क्या वैज्ञानिकों का विरोध पाखंड है?

By: | Last Updated: Thursday, 29 October 2015 11:25 AM
Scientist P M Bhargava to return Padma to protest, Arun Jaitey oppose

नई दिल्ली : साहित्यकारों औऱ फिल्मकारों के बाद सरकार को एक और झटका लगा है. देश में पहली बार एक वैज्ञानिक ने सरकार से मिला पद्म भूषण जैसा सम्मान लौटाने का एलान किया है. 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने देश के माहौल पर चिंता जताई है.

 

साहित्यकरों के विरोध को तो सरकार साजिश के तहत किया गया विरोध बताकर दरकिनार करती रही है, अब बड़ा सवाल ये है कि क्या वैज्ञानिकों का विरोध भी पाखंड है?

 

पुष्प मित्र भार्गव देश के मशहूर वैज्ञानिक हैं. बायो टेक्नोलॉजी और बायो केमिस्ट्री में काम के लिए 1986 में पीएम भार्गव को पद्म भूषण पुरस्कार मिला था. भार्गव ने ये कहते हुए पद्म पुरस्कार लौटेने का फैसला किया है कि हिंदुस्तान अब पाकिस्तान बनने की तरफ बढ़ रहा है.

 

107 वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति को विरोध जताते हुए चिट्ठी लिखी है. इससे पहले कल ही एफटीआईआई यानी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के छात्रों के विरोध का समर्थन और कन्नड़ लेखक कलबुर्गी की हत्या का विरोध करते हुए निर्देशक दिबाकर बनर्जी समेत दस फिल्मकारों ने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने का एलान किया था.

 

युधिष्ठिर की भूमिका निभाने वाले गजेंद्र चौहान के निदेशक बनाये जाने से पुणे के FTII के छात्र नाराज थे. कल ही 139 दिनों से चल रही हड़ताल छात्रों ने खत्म की थी. विरोधी कह रहे हैं कि जिनके पास सम्मान के अलावा कुछ नहीं उनके सम्मान लौटाने को सांकेतिक मानना चाहिए. सरकार कह रही है कि इस सब के पीछे सिर्फ राजनीतिक विरोध है. इसके बाद सरकार की ओर से पुरस्कार लौटाने वालों पर बड़ा हमला किया गया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आज जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं वो लोग तब कहां थे जब देश में भ्रष्टाचार हो रहा था.

 

क्या ये भी पाखंड है? 107 वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति को विरोध जताते हुए चिट्ठी लिखी है. साहित्यकारों और फिल्मकारों के विरोध को मोदी सरकार को बदनाम करने की सजिश बताने वाले सरकार के नुमाइंदे क्या वैज्ञानिकों को भी उसी श्रेणी में रखते हैं? कल ही एफटीआईआई यानी फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के छात्रों का समर्थन करते हुए निर्देशक दिबाकर बनर्जी समेत दस फिल्मकारों ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार लौटाने का एलान किया था.

 

लेकिन वित्त मंत्री भी विरोध के कारण पर कुछ नहीं बोल रहे, उलटे सम्मान वापस करने वालों की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं. क्या अब विरोध इसलिए गलत है क्योंकि विरोध करने वालों ने कांग्रेस के राज में विरोध नहीं किया था? साहित्यकारों, फिल्मकारों और इतिहासकारों तक पर किसी विचारधारा से प्रेरित होने का आरोप मान भी लिया जाए, लेकिन क्या सरकार कहेगी कि वैज्ञानिक भी पाखंड पर उतर आए हैं?

 

देश के बुद्धिजीवियों नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे और एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद देश के बिगड़ते माहौल पर बहस शुरू हुई थी. इसके बाद गोमांस के विवाद में अखलाक की हत्या के बाद से विरोध बढ़ा और पुरस्कार लौटाने की होड़ शुरू हो गई. यहां तक कि आपके चैनल एबीपी न्यूज के स्टूडियो में लाइव बहस के दौरान मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटाने का एलान किया था.

 

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Web Title: Scientist P M Bhargava to return Padma to protest, Arun Jaitey oppose
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