक तौर पर वंचित लोगों के लिए नये अवसर प्रदान करने पर केंद्रित थी. उन्होंने कहा-यह प्रक्रिया अभी अधूरी है और हमें नई सोच की जरूरत है.


सिंह को भारत में आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया का प्रणेता माना जाता है जिसकी शुरुआती 1991 में हुई थी. उन्होंने कहा कि नीति उंची आर्थिक वृद्धि दर तथा आर्थिक असमानता पर काबू पाने के दोहरे लक्ष्यों का समुचित मिश्रण होना चाहिए. डॉ. मनमोहन सिंह यहां डॉ बी आर अंबेडकर स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

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