सुरक्षा परिषद में मिले भारत को जगह: मोदी

By: | Last Updated: Tuesday, 14 April 2015 4:32 PM
Security Council_Narendra Modi_

बर्लिन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज विश्व बिरादरी से सवाल किया कि वह भारत , ‘‘शांति जिसके डीएनए में है ’’और जो महात्मा गांधी एवं भगवान बुद्ध की धरती है , उस भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए 70 सालों से इंतजार क्यों करना पड़ रहा है .

 

इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र के 70 साल पूरे होने को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समय आ गया है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट देकर भारत के साथ ‘‘इंसाफ किया जाना चाहिए.’’

 

मोदी ने जर्मन चांसलर एंजला मर्केल के साथ संयुक्त मीडिया संवाद में कहा, ‘‘ मैं दुनिया का ध्यान इस बात की ओर आकषिर्त करना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र इस वर्ष अपने गठन के 70 साल पूरे करने जा रहा है और हम प्रथम विश्व युद्ध की 100वीं बरसी पूरी करने जा रहे हैं . दुनिया को यह पता चलना चाहिए कि युद्ध में 75 हजार से अधिक भारतीय सैनिक शहीद हुए थे और भारत से 14 लाख से अधिक सैनिकों ने उसमें भाग लिया था , हालांकि इस युद्ध में भारत का कोई हित नहीं था. ’’

 

उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में से है जिसने शांतिरक्षक बलों में सर्वाधिक योगदान दिया और इसके योगदान की दुनियाभर में सराहना हुई है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का इतिहास इस तथ्य का सबूत है कि वह कभी आक्रमणों में शामिल नहीं हुआ और कभी किसी देश पर हमला नहीं किया.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘ यदि ऐसे देश को सुरक्षा परिषद की सदस्यता नहीं मिलती है …70 सालों तक इंतजार करना पड़ता है….शांति जिसकी रगों में है … उस देश को इंसाफ मिलना चाहिए… बहुत समय बीत गया है .’’ इससे पूर्व, मोदी ने अपनी बातचीत के शुरूआत के क्रम में कहा कि भारत और जर्मनी दो ऐसे देश हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का अधिकार खुद से कमाया है .

 

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी सदस्यता दुनिया के लिए भी फायदेमंद होगी. हम दोनों संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वषर्गांठ के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों में ठोस सुधार देखना चाहेंगे .’’

 

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की विस्तारित सदस्यता में स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासरत है . उसका कहना है कि मौजूदा ईकाई समकालीन विश्व की सचाइयों का असली प्रतिनिधित्व नहीं करती. दोनों नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य में कहा है, ‘‘हम अक्तूबर 2015 में भारत में होने वाली तीसरे अंतर-सरकारी विचार विमर्श (आईजीसी) को लेकर उत्साहित हैं. हमारी रणनीतिक भागीदारी एक नये और अधिक सद्यन दौर में प्रवेश कर रही है.’’ ‘‘हम एक दूसरे के विकास को दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिये परस्पर बल देने और उल्लेखनीय अवसर की पेशकश के तौर पर देखते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा साझा उद्देश्य जर्मनी के इंजीनियरिंग, सतत विकास के अनुभव, नवोन्मेष, कौशल और भारत में मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, डिजिटल भारत तथा अन्य पहलों के जरिये उपलब्ध नये अवसरों के जरिये बेहतर तालमेल बिठाते हुये आर्थिक वृद्धि और सतत विकास को हासिल करना है.’’ दोनों नेताओं ने कहा कि विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत के विस्तार के तौर तरीकों को देख रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में अपनी भागीदारी को आगे बढ़ाते हुये हम जलवायु परिवर्तन, उर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये मिलकर काम करेंगे.’’

 

दोनों पक्षों ने विनिर्माण, कौशल विकास, शहरी विकास, पर्यावरण, रेलवे, नदियों की सफाई, अक्षय उर्जा, शिक्षा, भाषा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और आगे ले जाने के लिये सक्रिय होकर कदम उठाने पर भी सहमति जताई.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘स्वच्छ उर्जा के विकास में जर्मनी मजबूत भागीदार है. हम स्वच्छ और अक्षय उर्जा के लिये उपकरणों के विनिर्माण के मामले में भी आपका सहयोग चाहेंगे और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के समाधान के लिये अपने साझा प्रयासों को बढ़ाना चाहेंगे.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘हम अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी तथा रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग बढ़ाना चाहेंगे. मुझे भरोसा है कि जर्मनी की कंपनियां इसमें उत्साह से भाग लेंगी और आपकी सरकार उन्हें पूरा समर्थन देगी.’’ मोदी ने कहा कि उन्होंने मर्केल के साथ अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर भी चर्चा की.

 

उन्होंने कहा, ‘‘भारत का यह विश्वास है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में यूरोप की आर्थिक गतिविधियां महत्वपूर्ण है और वैश्विक शांति के लिये यूरोप में स्थिरता जरूरी है. दोनों चुनौतियों के समाधान के लिये दुनिया नेतृत्व के लिये जर्मनी की ओर देखती हैं. मैं उन्हें ईरान के साथ बातचीत के सफल नतीजे के लिये बधाई देता हूं. यह पूरे क्षेत्र के लिये लाभदायक होगा. पश्चिम एशिया में अस्थिरता तथा हिंसा से देश में हमारे नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है.’’

 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम दोनों के लिये अफगानिस्तान में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विकास महत्वपूर्ण है. इस सदी में एशिया-प्रशांत क्षेत्र जो दिशा लेगा, उसका पूरी दुनिया के लिये बड़ा महत्व है.’’

 

सवालों का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि जर्मनी के शीर्ष उद्योगपतियों से चर्चा के दौरान उन्होंने इस बात को महसूस किया कि वे कौशल विकास, व्यवसायिक शिक्षा, प्रौद्योगिकी उन्ननयन तथा रक्षा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ काम करने को तैयार हैं.

 

इससे पहले, दिन में प्रधानमंत्री ने एलायंस के सीईओ ओलिवर बेएते से बर्लिन में मुलाकात की. उसके बाद उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रांक वाल्टर स्टेनमियर से भेंट की. द्विपक्षीय बातचीत में नेताओं के साथ उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल था.

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