संसद की मर्यादा अक्सर भूल जाते हैं शरद यादव!

By: | Last Updated: Monday, 16 March 2015 5:22 PM
Sharad comment on smiriti

नई दिल्ली: पिछले साल एक बड़े राजनेता को सर्वेश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार मिला था लेकिन वो सांसद संसद की मर्यादाएं भूल गए हैं. वो दक्षिण भारतीय महिलाओं के रंग पर विवादित बयान देते हैं और बार-बार कहने पर भी माफी मांगने से भी इंकार कर देते हैं. शरद यादव की जुबान बदगुमान हो चुकी है.

 

मई 2014 को देश की संसद में दिया गया राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का मशविरा अगर शरद यादव मान लेते तो उनकी जुबान से निकले शब्द एक बार फिर शर्मनाक बयान में ना बदलते और ना ही उस बयान के लिए माफी मांगने की मांग करने वाली बीजेपी की मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी पर अपमानजनक टिप्पणी करते शरद यादव.

 

इससे पहले कि शरद यादव के तीखे बोलों की ये कहानी बताएं एक तस्वीर को देख लेना जरूरी है. ये तस्वीर साल 2014 की है जब संसद के तीन सीनियर सांसदों को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सर्वश्रेष्ठ सांसद के सम्मान से नवाजा था.

 

लेकिन अब जो कुछ आप देखेंगे उसके बाद आप शायद इस बयान और पुरस्कार की उन तस्वीरों का रंग फीका पड़ जाएगा. आपको लिए चलते हैं 13 मार्च की राज्यसभा की कार्रवाई में. जेडीयू सांसद शरद यादव बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने के सरकार के संशोधन विरोध में बोल रहे थे लेकिन उन्होंने इसे चमड़ी के रंग से जोड़ दिया.

 

बयान में सत्ता पक्ष के रविशंकर प्रसाद ने भी अपने रंग पर की गई टिप्पणी को बापू के रंग से जोड़ दिया था. लेकिन बाद में रविशंकर प्रसाद ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया.

 

जिस असंवेदशील भाषा में शरद यादव ने ये टिप्पणी की उसका असर बाद में तो होना ही था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन लगातार हाथ हिलाकर शरद यादव से चुप होने का इशारा करने लगे. लेकिन शरद ने तब तक एक ऐसी टिप्पणी कर दी थी जो संसदीय मर्यादा के मुताबिक नहीं थी. दक्षिण भारत से डीएमके की सांसद कनिमोझी सदन छोड़कर चली गईं.

 

शरद यादव की विवादित टिप्पणी का चौतरफा विरोध शुरू हो गया लेकिन शरद यादव ने माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया. यही नहीं एक बार फिर राज्यसभा में स्मृति ईरानी ने माफी मांगने की बात कही तो शरद यादव ने उन्हें भी दो टूक जवाब दे दिया.

 

सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान पाने वाले शरद यादव की ये टिप्पणी एक बार फिर भारतीय संसद में सांसदों के आचरण का बड़ा सवाल बन गई है. जावेद अख्तर ने टिप्पणी इसीलिए की थी क्योंकि ये संसद शरद यादव जैसे नेताओं की जुबान से अक्सर ऐसी भाषा के इस्तेमाल का गवाह बनती रही है. दिल्ली गैंग रेप के दौरान उन्होंने बेहद विवादास्पद बयान दिया था.

 

शरद यादव को इस बात से फर्क नहीं पड़ा कि वो संसद में खड़े हैं या कहीं और. दिल्ली गैंगरेप पर ही संसद के बाहर तो उनके बयान ने हंगामा ही खड़ा कर दिया. शरद यादव ने बाद में इस पर सफाई देकर विवाद को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की.

 

लेकिन ऐसा नहीं है कि वो हर बार माफी मांगते हों लेकिन उनकी जुबान का फिसलना उस संसद ने बार बार देखा है जिसने उन्हें सम्मानित किया था. शरद यादव की जुबान पर्देदारी जानती ही नहीं है और महिलाओं के सम्मान को लेकर उनकी टिप्पणियां इस हद तक जाती हैं कि पास्को के तहत गंभीर अपराध माने जाने वाली छेड़छाड़ और महिलाओं के पीछा करने को चुटकुले की तरह पेश करते हैं.

 

शरद यादव ने कहा था हम भी लड़कियों का पीछा करते थे. संसद के बाहर तो शरद यादव की जुबान कोई लगाम नहीं मानती. मायावती जैसी नेता पर उनका ये बयान राजनीति में महिलाओं पर उनकी सोच को दिखाने के लिए काफी है. शरद यादव ने कहा था कि ठगिनी है मायावती.

 

यही नहीं शरद यादव एक कार्यक्रम में छोटी बच्चियों के सेक्स रेशियो को लेकर ये बयान भी दे चुके हैं. ऐसे में एक बार फिर देखिए ये वही 67 साल के बुजुर्ग शरद यादव हैं जिन्होंने संसद को अपने जीवन के 37 साल दिए हैं. संसद उनकी काबिलियत का सम्मान कर चुकी है लेकिन शायद शरद यादव जुबान को संसद के मान की फिक्र कम ही होती है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Sharad comment on smiriti
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017