अब CM भी अपना चेहरा दिखा सकेंगे सरकारी विज्ञापनों में, SC की इजाजत

SC modifies its earlier judgement regarding government advertising guidelines

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों में केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और राज्य मंत्रियों की तस्वीरों के छापने की अनुमति दे दी है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा है, “हम अपने आदेश में सुधार करना चाहते हैं. अब सरकारी विज्ञापन में राज्यपाल, मुख्यमंत्री के अलावा केंद्र और राज्य के संबंधित मंत्रियों की तस्वीर भी लगाई जा सकती है.” आम आदमी पार्टी ने तस्वीरों के छापने की अनुमति देने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने अपने साल 2015 के फैसले में सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर के इस्तेमाल पर पाबन्दी लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश के खिलाफ 5 राज्यों – उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और असम ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. इन राज्यों की याचिका का केंद्र सरकार ने भी समर्थन किया था.

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सरकारी विज्ञापनों में सिर्फ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की ही तस्वीर होने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर 9 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था, “देश में तमाम लोग हैं जो सरकारी विज्ञापन में लिखी गई बात को या तो पढ़ नहीं सकते या उन पर ध्यान नहीं देते. मंत्रियों या मुख्यमंत्री की तस्वीर लोगों का ध्यान विज्ञापन की तरफ खींचती है. किसी विज्ञापन में जनता के चुने हुए इन प्रतिनिधियों की भूमिका वैसी ही होती है जैसी ब्रांड एम्बेसडर की.”

इसके अलावा एटॉर्नी जनरल ने कहा था, “अपने विभाग में अच्छा काम कर रहे मंत्रियों या किसी कल्याणकारी योजना को चला रहे मुख्यमंत्री की तस्वीर का विज्ञापन में न होना लोकतंत्र के लिहाज़ से उचित नहीं है.”

पिछले साल 13 मई को दिए ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सरकारी विज्ञापन लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए होते हैं. किसी नेता की छवि बनाने के लिए नहीं.
इसी आधार पर अदालत ने सरकारी विज्ञापन में नेताओं के तस्वीर लगाए जाने पर रोक लगा दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम में सिर्फ राष्ट्रपति, पीएम और चीफ जस्टिस को अपवाद माना थ. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने महात्मा गांधी जैसे दिवंगत नेताओं की स्मृति में छपने वाले विज्ञापनों में उनकी तस्वीर छापे जाने की इजाज़त दी थी.

 

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