'तीन तलाक' पर SC ने मांगा केंद्र से जवाब

SC notice to Centre on triple talaq

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली : मुस्लिम समुदाय में ‘तीन तलाक’ के चलन और मर्दों को 4 शादी की इजाज़त पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के इन प्रावधानों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

उत्तराखंड की शायरा बानो ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके साथ क्रूर बर्ताव करने वाले पति ने उसे तीन बार तलाक बोल कर अपनी ज़िन्दगी से अलग कर दिया. शायरा बानो का कहना है कि पर्सनल लॉ के तहत मर्दों को हासिल तलाक-ए-बिदत यानी तीन बार तलाक कहने का हक़ महिलाओं को गैरबराबरी की स्थिति में रखने वाला है.

शायरा ने अपनी याचिका में निकाह हलाला के प्रावधान को भी चुनौती दी है. इस प्रावधान के चलते तलाक के बाद कोई महिला दोबारा अपने पति से शादी नहीं कर सकती. अपने पूर्व पति से दोबारा शादी करने के लिए उसे पहले किसी और मर्द से शादी कर तलाक लेना पड़ता है.

याचिका में मुस्लिम मर्दों को 4 महिलाओं से विवाह की इजाज़त को भी चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि ये सभी प्रावधान संविधान से हर नागरिक को मिले बराबरी और सम्मान के साथ जीने के अधिकार के खिलाफ हैं. ऐसे में मुस्लिम महिलाओं को बराबरी और सम्मान दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ एप्लीकेशन एक्ट के सेक्शन 2 को असंवैधानिक करार देना चाहिए.

इस सेक्शन में इन प्रावधानों का ज़िक्र है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिल दवे और ए के गोयल की बेंच इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है. आपको बता दें कि मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही चिंता जता चुका है. इस सिलसिले में अदालत ने खुद ही संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है.

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Web Title: SC notice to Centre on triple talaq
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