माल्या कांड में 1600 करोड़ गंवाने के बाद बंद हुई SBI की बोलती

SBI maintains silence on Mallya

नई दिल्ली: जिस सीबीआई के लुक आउट नोटिस में छूट की वजह से माल्या देश छोड़कर जा सके वो अब सवालों के घेरे में है. सीबीआई को उस अधिकारी का पता चल गया है जिनके स्तर पर कथित तौर पर चूक हुई होगी. नियम है कि लुकआउट नोटिस एसपी रैंक से नीचे रैंक का अधिकारी जारी ही नही कर सकता. इस बीच माल्या को सबसे ज्यादा कर्ज देने वाले बैंक स्टेट बैंक की चेयरपर्सन की बोलती बंद है.

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने माल्या को सबसे ज्यादा 1600 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है और जब सवाल एसबीआई की चेरयमैन से पूछा गया तो वो कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुईं. 7800 का कर्ज सूद के साथ माल्या पर अब नौ हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है. एसबीआई माल्या के खिलाफ 17 बैंकों के मोर्चे की अगुवाई कर रहा है जो माल्या को देश में रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे लेकिन उसके पहले माल्या रफूचक्कर हो गए.

जिस सीबीआई की लापरवाही से माल्या भागा वो अब अपने ही झूठ के जाल में फंसती जा रही है. माल्या के खिलाफ हिरासत का लुकआउट नोटिस को जानकारी देने वाला नोटिस बनाने वाली सीबीआई गलती कबूलने के बाद सवालों के घेरे में है.

सीबीआई का पहला झूठ
लुकआउट नोटिस के बावजूद विदेश कैसे भागा

इस मामले में सीबीआई ने इनडायरेक्ट तरीके से आईबी पर हमला किया और जब एयरपोर्ट इमीग्रेशन ने जांच की तो पाया कि माल्या के बारे में उऩके पास रोकने का नोटिस नहीं था बल्कि केवल सूचना देने का नोटिस जारी था इसके बाद भी सीबीआई ने तब तक नहीं बताया कि माल्या का पहला नोटिस रोकने का ही था औऱ उसे एक महीने में ही बदलवाया गया था जिसके चलते माल्या आराम से देश से बाहर चले गए.

सीबीआई का दूसरा झूठ
निचले स्तर के अधिकारी की गलती से हिरासत में लेने का नोटिस

सीबीआई के ही एक आला अधिकारी ने कैमरे पर आए बिना कहा कि लुकआऊट नोटिस एसपी रैंक से नीचे का अधिकारी तो जारी कर ही नहीं सकता औऱ बडे मामलो में तो उसमें डीआईजी औऱ संयुक्त निदेशक दोनो की परमीशन ली जाती है. यहां सवाल ये उठता है कि सीबीआई एसपी को बड़ा अधिकारी मानती है या नही.

सीबीआई ने अधिकारिक तौर पर कहा कि 23 नवंबर 2015 तो इमीग्रेशन विभाग ने सूचना दी कि माल्या लंदन से आने वाला है तो उसी दिन आनन फानन में उसका नोटिस बदल दिया गया लेकिन ये नोटिस किस अधिकारी की इजाजत से बदला गया उसके बारे में सीबीआई ने कोई भी जवाब देने से मना कर दिया.
विजय माल्या पर ये मुकदमा सीबीआई की मुंबई के बैंक सिक्योरिटी एंड फ्राड सेल में दर्ज हुआ था औऱ इस डिवीजन के संयुक्त निदेशक गुजरात कैडर के 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी एके शर्मा हैं. शर्मा को अप्रैल 2015 में सीबीआई में लाया गया था और उन्हीं के समय में विजय माल्या का मुकदमा दर्ज हुआ और दोनों नोटिस भी जारी हुए.

सीबीआई इस मामले में किसी भी तरह से अपना पीछा छुडाना चाहती है सूत्रों ने बताया कि इसके लिए एक अधिकारी को वार्निग नोटिस देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की जा रही है सीबीआई यह नहीं बताना चाहती कि इतने गंभीर मामले के असल जिम्मेदार कौन है औऱ किसकी वजह से माल्या देश के बाहर गए.

उधर प्रवर्तन निदेशालय ने लगातार दूसरे दिन किंगफिशर एय़रलाइंस के सीएफओ ए रघुनाथन और माल्या की दूसरी कंपनी के पूर्व निदेशक रवि से पूछताछ जारी रखी. इस मामले में आईडीबीआई बैंक के दो अधिकारियो से भी शुक्रवार को पूछताछ की गई थी और विजय माल्या को भी 18 मार्च को ईडी के सामने पेश होने का नोटिस जारी किया गया था.

ईडी जानना चाहता है कि माल्या की कंपनी को लोन दिलाने मे् किन प्रभावशाली लोगो का हाथ था औऱ लोन में से विदेश भेजी गई रकम कहां खर्च की गई साथ ही ईडी इन अधिकारियो से माल्या के बारे में भी जानकारी लेने की कोशिश कर रहा है.

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Web Title: SBI maintains silence on Mallya
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