बिहार के अररिया से RJD सांसद और पूर्व गृह राज्य मंत्री तस्लीमुद्दीन का निधन

बिहार के अररिया से RJD सांसद और पूर्व गृह राज्य मंत्री तस्लीमुद्दीन का निधन

तस्लीमुद्दीन की सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सरपंच से की और गृह राज्य मंत्री जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई. 1959 में सरपंच बने, 1964 में मुखिया बने. 1969-89, 1995-96 and 2002-2004 के बीच आच बार विधायक चुने गए.

By: | Updated: 17 Sep 2017 06:43 PM

चेन्नई/पटना: बिहार के अररिया से लोकसभा सांसद और आरजेडी के सीनियर नेता और एच डी देवगौड़ा सरकार में गृह राज्य मंत्री रहे मोहम्मद तस्लीमुद्दीन का चेन्नई में निधन हो गया है. तस्लीमुद्दीन 74 साल के थे. उनके परिजनों में तीन बेटे और दो बेटियां हैं.


तस्लीमुद्दीन चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती थे, जहां इलाज के दौरान आज उनका इंतेकाल हो गया.


5 बार के सांसद और आठ बार के विधायक तस्लीमुद्दीन बिहार में राबड़ी देवी की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं. उनके बेटे सरफराज अहमद फिलहाल जेडीयू से विधायक हैं.


बिहार के सीमांचल इलाके में तस्लीमुद्दीन की खासी पकड़ थी और उनके समर्थक और भक्त उन्हें सीमांचल का गांधी भी पुकारते थे. आपको बता दें कि बिहार में सीमांचल बंगाल से सटा हुआ है और वो इलाका है जहां भारी गरीबी है, हर साल बाढ़ से जिंदगी दूभर होती है और मुसलमानों की अच्छी खासी तादाद आबाद है.


कौन थे तस्लीमुद्दीन?


तस्लीमुद्दीन की सबसे बड़ी बात ये है कि उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सरपंच से की और गृह राज्य मंत्री जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी निभाई. 1959 में सरपंच बने, 1964 में मुखिया बने. 1969-89, 1995-96 and 2002-2004 के बीच आठ बार विधायक चुने गए.


1989 में पहली बार सांसद चुने गए. जुन-जुलाई 1996 में करीब एक महीने तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहे. 2000-2004 के बीच राबड़ी देवी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे.


तस्लीमुद्दीन ने तीन किताबें लिखी हैं. सीमांचल क्यों?, सीमांचल बुलेटिन और बिहार किशोर.


विवाद


तस्लीमुद्दीन के नाम कई विवाद हैं. सीमांचल में वो जितने मशहूर थे, उनके नाम बदनामी भी कम नहीं थी. लेकिन जनता उन्हें हमेशा वोट करती रही, चुनाव में उन्हें हमेशा जीत मिली. लेकिन एक विवाद 1996 में उनके बयान को लेकर हुआ, जिससे गृह राज्य मंत्री की कुर्सी एक महीने के भीतर ही चली गई.


दरअसल, एच डी देवगौड़ा सरकार में उन्हें गृह राज्य मंत्री बनाया गया, तब कैबिनेट स्तर पर कोई गृह मंत्री नहीं था. तस्लीमुद्दीन ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के हवाले से बड़ा बयान दिया. उनके उस बयान पर ऐसा बवाल मचा कि उनकी कुर्सी छिन गई और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

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