इमाम बुखारी को पाकिस्तान चले जाना चाहिए: बीजेपी

By: | Last Updated: Thursday, 30 October 2014 9:40 AM
Shahi Imam invites Nawaz Sharif but leaves out PM Narendra Modi for son’s anointment

नई दिल्ली: दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी द्वारा नायब इमाम की दस्तारबंदी की रस्म में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को बुलावा भेजने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दावत नहीं देने के विवाद पर बीजेपी नेता नलिन कोहली ने कहा कि शाही इमाम को पाकिस्तान चले जाना चाहिए.

 

एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बीजेपी नेता ने कहा कि भारत के पीएम की अनदेखी करके पाकिस्तान के पीएम को बुलावा भेजना और इमाम के जरिए राजनीतिक बयान देना उनकी मानसिकता को उजागर करता है और ये निंदनीय है.

 

नलिन कोहली ने कहा, “शाही इमाम जो कह और कर रहे हैं वो देश के मुसलमानों की सोच नहीं है, लेकिन उनकी जो मानसिकता है, उन्हें तो पाकिस्तान की नागिरकता ले लेना चाहिए.”

 

आपको बता दें कि शाही इमाम अहमद बुखारी ने अपने बेटे शाबान बुखारी के नायब इमाम के एलान के मौके पर 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म में जहां नवाज़ को बुलावा भेजा है वहीं पीएम मोदी को दावत नहीं दी है.

 

गुजरात दंगों को नहीं भूला है मुसलमान

 

शाही इमाम का कहना है, ” 2002 के गुजरात दंगों को भारत का मुसलमान नहीं भूला है. मोदी ने मुसलमानों को साथ लाने की कोशिश नहीं की है इसलिए मैंने दावत नहीं दी है. ये मेरा निजी कार्यक्रम है.”

 

इमाम बुखारी ने कहा कि उन्होंने बीजेपी के अनेक नेताओं को दावत दी है जो देश को एक साथ ले चलने के काबिल हैं.

 

कब है दस्तारबंदी और क्या है कार्यक्रम

 

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने 19 साल के बेटे सैयद शाबान बुखारी को अपना उत्तराधिकारी बनाने का एलान किया है. 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म के साथ उन्हें नायब इमाम घोषित किया जाएगा.

 

दस्तारबंदी की रस्म में शामिल होने वाले मेहमानों की लिस्ट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का तो नाम है, लेकिन अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी का नाम गायब है. 

 

कार्यक्रम के अनुसार 22 नवंबर को दस्तारबंदी होगी. उस रात और 25 नवंबर को खास मेहमानों के लिए डिनर है. 29 नवंबर को कई मुल्कों के राजनयिक और दिग्गज सियासी हस्तियां शामिल होंगी, लेकिन खास बात ये है कि इनमें से किसी भी कार्यक्रम में मोदी को दावत नहीं हैं.

 

हालांकि, उन्होंने मोदी कैबिनेट के अनेक मंत्रियों को दावत भेजी है जिनमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, सैयद शाहनवाज़ हुसैन और विजय गोयल के नाम शामिल हैं.

 

दस्तारबंदी समारोह के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और यूपी के सीएम अखिलेश यादव को दावत भेजी गई है.

 

आपको बता दें कि मुगल शहंशाह शाहजहां ने दिल्ली की आलीशान जामा मस्जिद तामीर कराई थी. ये मस्जिद 1656 में बनकर तैयार हुई थी. मस्जिद में पहली नमाज 24 जुलाई 1656, दिन सोमवार ईद के मौके पर पढ़ी गई थी. नमाज के बाद इमाम गफूर शाह बुखारी को बादशाह की तरफ से भेजी गई खिलअत (शाही लिबास और दोशाला) दी गई और शाही इमाम का खिताब दिया गया. तभी से शाही इमाम की ये रवायत बरकरार है.

 

कौन होंगे उत्तराधिकारी?

 

सैयद शाबान बुखारी सोशल वेलफेयर में ग्रेजुएट कोर्स कर रहे हैं. साल 2000 से अहमद बुखारी इमाम हैं. इससे पहले अहमद बुखारी के पिता अब्दुल्लाह बुखारी इमाम थे. अहमद बुखारी अपनी देखरेख में शाबान बुखारी को नायब इमाम के तौर पर ट्रेंड कर रहे हैं.

 

खास बात ये है कि बीते 400 साल से बुखारी का खानदान ही पीढी दर पीढ़ी भारत की इस ऐतिहासिक मस्जिद का इमाम बनता आया है.

 

देश में दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम का ओहदा खासा प्रभावशाली माना जाता है. बीते तीन दशक से ये परंपरा बन गई है कि शाही इमाम आम चुनावों या विधानसभा चुनावों के दौरान अक्सर किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में एलान करते आए हैं.

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