देश में हिंदुओं के बढ़ने की रफ्तार घटी, 96.63 करोड़ हुए हिंदू

By: | Last Updated: Tuesday, 25 August 2015 12:25 PM

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी सरकार ने धर्म के आधार पर जनगणना रिपोर्ट जारी कर दी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2001 -2011 के बीच बीते दस साल में कुल आबादी में मुसलमानों की संख्या 0.8 फीसदी बढ़ी है, जबकि हिंदुओं की संख्या 0.7 फीसदी घटी है. रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर के आंकड़ों के मुताबिक मुसलमामों की आबादी 24 फीसदी की दर से बढ रही है तो राष्ट्रीय औसत 18 फीसदी है.

इसी तरह सिखों की आबादी में 0.2 फीसदी, बौद्धों की आबादी में 0.1 फीसदी की गिरावट देखी गई है. हालांकि जैन और ईसाई की आबादी में कोई खास बदलाव नहीं आए हैं.

 

2011 के जनगणना के मुताबिक अब देश में 96 करोड़ तिरसठ लाख हिंदू हैं जबकि मुस्लिमों की संख्या सत्रह करोड़ बाइस लाख है. देश में दो करोड़ अठहतर लाख ईसाई और दो करोड़ आठ लाख सिख हैं.

 

किस रफ्तार से बढ़ रही है आबादी

 

इस सरकारी आंकडे की सबसे अहम बात ये है कि 2001 से 2011 के बीच सभी धर्मों की आबादी बढ़ने की रफ्तार घटी है. हालांकि, दस साल में सबसे ज्यादा आबादी में बढ़ोतरी का दर मुसलमान में देखा गया. मुसलमानों की आबादी 24.6 फीसदी से बढ़ी है जोकि राष्ट्रीय औसत से 6.9 फीसदी ज्यादा है. जबकि दूसरे सभी धार्मिक इकाइयों की आबादी राष्ट्रीय औसत से कम है. 2001 से 2011 के बीच हिंदुओं की आबादी के बढ़ने की दर 16.8 रही, ईसाई की आबादी बढ़ने की रफ्तार 15.5 रही. इस तरह सिख की आबादी के बढ़ने की दर 8.4 फीसदी रही. बौद्ध धर्म की आबादी के बढ़ने की दर 6.1 रही. जैन की आबादी बढ़ने की दर सबसे कम 5.4 रही.

 

आपको बता दें कि साल 1991 और 2001 के दौरान मुसलमानों की आबादी के बढ़ने की रफ्तार 29 फीसदी थी जो गिरकर 24.6 फीसदी हो गई है. हालांकि, ये दर अब भी राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है.

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Web Title: religious population of india
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