अब स्मृति ईरानी का क्या होगा ?

By: | Last Updated: Wednesday, 24 June 2015 1:30 PM
Setback for Minister Smriti Irani

नई दिल्ली: अलग-अलग डिग्री के आरोपों के मामले में स्मृति ईरानी को झटका लगा है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा है कि ये मामला सुनवाई करने लायक है. कोर्ट ने अर्जी को मंजूर करते हुए 28 अगस्त की तारीख तय की है. हालांकि कोर्ट तीन साल पुराना मामला ही सुनता है. इसलिए अगर 2014 का हलफनामा झूठा पाया गया तभी स्मृति ईरानी को सजा मिल सकती है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या स्मृति का इस्तीफा मांगना सही है.

 

डिग्री विवाद में शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को झटका

शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी का इस्तीफा विपक्ष इसलिए मांग रहा है क्योंकि उनकी डिग्री को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में स्वीकार कर ली गई है. अब 28 अगस्त यानी सुनवाई की अगली तारीख को शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत के समर्थन में सबूत पेश करने होंगे.

 

सबूतों को देखने के बाद अगर जज को प्रथमदृष्टया मामला बनता हुआ लगा तब स्मृति ईरानी को समन भेज कर पेश होने और अपना पक्ष रखने को कहा जायेगा.

 

समन जारी होने के बाद ही औपचारिक रूप से मुकदमा शुरू होगा और स्मृति का दर्जा आरोपी का होगा. विपक्ष अभी से ही भले इस्तीफा मांग रहा हो लेकिन सरकार ने कह दिया है कि ये एनडीए की सरकार है और यहां इस्तीफे नहीं होते.

 

स्मृति का डिग्री विवाद क्या है ?

 

चुनाव आयोग में स्मृति ईरानी ने जो हलफनामा दिया था उसको लेकर विरोधाभास है. 2004 के चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक 1993 में बारहवीं करने के बाद स्मृति ईरानी ने 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से कॉरेसपॉन्डेंस में बीए किया. जबकि 2011 में राज्यसभा चुनाव में दिए हलफनामे के मुताबिक 1994 में बी कॉम पार्ट 1 बताया गया दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कॉरेसपॉन्डेंस से और 2014 के लोकसभा चुनाव में दिए हलफनामे में 1994 में बी कॉम फर्स्ट ईयर बताया है स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग कॉरेसपॉन्डेंस से. स्मृति ईरानी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि 2011 और 2014 का हलफनामा एक ही है इसलिए डिग्री का विवाद ही गलत है.

 

अब स्मृति ईरानी का क्या होगा ?

अगर चुनावी हलफनामे में कोई जान बूझकर लोगों को गुमराह करने की नीयत से झूठ बोलता है तो उस पर जनप्रतिनिधित्व कानून यानी रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपुल्स एक्ट की धारा 125A का मामला बनता है और इस धारा के तहत 6 महीने तक की कैद या जुर्माने की सजा हो सकती है.

 

ऐसे मामलों में झूठे हलफनामे की शिकायत 3 साल की भीतर दर्ज होनी चाहिए. यानी स्मृति को सज़ा तभी हो सकती है जब उनका 2014 का हलफनामा झूठा पाया जाए. 2004 और 2011 के हलफनामों के लिए उन्हें अब सजा नहीं मिल सकती.

 

अब शिकायत करने वाले को ये साबित करना पड़ेगा कि 2014 का हलफनामा झूठा है. हालांकि इसका लेना-देना मुकदमे के आखिरी फैसले से है. स्मृति को समन इस अंदेशे पर भी हो सकता है कि शायद 2014 का हलफनामा झूठा हो लेकिन अगर स्मृति का 2014 का हलफनामा सही है तो उन्हें सजा का डर नहीं है लेकिन मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है. और अगर स्मृति आरोपी बनीं तो सरकार के लिए नई मुश्किल खड़ी हो जाएगी.

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Web Title: Setback for Minister Smriti Irani
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