कल सुबह 7 बजे होगी याकूब मेमन को फांसी, SC का फांसी पर रोक से इनकार

By: | Last Updated: Wednesday, 29 July 2015 10:21 AM
SC will not hear Yakub Memon curative petition

नई दिल्ली : मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेमन की फांसी तय हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच ने डेथ वारंटी को सही मानते हुए याकूब मेमन की क्य़ूरेटिव पिटीशन की दोबारा सुनवाई करने की अर्जी खारिज कर दी.

 

इसका सीधा मतलब है कि अब याकूब मेमन की फांसी तय है और याकूब मेमन के पास फांसी से बचने के लिए अब कोई अदालती रास्ता नहीं रह गया है.

 

दूसरी ओर महाराष्ट्र के राज्यपाल सी विद्यासागर ने याकूब मेमन की दया याचिका खारिज कर दी.

 

इससे साफ है कि कल सुहब सात बजे याकूब मेमन को फांसी होगी.

 

राष्ट्रपति के पास नई दया याचिका गई है, अगर राष्ट्रपति इस पर विचार करते हैं तो ही फांसी रुक सकती है.

 

अदालत का फैसला

 

न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत और न्यायमूर्ति अमिताव राय की बेंच ने डेथ वारंट को सही मानने और क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज करने का फैसला सुनाया.

 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि याकूब मेमन को फांसी होगी.

 

सुबह 10.30 बजे सुप्रीम कोर्ट में याकूब मेमन की फांसी को लेकर सुनवाई हो रही है. याकूब के वकील राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि चूंकि क्यूरेटिव पिटीशन की सुनवाई को लेकर सारी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था, इसलिए क्यूरेटिव पिटीशन पर दोबारा सुनवाई हो.

 

 

 

इससे पहले, चीफ जस्टिस ने क्यूरेटिव पिटीशन पर रिव्यू को लेकर दो जजों में मतभेद के बाद तीन जजों की बेंच बनाई थी जिस ने याकूब की अर्जी पर सुनवाई की.

 

 

 

चीफ जस्टिस दत्तू ने किया बड़ी बेंच का गठन

न्यायमूर्ति एआर दवे और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ के बीच असहमति के कारण यह मामला चीफ जस्टिस एच एल दत्तू को भेजा गया जिन्होंने मेमन की किस्मत का फैसला करने के लिए न्यायमूर्ति दीपक मिश्र, न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी पंत और न्यायमूर्ति अमिताव राय की बड़ी बेंच का गठन किया. मेमन, 1993 मुंबई विस्फोट मामले में मौत की सजा पाने वाला एकमात्र गुनहगार है जो गुरूवार को 53 साल का होने वाला है.

 

नई बेंच करेगी फांसी पर फैसला

 

नई बेंच आज इस बात पर फैसल करेगी कि 30 अप्रैल को मुंबई की टाडा अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट पर रोक लगाई जाए या नहीं और मेमन की पिटीशन के मेरिट्स पर गौर किया जाए या नहीं. मेमन ने दावा किया है कि अदालत के सामने सभी कानूनी विकल्प खत्म होने से पहले ही डेथ वारंट जारी कर दिया गया.

 

दो जजों की अगल राय की वजह से बनी बड़ी बेंच

न्यायमूर्ति एआर दवे ने मौत के वारंट पर रोक लगाये बगैर उसकी पिटीशन खारिज कर दी, वहीं न्यायमूर्ति कुरियन की राय अलग रही और उन्होंने रोक का समर्थन किया. दोनों न्यायाधीशों के बीच किसी विषय पर अलग अलग राय होने पर पैदा कानूनी स्थिति के बारे में पूछे जाने पर बेंच को बताया गया, ‘‘यदि एक न्यायाधीश इस पर रोक लगाता है और दूसरा नहीं, तो फिर कानून में कोई व्यवस्था नहीं रहेगी.’’ अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और मेमन की ओर से पेश हुए राजू रामचंद्रन सहित वरिष्ठ वकीलों ने इस बात पर सहमति जताई कि इस विषय पर गौर करने के लिए चीफ जस्टिस के आदेश के साथ बड़ी बेंच को भेजा जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति दवे, दया के खिलाफ

न्यायमूर्ति दवे का नजरिया था कि 21 जुलाई को मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज करने में कोई दिक्कत नहीं थी और महाराष्ट्र के राज्यपाल उसकी दया पिटीशन पर फैसला कर सकते हैं क्योंकि दोषी कैदी अपनी सभी कानूनी उपायों का इस्तमाल कर चुका है.

 

न्यायमूर्ति कुरियन, दया के पक्ष में

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मेमन की क्यूरेटिव पिटीशन पर फैसले में सही प्रक्रिया का पालन नहीं करने की बात कहने वाले न्यायमूर्ति कुरियन ने कहा कि इस कमी को दूर किया जाना चाहिए और क्यूरेटिव पिटीशन पर नए सिरे से सुनवाई होनी चाहिए. न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे हालात में मौत के वारंट पर रोक लगाई जानी चाहिए.

 

न्यायमूर्ति दवे ने किया मनु स्मृति के श्लोक का ज़िक्र

न्यायमूर्ति दवे ने मनु स्मृति के एक श्लोक का ज़िक्र करते हुये कहा, ‘‘खेद है, मैं मौत के फरमान पर रोक लगाने का हिस्सा नहीं बनूंगा. चीफ जस्टिस को फैसला लेने दीजिये.’’

 

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