सूचना देने से क्यों डरती हैं सरकारें?

By: | Last Updated: Tuesday, 2 June 2015 3:06 PM

नई दिल्ली: 10 महीने के लंबे इंतजार के बाद देश को मुख्य सूचना आयुक्त मिलेगा. मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति में देरी से प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय से जुड़ी जानकारी मिलने में कई साल लग जाएंगे .

 

केंद्र से भी बुरा हाल है राज्यों में सूचना के अधिकार के कानून पर अमल का . एक अध्ययन के मुताबिक मध्य प्रदेश में सूचना मिलने में 60 साल लग सकते हैं . पश्चिम बंगाल में आपको 17 साल लग जाएंगे . राजस्थान में लग सकते हैं जानकारी हासिल करने में सवा तीन साल. यूपी में भी आपको करना पड़ेगा आपको सवा साल इंतजार. सूचना देने से आखिर क्यों डरती हैं सरकारें?

स्पेशल रिपोर्ट: RTI की वेटिंग 

जानकारी में देरी करके क्या कुछ छिपाना चाहती हैं सरकारें? क्या सूचना छिपाकर भ्रष्टाचार को दबाना चाहती हैं सरकारें?

 

सूचना देने से क्यों डरती हैं सरकारें?

 

मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति का अब जाकर फैसला हुआ है. अगर हर रोज भी मुख्य सूचना आयुक्त मामले का निपटारा करें तो भी केंद्र सरकार से जुड़ी जानकारी हासिल करने में कई साल लग सकते हैं .

 

सूचना का अधिकार कानून की मदद से पिछले एक दशक के दौरान बड़े-बड़े घोटालों का पर्दाफाश हुआ. सरकारी बाबुओं को इस बात का डर सताता था कि अगर समय पर काम नहीं किया तो आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से उनकी असलियत का हो सकता है खुलासा.

 

हाल के वर्षों में जनता ने जिस अधिकार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया वो है सूचना का अधिकार. यही वजह है कि आरटीआई के तहत पिछले साल 40 लाख अर्जियां दाखिल की गईं. अमेरिका के पारदर्शिता संबंधी कानून के तहत अमेरिका में 35 लाख अर्जियां आई थी. मतलब सरकारी क्षेत्र में पारदर्शिता के लिहाज से भारत का दुनिया में पहला नंबर आता है. लेकिन लेटलतीफी के चलते आज जानकारी हासिल करना काफी मुश्किल हो गया है.

 

मोदी सरकार का पीएमओ कितना बड़ा है? पीएमओ में कितने लोग काम करते हैं, पीएमओ में किस किस कैडर के अधिकारी काम कर रहे हैं. कितने पीएमओ में कितने पैसों में कितने विभागों के कितने सलाहकार रखे गए हैं. इन सवालों का जवाब जानने के लिए अगर आप आरटीआई के तहत आज आवेदन देंगे तो आपको दो साल से भी ज्यादा का वक्त लग सकता है.

 

मोदी सरकार भले ही पारदर्शिता की दुहाई देती हो लेकिन दस महीनों से मुख्य सूचना आयुक्त नहीं होने की देरी की वजह से केंद्र से जुड़ी करीब 40 हजार अर्जियां धूल खा रही हैं. आपको पीएमओ , सीवीसी , सीएजी , सुप्रीम कोर्ट , चुनाव आयोग और मोदी सरकार के 34 मंत्रालयों और विभागों के बारे में जानकारी लेने के लिए कई साल तक इंतजार करना पड़ सकता है.

 

नियम है कि एक सूचना आयुक्त एक साल में कम से कम 3200 अर्जियों का निपटारा करेगा . अगर दस सूचना आयुकत होते एक साल में 32000 अर्जियां निपटाई जाती . लेकिन सिर्फ सात ही आयुक्त हैं जिन्होंने पिछले साल कुल मिलाकर सिर्फ 16000 मामले ही निपटाए . इस रफ्तार को देख कर ही कहा जा सकता है कि सूचना हासिल करने कई साल लग सकते हैं.

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