सलमान रश्दी की लेखनी पर ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता भालचंद्र ने उठाए सवाल, तो रश्दी ने दी गालियां

By: | Last Updated: Sunday, 8 February 2015 8:41 AM

नई दिल्ली: मराठी के जाने माने साहित्यकार भालचंद्र नेमाड़े को 50वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिये जाने की घोषणा के एक दिन बाद ही कहा कि अंग्रेजी ‘किलर लैंग्वेज’ है और इसे भारत में शिक्षा के क्षेत्र से बैन कर देना चाहिए. इतना ही नहीं नेमाडे ने नोबेल प्राइज विजेती वीएस नायपॉल और सलमान रश्दी को ‘पश्चिम का दलाल’ कहकर उनकी आलोचना की.

 

नेमाने ने कहा, ‘जब नायपॉल भारत आए तो उन्होंने अंधेरे के एक क्षेत्र को देखा. उसके बाद उन्होंने एक घायल सभ्यता को देखा और इसके लिए इस्लामिक शासन को दोषी ठहराया ना कि ब्रिटीश को, क्योंकि वे खुद इंग्लैंड में रहते थे.’ इसके बाद सलमान रश्दी पर नेमाडे ने कहा कि ऐसे लेखकों की लिखी हुआ ज्यादा चीजें साहित्यिक मेरिट के लिए कोई बड़ी बात नहीं है.

 

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी इस खबर को पढ़कर सलमान रश्दी भड़क गए. सलमान रश्दी ने ट्वीट किया, ‘बूढ़ें तुनकमिजाज बास्टर्ड, बस अपना पुरस्कार लो और अच्छी तरह से धन्यवाद करो. लेकिन मुझे संदेह है कि तुमने जिस पर अटैक किया है उसे कभी पढा भी है.’

 

नेमाडे जो कि खुद अंग्रेजी शिक्षक रह चुके हैं उन्होंने मुंबई के दादर में आयोजित एक सभा में कहा, ‘प्राइमरी के साथ ही माध्यमिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए. अंग्रेजी भाषा में क्या महानता है? एक भी महाकाव्य अंग्रजी में नहीं है. महाभारत के भीतर ही 10 महाकाव्य हैं. अंग्रेजी को अनिवार्य मत करो, इसको भाषा से हटाने के अनिवार्य करो.’

 

इसके बाद नेमाडे ने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि हमें इंग्लिश नहीं सीखनी चाहिए. लेकिन हमें अंग्रेजी में शिक्षा नहीं लेनी चाहिए. आओ इससे हम  फुटवियर की तरह व्यवहार करें जिसे हम घर के बाहर रखते हैं और जब जरूरत होती है तो पहनते हैं.’

 

आपको बता दें कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले नेमाड़े मराठी के चौथे साहित्यकार हैं. इससे पहले वीएस खांडेकर, वीवीएस कुसुमाग्रज और विंदा करंदीकर इस सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं.

 

नेमाड़े देश का सर्वोच्च साहित्य सम्मान पाने वाले 55वें साहित्यकार हैं. पदमश्री से सम्मानित नेमाड़े को उपन्यासकार, कवि, आलोचक और शिक्षाविद के तौर पर जाना जाता है. वह 60के दशक के लघु पत्रिका आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर थे. मराठी साहित्य में उनकी प्रमुख कृतियों में 1968 में प्रकाशित उपन्यास ‘कोसला’ और 2010 में प्रकाशित वृहद उपन्यास ‘हिन्दू: जगण्याची समृद्ध अडगल’ शामिल हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Salman Rushdie_Bhalchandra Nemade_twitter
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017