सारथी देव का सेक्स स्कैंडल: लड़की ने कहा-मेरा वीडियो बना लिया है

By: | Last Updated: Saturday, 8 August 2015 4:01 PM
Sarathi Baba

नई दिल्ली: राधे मां के विवादों की कहानी अभी खत्म भी नहीं हुई है कि अब पुलिस के जाल में उलझ गए हैं खुद को नारायण का अवतार कहने वाले बाबा सारथी देव. ओडिशा क्राइम ब्रांच ने उन्हें मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा के सेक्स स्कैंडल के बाद गिरफ्तार कर लिया है और सारथी देव की आश्रम और संपत्ति सील कर दी गई है.

 

हिंदू धर्म को मानने वाले भले ही भगवान विष्णु को जगन्नाथ के नाम से पूजते हों लेकिन आज आप जिस शख्स की काली करतूत की कहानी पढ़ने जा रहे हैं उसने खुद को ही जगन्नाथ घोषित कर रखा है यानी भगवान विष्णु का अवतार.

 

सिर्फ भगवान जगन्नाथ होने का दावा ही नहीं करते सारथी देव बल्कि पिछले साल यानी साल 2014 में भगवान जगन्नाथ के पावन धाम पुरी में अपनी खुद की रथ यात्रा भी निकाल चुके हैं.

 

सारथी देव हिंदू देव जगन्नाथ से होड़ भी लगाते है. दावा ये है कि भगवान जगन्नाथ के बाद ये पुरी की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्रा थी और इसमें अपने नाम के आगे श्रीमद लगाने वाले सारथी देव करीब 8 लाख भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी थी.

 

भक्तों को लुभाने के तरीके भी नायाब हैं. उनका भी जिक्र करेंगे लेकिन आस्था का ये संसार सारथी देव के उड़िया प्रवचनों का दीवाना है. यही नहीं खुद को 23 साल पहले भगवान का अवतार घोषित करने वाले सारथी देव को संगीत का भी शौक है वो बाकायदा स्टूडियो जाकर भजनों की रिकॉर्डिंग भी करते हैं.

 

सारथी देव ने साल 2014 के जुलाई महीने के पहले हफ्ते में अपने भक्तों के लिए अपने नाम से एक मंदिर भी बनवाया है – इस का नाम है श्रीमद सारथि देव मंदिर जो सोने की तरह जगमगाता है.

 

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के बरीमुला इलाके में श्रीमद सारथि देव आश्रम में बने मंदिर के उद्घघाटन के ठीक एक साल बाद शुरु हो गया है सारथि देव का बुरा वक्त.

 

वक्त ने ऐसी करवट बदली है कि सारथी देव पहुंच गए हैं सलाखों के पीछे. ओडिशा की क्राइम ब्रांच ने 12 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद 8 अगस्त को उनकी गिरफ्तारी का ऐलान कर दिया.

 

सारथी देव की मुसीबतों की कहानी भले ही अब दुनिया के सामने आई है लेकिन ये वाकया उसी जुलाई महीने का है साल भर पहले जिस महीने में सारथी देव ने अपने मंदिर का उदघाटन किया था.

 

जगमगाते सिंहासन और माथे पर मुकुट सजाकर भक्तों के सामने आने वाले सारथी देव की पर्दे के पीछे छिपी कहानी जो अब आम हो गई है.

 

सारथी देव की देवदुनिया को तब झटका लगा जब दक्षिण भारत के उड़िया भाषा के चैनल प्रमेय न्यूज सेवन ने हैदराबाद के होटल गोलकुंडा में ली गईं तस्वीरें अपने चैनल पर दिखाईं.

 

इन तस्वीरों में गोलकुंडा होटल में बाकायदा जीन्स और काले चश्मे के साथ नजर आ रहे हैं सारथी देव. लेकिन भगवान का चोला उतार कर इंसानों जैसे कपड़े पहनना कोई गुनाह नहीं था.

 

हैदराबाद के गोलकुंडा होटल की तस्वीरें 2 से 8 जुलाई साल 2015 के बीच ली गई थीं लेकिन खबर इससे ज्यादा गंभीर थी.

 

खबर ये थी कि इसी दौरान सारथी देव ने होटल में 21 साल की एक युवती के साथ चेक इन किया था. होटल में सिर्फ एक कमरा बुक करवाया गया था. कमरे का नंबर था 607. आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि इस कमरे से खाने के लिए चिकन और पीने के लिए शराब के ऑर्डर आए थे. होटल स्टाफ इसकी पुष्टि कर चुका है.

 

ओ़डिशा में अपने भक्तों के बीच पूजे जाने वाले सारथी देव पर इल्जाम लगते ही गुस्सा फूट पड़ा. और इस बीच लड़की की पहचान भी सामने आ गई.

 

आरोप ये है कि खुद को भगवान की तरह दुनिया को पेश करने वाले सारथी देव अपने साथ कटक के एसबीसी मेडिकल कॉलेज की एक छात्रा को लेकर गए थे. पूरी पड़ताल के बाद मेडिकल कॉलेज ने भी बताया कि छात्रा हॉस्टल में रहती है और नर्सिंग का कोर्स कर रही है. 2 से 8 जुलाई के बीच उसने बाकायदा एप्लीकेशन देकर छुट्टी ली थी.

 

आरोप के बाद छात्रा ने खुद पुलिस थाने में जाकर पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की थी. 7 अगस्त 2015 को दिए अपने बयान में उसने ये भी कहा कि अगर इस बात के लिए कोई जिम्मेदार है तो वो मैं हूं. उनकी (सारथी देव) की कोई गलती नहीं है. मैंने ही उन्हें बाहर जाने के लिए मजबूर किया था क्योंकि मैं बीमार थी.

 

खुद सारथी देव ने भी सफाई दी कि वो हैदराबाद गए ही नहीं थे लेकिन ये सफाईयां भी सारथी देव के काम नहीं आईं.

 

जांच में पता चला कि सारथि देव ने 2 जुलाई को केंद्रपाड़ा से हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट पकड़ी थी. ये फ्लाइट इंडिगो एयरलाइन्स की है और कंपनी ने सारथी देव के नाम पर दो टिकटों की बुकिंग होने की बात कह दी है.

 

सारथी देव की दैवीय दुनिया पर इन खुलासों से मानो दैवीय आपदा ही आ गई. मुश्किल तब और बढ़ गई जब सारथी देव के हैदराबाद टूर पर साथ जाने वाली छात्रा ने उड़िया भाषा के चैनल ओ़डिशा समय को ये बयान दिया वो(सारथी देव) मुझे ब्लैकमेल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मेरा वीडियो बना लिया है. मैं कहां जाती हूं क्या करती हूं हर चीज पर नजर रखी जा रही है. उनके लोग मुझे मेरे घर के बाहर से फॉलो कर रहे हैं. वो मुझे जानते हैं. उन्होंने मुझे एक लिखित बयान पढ़कर बोलने के लिए मजबूर किया था. जिसमें लिखा था ”वो बहुत अच्छे हैं. उनकी कोई गलती नहीं है. भगवान मेरे लिए हैं रहेंगे. उनकी कुछ गलती नहीं है. जो भी गलती है वो मेरी है. मैंने ही उनको मजबूर किया था. मैंने उनको ले जाने के लिए बोला था. वो तो तबीयत खराब होने की वजह से मना कर रहे थे. मैंने ही उन पर दबाव डाला था.”

 

खुलासों के बाद आम लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. ओडिशा सरकार के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को दखल देना पड़ा और शुरू हो गई कड़ी कार्रवाई. सारथी देव को पहले पूछताछ के लिए बुलाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया.

 

जिस तरह से फंसे हैं खुद को भगवान कहलवाने वाले बाबा सारथी देव. अब उन्हें भगवान ही बचा सकता है. भगवान का नाम लेकर उन्होंने चमत्कार की ऐसी दुनिया रची थी कि दुनिया उन्हें पूजने लगी और फिर शुरू हो गया आस्था का कारोबार.

 

पढ़िए एक कॉलेज ड्रॉप आउट की पूरी कहानी

 

सेक्स स्कैंडल के बाद ओडिशा क्राइम ब्रांच के शिकंजे फंस चुके सारथी देव की जिंदगी की कहानी ठीक उतनी वैसे ही चमत्कारों से भरी है जिसका दावा वो खुद अपने भक्तों से करते हैं.

 

भक्तों के बीच झूमते झूमते सारथि देव के हाथों से राख उड़ने लगी है – फिर से देखिए – कैसे खाली हाथों से राख बिखर देते हैं सारथी देव जिन्हें उनके भक्त उनकी विभूति यानी प्रसाद कहते हैं.

 

सारथी देव अपने भक्तों को पैरों से आशीर्वाद देते हैं. लेकिन ये आशीर्वाद भी चमत्कारी है. चंद पलों में पैर का रंग पीला पड़ने लगा है. ये पीला रंग नहीं है ये शहद है जो किसी खास भक्त के लिए प्रसाद के तौर पर प्रकट होता दिख रहा है.

 

कुछ ऐसी ही कहानियों से भरी है सारथी देव के भक्तों के बीच उनकी लीलागाथाएं. सारथी देव के बारे में तो ये भी प्रचलित है कि वो अपने गले से विष्णु की तरह पूजे जाने वाले शालिग्राम पत्थर उगलते हैं.

 

सारथी बाबा का असली नाम संतोष कुमार राउला है. बाबा के पिता का नाम कृष्ण चंद्र राउला है और वो गंजम जिले के रहने वाले हैं. संतोष का परिवार केंद्रपाड़ा जिले में रहने चला गया था जहां पिता को बिजली विभाग में मीटर रीडर की नौकरी मिली थी. शुरु में संतोष राउला का परिवार किराये के मकान में रहता था. परिवार के पास एक साइकिल और दो बक्से ही थे.

संतोष राउला पढ़ाई में अच्छे नहीं थे और इस नाते पढ़ाई बीच में ही बंद हो गई. लेकिन तभी संतोष ने अपना भविष्य तय कर लिया था. वो अपने दोस्तों से कहा करता था कि एक दिन वो बाबा बनेगा और वो लोग उसके पैर छूकर आशीर्वाद लेंगे.

 

इन्हीं दावों के बीच साल 1985 में संतोष राउला केंद्रापारा से गायब हो गए और 7 साल बाद 1992 में नजर आए. इन सात सालों मे उसका हुलिया बदल चुका था. अब वो धोती-कुर्ते औऱ कंधे पर टॉवेल के साथ दिखने लगा था. किसी को नहीं पता था कि उन्होंने 7 साल कहां बिताएं.

 

अब इसके बाद से संतोष राउला खुद को श्रीमद सारथी बताने लगे. 1992-1993 में केंद्रापारा-इंदुपुर रोड से उसने जीवन की दूसरी पारी शुरु की. यहां पर उसने 65,000 रुपये में जमीन खरीदी जहां पर उसने श्रीमद सारथी आश्रम बना लिया. यहीं से शुरू हुआ आस्था का कारोबार – पहले हर रविवार को सतसंग शुरु हुए और फिर शुरू हो गए सारथी बाबा के जादू. कभी हाथ से विभूति पैदा कर देना. तो कभी पैरों से शहद पैदा करना तो कभी गाय की मूर्ति से दूध निकलवा देना.

 

भक्त भी चमत्कार को नमस्कार करने लगे. भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती गई. सारथी बाबा के भक्तों में कई अफसर और राजनेता भी हैं. खुद को बैचलर बताने वाला सारथी बाबा ने एक बेटे को गोद ले रखा है जो इसके आश्रम को संभालता है.

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