दुनिया इस दौर के सबसे बड़े शिया-सुन्नी टकराव से सहमी हुई है

By: | Last Updated: Tuesday, 5 January 2016 10:36 PM
Shia and Sunni Muslims controversy

नई दिल्ली: दुनिया इस दौर के सबसे बड़े शिया-सुन्नी टकराव से सहमी हुई है. भारत से सवा दो हजार किलोमीटर दूर सऊदी अरब में शिया धर्मगुरू निम्र अल निम्र को सजा-ए-मौत दिए जाने के बाद शुरू हुआ शिया-सुन्नी टकराव लगातार बढ़ रहा है. सुन्नी राजशाही वाले सऊदी अरब और शिया शासन वाले ईरान के अपने कूटनीतिक रिश्ते टूट चुके हैं और मुस्लिम देश दो खेमों में बंटते नजर आ रहे हैं.

 

शिया और सुन्नी समुदायों के बीच पूरी दुनिया में तनाव बढ़ रहे हैं. शिया समुदाय ने ईरान में सऊदी अरब के दूतावास में आगजनी की तो इसके सऊदी अरब के सुन्नी शासन ने भी ईरानी दूतावास को खाली करवा लिया है.

 

शिया और सुन्नियों के बीच टकराव सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है. बहरीन, सीरिया और इराक में शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया है. इसकी आंच पाकिस्तान और भारत में भी महसूस की जा रही है.

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शिया-सुन्नी तनाव क्यों बढ़ा?

हर हाथ में नजर आ रही ये तस्वीर है इस बड़े टकराव की वजह. ये तस्वीर है शिया धर्मगुरू निम्र अल निम्र की जिन्हें सऊदी अरब ने 46 दूसरे आतंकियों के साथ देश विरोधी गतिविधियों के लिए सजा-ए-मौत दे दी.

 

निम्र अल निम्र दरअसल ऐसे शिया धर्मगुरू थे जिन्हें सऊदी अरब की राजशाही का सबसे मुखर विरोधी माना जाता था. 57 साल के निम्र अल निम्र सऊदी अरब की दो करोड़ की आबादी में 20 लाख शियाओं के सबसे बड़े नेता थे.

 

लेकिन सऊदी अरब में सुन्नी राजशाही है. ऐसे में सऊदी अरब निम्र को शिया विद्रोह की वजह भी मानता था और सऊदी अरब के खिलाफ ईरानी साजिश का चेहरा भी. निम्र की अगुवाई में ही साल 2011 में सऊदी अरब में शिया समुदाय का सबसे बड़ा प्रदर्शन हुआ था. निम्र ने साल 2012 में सऊदी अरब के प्रिंस नायफ की मौत पर जश्न मनाने की अपील तक कर डाली थी.

 

निम्र अल निम्र को साल 2012 में जख्मी हालत में गिरफ्तार किया गया था. निम्र को पिछले साल आतंक फैलाने के जुर्म में मौत की सजा सुनाई गई और पिछले हफ्ते यानी 2 जनवरी को उन्हें फांसी दे दी गई.

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अब ईरान के धर्मगुरू ने अयातुल्ला अली खमेनी ने निम्र की मौत का बदला लेने की धमकी दी है जो सऊदी अरब ने भी आंख दिखाते हुए कहा है कि वो ऐसे ही देशद्रोहियों को सबक सिखाते रहेंगे.

 

इस बीच सूडान और बहरीन ने भी ईरान से सारे राजनयिक संबंधों को तोड़ लिया है. यूएई ने तो ईरानी राजदूत को ही देश से निकाल दिया है.

शिया-सुन्नी टकराव का असर कच्चे तेल के दामों पर भी देखने को मिल सकता है क्योंकि सऊदी अरब के तेल भंडार उस इलाके में हैं जहां शियाओं की आबादी ज्यादा है.

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Web Title: Shia and Sunni Muslims controversy
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