SC का बड़ा फैसला: मतदाता को मिला किसी भी प्रत्याशी को न चुनने का अधिकार

By: | Last Updated: Thursday, 26 September 2013 11:53 PM

नई दिल्ली: चुनावी साल
में सुप्रीम कोर्ट ने
ऐतिहासिक फैसला दिया है.
कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश
दिया है कि ईवीएम
(इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन)
में अब ‘कोई नहीं’ यानी किसी भी
उम्मीदवार को नहीं चुनने का
विकल्प रखा जाए.

इसका मतलब हुआ कि अगर आपको
कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं
है तो अब आप किसी को भी नहीं
चुन सकते हैं.

अब तक यही होता रहा है कि जो
उम्मीदवार नामांकन दाखिल
करते हैं उन्हीं का नाम और
चुनाव चिन्ह ईवीएम पर होता
है, लेकिन कोर्ट ने अब
निष्पक्ष चुनाव के लिए ‘कोई
नहीं’ का विकल्प भी देने को
कहा है.

न्यायालय का यह निर्णय
प्रत्याशियों से असंतुष्ट
लोगों को मतदान के लिए
प्रोत्साहित करेगा.

प्रधान न्यायाधीश
न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की
अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि
नकारात्मक मतदान (निगेटिव
वोटिंग) से चुनावों में
शुचिता और जीवंतता को बढ़ावा
मिलेगा और व्यापक भागीदारी
भी सुनिश्चित होगी क्योंकि
चुनाव मैदान में मौजूद
प्रत्याशियों से संतुष्ट
नहीं होने पर मतदाता
प्रत्याशियों को खारिज कर
अपनी राय जाहिर करेंगे.

बेंच ने कहा कि नकारात्मक
मतदान की अवधारणा से
निर्वाचन प्रकिया में
सर्वांगीण बदलाव होगा
क्योंकि राजनीतिक दल स्वच्छ
छवि वाले प्रत्याशियों को ही
टिकट देने के लिए मजबूर
होंगे.

कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा
है कि वो इसमें चुनाव आयोग की
मदद करें. अदालत ने यह फैसला 2005
में दाखिल की गई एक जनहित
याचिका पर दी.

http://www.youtube.com/watch?v=M5WawoNljho

क्या है इस फैसले का मतलब

आपको बता दें कि वोटरों को
पहले ही से उम्मीदवारों को
रिजेक्ट करने का अधिकार था,
लेकिन इसके लिए उन्हें अलग से
फॉर्म भरना होता था, लेकिन
सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा
फैसले के बाद अब इवीएम (बैलेट
मशीन) पर ही एक ऐसा बटन होगा,
जिसके जरिए नकारात्मक
वोटिंग का विकल्प होगा.

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि
इससे प्रजातंत्र की जड़ें
मजबूत होंगी और राजनीतिक
पार्टियों पर अच्छे
उम्मीदवारों को चुनावी
मैदान में उतारने का दबाव
बढ़ेगा.

अदालत ने इस लागू करने के लिए
कोई समय सीमा तय नहीं की है,
लेकिन इतना जरूर कहा कि चुनाव
आयोग इसे चरणबद्ध तरीके से
लागू करे.

ख्याल किया जाता है कि हाल ही
में होने वाले चार राज्यों के
विधानसभा चुनाव में वोटरों
को यह अधिकार नहीं मिल पाए.

याचिकाकर्ता के वकील संजय
पारीख का कहना है कि फैसले से
हालात बदलेंगे.

अब तक की व्यवस्था

ईवीएम में ‘कोई नहीं’ का
विकल्प रखने की मांग करने
वाली याचिका साल 2005 में दाखिल
की गई थी.

फिलहाल अगर कोई मतादाता किसी
को वोट नहीं देना चाहता है तो
उसे मतदान केंद्र पर जाकर
फॉर्म 17A पर हस्ताक्षर करना
होता है. इसका मतलब ये होता है
कि वोटर अपने मताधिकार को
इस्तेमाल नहीं करना चाहता है.

इसी व्यवस्था को सुप्रीम
कोर्ट में चुनौती दी गई थी.
याचिका के मुताबिक इस
व्यवस्था से ये तो पता चलता
है कि मतदाता वोट नहीं देना
चाहता लेकिन यह नहीं पता चलता
है कि वह ऐसा क्यों चाहता है.

याचिकाकर्ता की मांग थी कि
अगर वोटर चुनाव में खड़े किसी
उम्मीदवार को पसंद नहीं करते
तो उससे ये बताने का मौका
मिलना चाहिए.

उनका तर्क था कि फॉर्म 17A भरने
की वजह से वोटर का मत गोपनीय
नहीं रह जाता जो कि कानून
अनिवार्य है. इसलिए बैलेट
मशीन यानी ईवीएम में ‘इनमें
से कोई नहीं’ का विकल्त बटन
होना चाहिए.

चुनाव आयोग ने इस सुझाव पर
सहमति जताई है, लेकिन सरकार
ने इस अव्यवहारिक करार दिया
है.

http://www.youtube.com/watch?v=Kn1BMCk5Z8E

राजनीतिक पार्टियों का
प्रतिक्रिया

पहली बार चुनावी दंगल में
कूदने की तैयारी में जुटी नई
नवेली आम आदमी पार्टी ने
सुप्रीम कोर्ट के इस
ऐतिहासिक फैसले का स्वागत
किया है और कहा कि यह वक़्त की
जरूरत है.

मुख्य विपक्षी पार्टी
बीजेपी ने कोर्ट के फैसले का
न तो विरोध किया है और न ही
स्वागत किया है.

बीजेपी के उपाध्यक्ष
मुख्तार अब्बास नकवी ने सीधे
तौर पर कुछ भी कहने से गुरेज़
करते हुए सिर्फ यह कहा कि वह
फैसले के अध्ययन के बाद ही
कुछ कहना पसंद करेंगे

हालांकि, उन्होंने कहा कि
चुनाव सुधार वक़्त की जरूत है
और सरकार को इस दिशा में काम
करना चाहिए.

बीएसपी की नेता मायावती ने
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का
स्वागत किया है और कहा कि
संविधान निर्माता बाबा
साहेब भीम राव आंबेडकर यही
चाहते थे.

http://www.youtube.com/watch?v=cAYR17dOrHI

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Web Title: SC का बड़ा फैसला: मतदाता को मिला किसी भी प्रत्याशी को न चुनने का अधिकार
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