क्या लिंग परीक्षण से बेटी बचेगी?

By: | Last Updated: Tuesday, 2 February 2016 5:07 PM
Sex determination test be made compulsory to check: menka gandhi

नई दिल्ली: बेटा-बेटी का टेस्ट कराने के समर्थन में मेनका गांधी उतर आई हैं. मेनका के मुताबिक बेटा-बेटी जांच को जरूरी बनाना चाहिए ताकि कन्या भ्रूण वाली गर्भवती महिलाओं का ध्यान रखा जा सके और बेटियों की कोख में हत्या न हो सके. लेकिन मेनका के इस सुझाव का विरोध होना शुरू हो गया है.

मां के कोख में ही बेटियों को मिटाने से बचाने के लिए केंद्रीय महिला और विकास मंत्री मेनका गांधी का ये सुझाव आया है जिस पर अब बखेड़ा खड़ा हो गया है.

मेनका गांधी इस बात की वकालत कर रही हैं कि अगर देश में बेटियों को बचाना है तो लिंग जांच को जरूरी बना दिया जाए. इसके पीछे उनका तर्क ये है कि अगर पहले ही पता चल जाए कि मां के गर्भ में बेटी पल रही है तो उसके दुनिया में आने तक निगरानी करने में आसानी होगी और उसे कोख में ही नहीं मारा जा सकेगा.

कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए गर्भ में बच्चों के लिंग की जांच को साल 1994 में ही Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act के तहत गैरकानूनी बना दिया गया था. लेकिन 20 साल बाद भी बड़ा असर नजर नहीं आता. यही वजह है कि मेनका अब इस कानून को खत्म के पक्ष में खड़ी नजर आ रही है. लेकिन मेनका के इस प्रस्ताव का विरोध में होना शुरू हो गया. एक बड़ा वर्ग मानता है कि अगर पहले ही ये पता चल जाएगा कि कोख में बेटी पल रही है तो ये मां और बच्ची दोनों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर देगा.

विवाद बढ़ता देख मेनक गांधी को सफाई देनी पड़ी है. मेनका गांधी के मुताबिक उन्होंने लिंग जांच पर रोक लगाने वाले कानून को खत्म करने की बात नहीं कही थी बल्कि कोख में पल भ्रूण का लिंग पताकर उसे दर्ज करने को कहा था ताकि बेटियों को बचाया जा सके.

हालांकि मेनका जो सुझाव दे रही हैं उससे मिलता-जुलता एक प्रयोग पंजाब के नवांशहर में कामयाब हो चुका है. आमिर खान अपने शो सत्यमेव जयते में भी इसका जिक्र कर चुके है जहां बेटे और बेटियों की संख्या एक बराबर तक पहुंच गई.

2001 में यहां 1000 पुरुषों पर 732 महिलाएं थी. कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए 2005 से गर्भवती महिलाओं की संख्या दर्ज की जाने लगी ताकि कोई गर्भपात न करा सके. इसका असर ये हुआ कि 2011 में यहां एक हजार पर 898 महिलाएं हो गई.

और अब तो हाल ये है कि महिला और पुरुष दोनों की संख्या बराबर है. लेकिन यहां ये साफ कर देना जरूरी है कि नवांशहर में केवल गर्भवती महिलाओं की संख्या दर्ज होती थी न कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग का पता लगाया जाता था. लेकिन नवांशहर के उलट देश की तस्वीर चिंताजनक है.

2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में लिंगानुपात यानी प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओँ की संख्या सिर्फ 940 है. आंकड़े बताते हैं कि देश में हर रोज करीब दो हजार बच्चियों को गर्भ में ही मिटा दिया जाता है. यानी हर साल 5 लाख बेटियों की जन्म लेने से पहले हत्या कर देता है हमारा समाज. पिछले 20 साल में 1 करोड़ बेटियों का कोख में ही कत्ल किया जा चुका है.

समस्या गंभीर है लेकिन सवाल ये है कि मेनका गांधी जो नया सुक्षाव दे रही हैं कि कहीं वो समस्या खत्म करने के बजाए उसे और न बढ़ा दें.

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Web Title: Sex determination test be made compulsory to check: menka gandhi
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