Full Information: क्या है छत्तीसगढ़ के चावल घोटाले का पूरा सच?

By: | Last Updated: Monday, 20 July 2015 5:20 PM

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिस चावल घोटाले में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और उनके परिवार पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हम आपको बताते हैं आखिर क्या है यह छत्तीसगढ़ का चावल घोटाला. कौन-कौन लोग इस चावल घोटाले में शामिल हैं और कैसे गरीबों को देने वाले 1 रुपए किलो चावल में बड़े पैमाने पर सालों से हेराफेरी हो रही थी.

 

आज उस सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस सिस्टम) की सच्चाई भी आपको बताएंगे जिसको लेकर राज्य सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई थी. छत्तीसगढ़ के इस घोटाले में चपरासी से लेकर मुख्यमंत्री और उनके परिवार तक का नाम सामने आ रहा है.  क्या है उस कथित डायरी का राज जिसके सामने आने के बाद बीजेपी के एक और मुख्यमंत्री सवालों के घेरे में आ गए हैं.  और ये भी बताएँगे की क्यों उठ रहे हैं इस घोटाले को उजागर करने वाली एजेंसी एंटी करप्सन के ऊपर सवाल.

 

घोटाला समझाने ने से पहले आपको बता दें की चावल कैसे बनता है और कैसे जनता तक पहुँचता है. सरकार द्वारा घोषित मिनिमम सपोर्ट प्राइस पर सरकारी एजेंसी मार्केटिंग फेडरेशन किसानों से धान खरीदती है.  ये धान फिर मिलर मार्केटिंग फेडरेशन से लेता है प्रोसेस करने के लिए यानि चावल बनाने के लिए. 

 

इसके काम के लिए मिलर को सरकार से 20 रुपये प्रति क्विंटल मिलता है. मिलर चावल बनाकर नान या एफसी आय को देता है.

क्या है चावल घोटाले का ‘सीएम मैडम’ कनेक्शन? 

नान से ये चावल पीडीएस सिस्टम यानि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन को देता है जिसको पीडीएस सिस्टम के जरिये लोगों तक पहुँचाया जाता है. अच्छे दर्जे का चावल एफ सी आय को दिया जाता है. और इसी पुरे सिस्टम में होता है करोड़ों का भ्रष्टाचार.

 

इस घोटाले के चार मुख्य सूत्रधार है और चार स्तरों में ही होता है भ्रष्टाचार-

 

1. मार्क फेड यानि मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया

2. नान यानि नागरिक आपूर्ति निगम

3. पीडीएस चावल का वितरण करनेवाले दुकानदार या ठेकेदार

4. राइस मिलर

 

मार्केटिंग फेडरेशन इंडिया में भ्रष्टाचार

 

किसान अपने धान को लेकर मार्केटिंग फेडरेशन के पास आता है. मंडी मे अपना धान देकर सरकार से पैसे  लेता है.

 

मार्क फेड के अधिकारी इस धान में घोटाला करते है. किसान धान मार्क फेड को देता है उसमें मॉइस्चर  होता है. 100 किलो धान में करीब 1.5 से 2 किलो मॉइस्चर होता है.  मार्क फेड इस मॉइस्चर को 2 किलो से 4 किलो दिखाकर 2 किलो धान की चोरी कर मुनाफा कमाता है.

 

मंडी से स्टॉकयार्ड तक ले जाने में भी भ्रष्टाचार होता है.  मार्क फेड के अधिकारी ट्रांसपोर्टेशन में हेराफेरी करते हैं, दूरी ज़्यादा बताकर कमाई की जाती है. 

ट्रांसपोर्टेशन के दौरान धान की बोरियां गिर गई ऐसा बताकर क्विंटल के क्विंटल गायब कर देते है.

 

फिर स्टॉकयार्ड में चूहों ने बोरियां कुतरने का बहाना बनाकर 100 बोरियों में से 4 बोरियां गप कर जाते है.

 

राइस मिलर को ज़्यादा धान देने के लिए घुस की बड़ी रकम ली जाती है.  एक क्विंटल धान पर मिलर को 20 से 25 रुपये क्विंटल घूस देनी पड़ती है. इन सब रास्तों से कमाए गए रकम का एक बड़ा हिस्सा सरकार को मार्क फेड की तरफ से जाता है.

 

नागरिक आपूर्ति निगम (नान का भ्रष्टाचार)

 

नान को मोटी रकम मिलती है राइस मिलर से. राइस मिलर को चावल प्रोसेस करके नान के गोडाउन में जमा करना होता है. नान के गोडाउन से ये चावल राशन के दुकानों या पीडीएस के ठेकेदारों तक और वहां से लोगों तक पहुँचता है.

 

नान के अधिकारी, राइस मिलर और पीडीएस के दुकानदार और ठकेदार आपसी सहमति से एक रास्ता निकालते है.

 

राइस मिलर चावल को नान के गोडाउन में पहुँचाने के बजाय सीधा दुकानों तक पहुंचाता है जिससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बचता है और ट्रांसपोर्टेशन के पैसे नान अधिकारी सरकार से लेकर अपनी जेब में डाल लेते हैं.

 

वहीँ राइस मिलर राशन के दुकानदारों के साथ मिलकर कालाबाज़ारी करते है. अगर एक दुकान में 100 किलो चावल पहुँचाना है तो राइस मिलेर सिर्फ 50 किलो पहुंचता है. वहीँ दुकानदार 50 किलो लोगों में बांटता है और फ़र्ज़ी राशन कार्ड का इस्तेमाल कर अन्य 50 किलो की फ़र्ज़ी एंट्री करता है. यानी जनता में बांटे जाते है सिर्फ 50 किलो लेकिन सरकार को दिखाया जाता है 100 किलो वितरण का ब्यौरा.

 

राइस मिलर इस 50 किलो के ऐवज में दुकानदार, ठेकेदार को रकम देता है और चावल अपने पास ही रख लेता है. नान के अधिकारी पीडीएस के इन दुकानदारों से भी पैसे लेते है. इसके अलावा नान के अधिकारी ट्रांसपोर्टेशन के दौरान चावल की बोरियां गिर गई ऐसा बताकर क्विंटल के क्विंटल गायब कर देते है.

 

इसके अलावा प्रबंध संचालक के जरिये ट्रांस्पोर्टस को परिवहन का  ठेका दिया जाता था और गोदामों से अनावस्यक चावल का मूमेंट करवाकर गोदामों में जगह बनाकर क्षेत्र विशेष के राइस मिलर को फायदा पहुँचाया जाता था.  और इसके एवज  में  राइस मिलर से  भारी मात्रा में वसूली की जाती थी.

 

एसीबी चार्जशीट के मुताबिक नान के अधिकारी राइस मिलर से 4 रु प्रति क्विंटल से रकम वसूलते है.  जबकि राशन के दुकानदार ठेकेदारों से 2 रुपये प्रति क्विंटल. इन सब रास्तों से कमाए गयी रकम का एक बड़ा हिस्सा सरकार को नान की तरफ से जाता है.

 

गोडाउन में कमीशन

 

सरकार के पास धान और चावल रखने के लिए पर्याप्त गोडाउन नहीं होते है. ऐसे में मार्क फेड और नान धान और चावल को रखने के लिए गोडाउन किराये पर लेते है. हर गोडाउन मालिक से नान और मार्क फेड के अधिकारी कॉन्ट्रैक्ट का 7 % कमीशन लेते है

 

कीटनाशक और बोरियों में भी मुनाफाखोरी

 

गोडाउन और स्टॉकयार्ड में रखे चावल और धान की हिफाजत के लिए कीटनाशक बोरियों का इस्तेमाल होता है.  जिन ठेकेदारों से कीटनाशक और बोरियां खरीदी उनके पास से भी नान और मार्क फेड के अधिकारी कमीशन लेते है. 

 

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें-

 

WATCH: क्या है छत्तीसगढ़ के चावल घोटाले का ‘CM मैडम’ कनेक्शन 

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Web Title: Rice Scam_
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