सनातन संस्था को एटीएस ने बताया था आतंकी संगठन, बैन के सिफारिश के बाद भी चुप बैठी है केंद्र सरकार

By: | Last Updated: Wednesday, 30 September 2015 2:23 AM
Sanatan Sanstha

नई दिल्ली: विवादों में रहे सनातन संस्था पर एक और बड़ा खुलासा हुआ है. सनातन संस्था की जांच कर रहे महाराष्ट्र एटीएस ने सनातन संस्था को आतंकवादी बताया था. सनातन संस्था पर लगे आरोपों पर एबीपी न्यूज ने पड़ताल की है जिसमें पांच परिवारों ने संस्था पर सम्मोहन का आरोप लगाया है.

 

एटीएस ने जांच के बाद रिपोर्ट दी थी जिसमें कहा गया था कि सनातन संस्था आतंकवादी संस्था है और इसे बैन करना चाहिए. इस रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने 11 अप्रैल 2011 को केंद्र सरकार से सनातन संस्था को बैन करने की सिफारिश की थी. लेकिन केंद्र ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है. साइंटिस्ट रोकड़े ने सनातन संस्था के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाली थी उसके बाद इसकी जांच कोर्ट ने एटीएस को सौंपी थी.

 

ऑपरेशन सम्मोहनः कितनों के घर उजड़ गए ‘सनातन’ की आग में!

यूपी के भदोही के चौरसिया परिवार के घर की दोनों बेटियां प्रीति और प्रिया घर छोड़कर जा चुकी हैं. परिवार का आरोप है कि सनातन संस्था के लोग फुसलाकर बेटियों के साथ गहने और पैसे भी ले गए.

 

संस्था ने इस आरोप का खंडन किया है. अंधविश्वास फैलाना, चमत्कारिक दावे करना, सम्मोहन करना यहां तक कि हत्या जैसे आरोपों से घिर गई है सनातन संस्था. आखिर क्या है इस संस्था का सच और क्यों घिरी है यह विवादों में? यह जानने के लिए एबीपी न्यूज लाया है आपके सामने कुछ केस स्टडी. सनातन संस्था ने स्वीकार किया है कि प्रिया और प्रीति दोनों ही हमारे संस्थान के पास हैं.  बच्चियां घर नहीं जाना चाहती हैं.

 

क्या हुआ विजय रोकड़े के साथ?

नासिक के विजय रोकड़े सनातन संस्था की सच्चाई सामने लाने के लिए केस लड़ रहे हैं. विजय की याचिका के आधार पर ही राज्य सरकार ने केंद्र को सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं हुई. विजय रोकड़े का आरोप है कि संस्था ने उनकी पत्नी पर सम्मोहन का इस्तेमाल किया, जिसके बाद वो घर छोड़कर चली गई.

 

पेशे से रिसर्च साइंटिस्ट विजय रोकड़े सनातन संस्था के खिलाफ कानूनी जंग लड़ रहे हैं. रोकड़े मीडिया के सामने नहीं आना चाहते क्योंकि उन्हें जान के खतरे का डर है. विजय के मुताबिक सनातन संस्था के सम्मोहन ने उनका घर भी बर्बाद कर दिया. विजय रोकड़े की 2011 में एक इंजीनियर युवती से शादी हुई थी. शादी के कुछ ही समय बाद रोकड़े की पत्नी सनातन संस्था से जुड़ गई .

 

रोकड़े का आरोप है कि सनातन संस्था ने उनकी पत्नी का सम्मोहन के जरिये ब्रेन वॉश कर दिया. जिसके बाद पत्नी ने रोकड़े पर झूठे आरोप लगाकर शादी तोड़ दी और रोकड़े को छोड़कर चली गई.  विजय रोकड़े ने अपनी पत्नी से तलाक तो ले लिया लेकिन वो सनातन संस्था का सच दुनिया के सामने लाना चाहते थे. लिहाजा उन्होंने संस्था के खिलाफ कोर्ट में केस कर दिया .याचिका में रोकड़े ने आरोप लगाया कि संस्था के मुखिया डॉक्टर जयंत आठवले सम्मोहन की शक्ति का इस्तेमाल धर्म के नाम पर साधकों को बरगलाने के लिए करते हैं .

 

हालांकि सनातन संस्थान इस बात को मानती है कि वो सम्मोहन का इस्तेमाल करती है, लेकिन बरगलाने के लिए नहीं बल्कि आत्मशुद्धि के लिए करती है. रोकड़े की ही याचिका पर महाराष्ट्र गृह मंत्रालय और एटीएस की ओर से संस्था पर पेश एक रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने सनातन संस्था पर बैन लगाने का प्रस्वात केंद्र सरकार के पास भेजा था लेकिन अब तक उस प्रस्ताव पर कोई अमल नहीं हो पाया .

 

सवाल है कि अगर रोकड़े की याचिका पर राज्य सरकार ने सनातन संस्था पर रोक लगाने का प्रस्ताव भेजा था, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

 

 

अहमदनगर की स्वाति का केस

महाराष्ट्र के अहमदनगर के भानुदास सनातन संस्था पर आरोप लगाने वालों में एक हैं. भानुदास ने आरोप लगाया है कि सनातन संस्था के बहकावे में आकर उनकी बेटी डॉक्टर स्वाति 2004 में घर छोड़कर संस्था के आश्रम चली गई. बेटी को लाने की लाख कोशिश परिवार ने की, लेकिन स्वाति पर सम्मोहन का ऐसा इस्तेमाल किया गया है कि वो घर ही नहीं आना चाहती.

उन्हें अब भी उम्मीद है कि बेटी स्वाति वापस आ जाएगी. महाराष्ट्र के अहमदनगर के राहुरी जिले के भानुदास आडभाई भी सनातन संस्था के सम्मोहन का शिकार हैं. दो बेटे और एक बेटी समेत भानुदास के परिवार में कुल पांच लोग खुशी-खुशी रहते थे लेकिन अगस्त 2004 की एक रात अचानक बेटी स्वाति घर छोड़कर चली गई. भानुदास ने जब स्वाति को ढूंढना शुरू किया तो पता चला कि वो सनातन संस्था के मुंबई से सटे पनवेल आश्रम में हैं. घर वाले इस बात से हैरत में थे कि स्वाति बेहद पढ़ी लिखी थी और पेश से डॉक्टर थी. लेकिन अचानक से उसे ऐसा क्या हो गया? कि वो घर छोड़कर सनातन संस्था के आश्रम में चली गई

 

भानुदास का आरोप है कि सनातन संस्था ने स्वाति पर सम्मोहन का इस्तेमाल किया और सम्मोहन के जरिए उनकी बेटी को बहका दिया.भानुदास का आरोप है कि सनातन संस्था के साधकों को सम्मोहन विद्या के जरिए वहां बंधक बनाकर रखा गया है.

 

परिवार ने स्वाति को आश्रम से वापस लाने की कई कोशिशें की, लेकिन सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं. आरोप है कि एक बार जब वो स्वाति को लेने आश्रम पहुंचे तो आश्रम के लोगों ने उनके साथ मारपीट की.  भानुदास अपनी बेटी को आश्रम से छुड़ाने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं, अब भानुदास के पास सिर्फ कागजों और फाइलों का अंबार लग गया.

 

डॉ. दाभोलकर भानुदास की मदद भी कर रहे थे, लेकिन इसी बीच डॉ. दाभोलकर की हत्या कर दी गई. सनातन संस्था साधकों जबरदस्ती आश्रम में बंधकर बनाकर रखने के भानुदास के आरोपों को खारिज करती है. 60 साल की उम्र को पार कर चुके भानुदास और उनकी पत्नी ने अभी भी बेटी के वापस लौटने की उम्मीद छोड़ी नहीं है.

 

प्रीति प्रिया के साथ क्या हुआ?

यूपी के भदोही में रहने वाले चौरसिया परिवार के घर की दोनों बेटियां प्रीति और प्रिया घर छोड़कर जा चुकी हैं. परिवार का आरोप है कि सनातन संस्था के लोग बहला फुसलाकर घर की बेटियों के साथ-साथ गहने और पैसे भी ले गए. अपनी शादी के जश्न में दिल खोलकर  फरवरी 2014 में प्रीति की शादी  थी. मेंहदी की रस्म थी और यूपी के भदोही का रहने वाला चौरसिया परिवार बेटी की शादी की खुशी में डूबा हुआ था. 30 साल की प्रीति पूरी खुशी और मर्जी से शादी कर रही थी लेकिन ये खुशी महज कुछ दिनों की मेहमान थी. शादी के महज सात महीने बाद ही प्रीति और प्रिया दोनों बहनें घर छोड़कर चली गईं.

प्रीति की मां का आरोप है कि सनातन संस्था वाले लोग इनकी दोनों बेटियों सम्मोहन जाल में फंसाकर ले गए. परिवार का दावा है की उनकी दोनों बेटियां सनातन के आश्रम में है और उनकी कई कोशिशों के बावजूद वापस घर आने से मना कर रही है.          . 

 

लेकिन आखिर कैसे और क्यों ये दोनों पढ़ी लिखी लड़कियां अपने पति और परिवार को छोड़कर चली गईं. चौरसिया परिवार के मुताबिक पूरा परिवार साल 2008 में सनातन संस्था के संपर्क में आया. एमए की पढाई कर चुकी प्रीति और ग्रेजुएट प्रिया पूरी श्रद्धा से संस्था और हिंदू धर्म का प्रचार प्रसार करने का दावा करती थी. परिवार ने अपने घर से लोगों के बीच सनातन संस्था का प्रचार करना शुरू किया. 

 

परिवार के मुताबिक सब ठीक चलता रहा लेकिन इस बीच कुछ ऐसी चीज़ें होने लगी की दोनों बेटियां परिवार से खिंची खिंची सी रहने लगी.  दिन रात दोनों कॉपियों पर इस तरह से मंत्र लिखकर नामजप जैसी चीजों में मग्न रहने लगीं. परिवार ने सुबूत के तौर पर सनातन संस्था के जयंत आठवले की तस्वीर पेश की है. परिवार के मुताबिक दोनों लड़कियां घंटो इस तस्वीर को देखकर मंत्र जाप करके सम्मोहित होती रही. परिवार के मुताबिक जब मां को भनक लगी तो उन्होंने सनातन संस्था वालों को घर आने से मना कर दिया था. लेकिन बेटियां एक बार जब आश्रम गईं तो वापस आने का नाम नहीं लिया.

 

परिवार बेटियों को वापस घर लाने के लिए गोवा के आश्रम तक पहुंचा. परिवार ने राजनीतिक दबाव बनाया. मंत्री श्रीपद नाइक ने दखल दिया.

 

चौरसिया परिवार की दोनों बेटियां प्रीति और प्रिया अपने घर भदोही वापस लौट आईं थीं. करीब दो साल तक सब ठीक रहा. परिवार को भी लगने लगा की सब ठीक हो गया है, इसी बीच प्रीति के लिए रिश्ता आया और प्रीति की हामी के बाद ये शादी भी हुई. लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही प्रीति ने अपने पति पर आरोप लगाना शुरू कर दिए.

 

साल 2012 में एक दिन प्रीति और प्रिया की मां घर पर नहीं थीं लेकिन जब वापस लौटीं तो दोनों बेटियां जा चुकी थीं.

 

इसके बाद घरवालों ने सनातन के वाराणसी और पनवेल आश्रम में जाकर छानबीन भी की लेकिन आश्रम में बहनों से मिलने नहीं दिया गया. करीब दो महीनों बाद राजेश की मुंबई में अपने बहनों से मुलाकात हुई ज़रूर लेकिन प्रीति और प्रिया दोनों ने वापस आने से साफ इंकार किया.

 

प्रीति और प्रिया ने परिवार पर आरोप लगाये कि उन्हें घर में प्रताड़ित और परेशान किया जाता था. उनसे जबरदस्ती घर का काम करवाया जाता था. इसी सिलसिले में दोनों बहनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की है. जिसपर अभी सुनवाई चल रही है. परिवार का दावा है की ये सब सनातन संस्था वाले करा रहे है.

 

चौरसिया परिवार के घर पर काम करने वाली महिला का कहना है कि घरवाले बेटों से ज्यादा दोनों बेटियों को प्यार करते थे.

 

हमने इन आरोपों पर सनातन संस्था का पक्ष जाने की कोशिश की लेकिन वाराणसी के आश्रम से जुड़े लोगों ने हमसे टाल मटोल की. हम वाराणसी के आश्रम पर गए, लेकिन हमें आश्रम के अंदर  तक आने नहीं दिया गया.

इसके बाद एबीपी न्यूज़ सनातन के पनवेल आश्रम पहुंचा. जहां इन दोनों लड़कियों के होने की बात कही जा रही थी.  लेकिन हमें बताया गया कि प्रीति और प्रिया यहां नहीं हैं.

 

परिवार को डर है कि उनकी बेटियों से कुछ ऐसा काम न कराया जाये जिससे वो किसी मुसीबत में आ जाये. परिवार के मुताबिक सनातन संस्था अपने साधकों को अक्सर ये बात कहते है की धर्मयुद्ध छिड़ गया है. दुर्जनों का नाश करने और ईश्वरी राज्य की स्थापना करने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा. अपने इसी मकसद को पूरा करने के लिए सनातन साधकों का ब्रेन वॉश करते हैं.

 

प्रीति और प्रिया की मां बस यही गुहार लगा रही हैं कि उनकी बेटियां घर वापस आ जाएं.

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