बीजेपी के लिए बुरा दिन: उपचुनाव हारने की ये हैं खास वजह

By: | Last Updated: Tuesday, 16 September 2014 1:10 PM
Setback for BJP?

नई दिल्ली : 9 राज्य और 36 सीटें. विधानसभा उपचुनाव के नतीजों का दिन. लेकिन बीजेपी के लिए बुरा दिन रहा. यूपी में ताकत झोंकने के बावजूद बीजेपी कमाल नहीं कर पाई और राजस्थान-गुजरात में बीजेपी को खुद इतने बुरे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी.

 

कहने को तो ये विधानसभा के उपचुनाव के नतीजे थे लेकिन साख दांव पर लगी थी बीजेपी की भी और मुलायम सिंह यादव की भी. बाजी मार ली मुलायम सिंह ने.

 

यूपी में प्रचार के दौरान लव जेहाद का मुद्दा उठा. लेकिन न तो लव जेहाद चला न ही योगी आदित्यनाथ. मोदी का वाराणसी किला भी समाजवादी तूफान में ढेर हो गया. बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल रोहनिया में हार गई. लेकिन आखिर क्यों हारी बीजेपी.

 

ध्रुवीकरण की नाकाम कोशिश

चाहे बात लव जेहाद की हो या कानून तोड़कर रैली करने की. योगी आदित्यनाथ को आगे कर बीजेपी ने उन पर दांव खेला था लेकिन ये दांव उल्टा पड़ गया. समाजवादी पार्टी ने ग्यारह विधान सभा सीटों में से सिर्फ एक पर ही मुस्लिम उम्मीदवार उतारा. समाजवादी पार्टी ने आज़म खान को भी परदे के पीछे रखा. नतीजा ये हुआ कि वोटों के ध्रुवीकरण की बीजेपी की सारी कोशिशें नाकाम रही.  लखनऊ में योगी आदित्यनाथ ऐसा करने में कामयाब रहे और बीजेपी ये सीट बचा ले गयी.

 

गुटबाजी ने डूबोया

यूपी में बीजेपी का झगड़ा सामने आ गया. लखनऊ से लेकर मुरादाबाद तक यही हाल रहा. मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से बीजेपी सांसद सर्वेश सिंह अपने बेटे के लिए टिकट चाहते थे. नहीं मिला तो उन्होंने प्रचार से कन्नी काट ली. लखीमपुर के निघासन में सांसद अजय मिश्रा और पार्टी उम्मीदवार रामकुमार वर्मा में बनी नहीं और बीजेपी सीट हार गयी.

 

बिजली का संकट

 

जनता के लिए बिजली मुद्दा थी. जहां-जहां उपचुनाव हुए वहां चौबीस घंटे बिजली मिल रही थी. अखिलेश सरकार लोगों को ये समझाने में कामयाब रही कि अगर हमारे साथ रहे तो ऐसे ही बिजली मिलेगी और राज्य में जो बिजली का संकट था उसका ठीकरा समाजवादी पार्टी ने बीजेपी और केंद्र सरकार पर फोड़ा.

 

गुजरात को ‘नरेंद्र मोदी’ ही चाहिए 

 

नरेंद्र मोदी जैसे ही प्रधानमंत्री बने और गुजरात छोड़ा. बीजेपी नौ में से तीन सीट हार गई. दरअसल नरेद्र मोदी न तो प्रचार के लिए गए और न ही मोदी के जाने के बाद आनंदी बेन पटेल के काम का गुजरात में प्रचार हो सका. नतीजा गुजरात से ध्यान हटा और नतीजे चौंकाने वाले थे. 

 

टिकट बांटने में वसुंधरा की मनमर्जी

भरतपुर के दिगंबर सिंह को झुंझुनू के सूरजगढ़ से टिकट दिया. बाहर के उम्मीदवार के सहारे बीजेपी की नैया पार नहीं लग पाई. प्रतिष्ठा की सीट बना दी थी फिर भी हार गई. प्रधानमंत्री मोदी 75 पार के नेताओं के पक्ष में नहीं हैं फिर भी वसुंधरा ने वैर से 80 साल के गंगाराम कोली को टिकट दिया. नतीजा वैर की सीट भी गंवा दी.

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