गाली पर माफी काफी है?

By: | Last Updated: Wednesday, 3 December 2014 1:25 AM
sadhvi niranjan jyoti

नई दिल्ली: पहले गाली, फिर माफी ! गली मोहल्ले के शोहदों के लिए नई बात नहीं हैं लेकिन आज यही कुछ नजारा दिखा लोकतंत्र के मंदिर संसद में. केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने पहले तो जिस शब्द का इस्तेमाल किया, उसका हम नाम भी ले सकते और बाद में जब हंगामा बढ़ा तो उन्होंने माफी मांग ली.

 

अब आप गौर से साध्वी के उन गंदे बोल पर गौर कीजिए और फिर तय कीजिये कि क्या ऐसी भाषा पर माफी काफी है ? साध्वी के  गंदे बोल और उस बोल पर बजी तालियां सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा है लेकिन साध्वी की मानें तो ये संत वचन हैं. पछतावा क्यों? बुरा क्यों लग रहा है ?

 

काश ! इस केंद्रीय मंत्री को पता होता कि उन्होंने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है उसका मतलब क्या होता है ? अब ये तो पता नहीं कि संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने उन्हें क्या समझाया कि उन्होंने संसद में माफी मांग ली. साध्वी निरंजन ज्योति का कहना है कि मेरा कोई इरादा नहीं था, दिल से माफी मांगती हूं.

 

साध्वी ने दिल से माफी तो मांग ली लेकिन चेहरे पर पछतावे का कोई लक्षण नहीं और माफी के ये बोल भी उन पन्नों से निकलें हैं जिन्हें शायद किसी ने लिखकर दिया होगा. यहां पर एक सवाल ये भी उठता है कि जिसके दिल में ही नफरत भरी हुई है, उसके माफी पर कैसे एतबार करें ?

 

पहरावे से साध्वी, पद से केंद्रीय मंत्री लेकिन इस तरह की संकीर्ण सोच ! ऐसे में ये सवाल उठना वाजिब है कि केंद्रीय मंत्री की ये माफी काफी है ?

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