अपने अब तक के सबसे भारी रॉकेट का प्रक्षेपण करेगा भारत

By: | Last Updated: Saturday, 29 November 2014 4:28 PM
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श्रीहरिकोटा : अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारत 15 से 20 दिसंबर के बीच स्थानीय सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से एक ‘क्रू मॉड्यूल रिकवरी एक्सपेरिमेंट’ का परीक्षण करेगा और साथ ही वह अपने नवीनतम भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-मार्क 3) के परिचालन संबंधी प्रदर्शन का अध्ययन करेगा .

 

सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एम वाई एस प्रसाद ने यहां संवाददाताओं को बताया, ‘‘इसरो 15 दिसंबर से 20 दिसंबर के बीच कभी भी अपने सबसे भारी रॉकेट ‘जीएसएलवी-मार्क 3’ (एलवीएम 3 एक्स मिशन) का प्रक्षेपण करेगा . रॉकेट अपने पुन:प्रवेश क्षमता के परीक्षण के लिए एक क्रू मॉड्यूल भी अपने साथ ले जाएगा .’’

 

प्रक्षेपण का मकसद उन्नत रॉकेट की स्थिरता एवं इसकी वायुमंडलीय क्षमताओं की जांच करना है और इसे वायुमंडल में फिर से प्रवेश कराने को लेकर क्रू मॉड्यूल का अध्ययन करना है .

 

प्रसाद ने कहा कि रॉकेट पर जहां 140 करोड़ रूपए का खर्च आएगा, वहीं क्रू मॉड्यूल पर 15 करोड़ रूपए का खर्च आएगा .

 

उन्नत ‘जीएसएलवी मार्क-3’ के बारे में बताते हुए ‘जीएसएलवी मार्क-3’ के परियोजना निदेशक एस सोमनाथ ने कहा, ‘‘रॉकेट चार टन तक का पेलोड लेकर जा सकता है . यह भारत की ओर से प्रक्षेपित किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी रॉकेट होगा . इसका वजन 630 टन है . हम क्रायोजेनिक चरण का नहीं बल्कि सिर्फ पहले दो चरणों का परीक्षण करेंगे .’’

 

प्रसाद ने कहा, ‘‘क्रायोजेनिक इंजन के विकास का काम जारी है और इसमें दो और साल का वक्त लगेगा .’’ चूंकि भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर अब तक इंसान को भेजने की मंजूरी नहीं दी है, प्रसाद ने कहा कि क्रू मॉड्यूल किसी सजीव प्रणाली को लेकर अपने साथ नहीं जाएगा और इसका मकसद अध्ययन होगा .

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