व्यापम मामलाः किसी एजेंडे के कारण चुप थे सीएम शिवराज?

By: | Last Updated: Sunday, 19 July 2015 1:26 PM
shivraj singh

फाइल फोटो

नई दिल्लीः मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है. कांग्रेस के पास व्यापम घोटाले से जुड़े 300 से ज्यादा सवाल हैं लेकिन अब तक देखा ये गया है कि व्यापम घोटाले से जुड़े सवाल उठाने पर सीएम शिवराज चुप ही रहे हैं. जबकि शिवराज खुद अपनी गिनती घोटाला उजागर करने वालों में करते रहे हैं. सवाल ये उठ रहा है कि क्या सीएम शिवराज विधानसभा में किसी एजेंडे के तहत चुप्पी साध रखी थी.

 

व्यापम घोटाले मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री खुद को घोटाले पर से पर्दा उठाने वालों में गिनते हैं लेकिन विधानसभा में पिछले 8 साल के रिकॉर्ड कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं. शिवराज भले ही बार-बार घोटाले की पड़ताल का ढिंढोरा पीटते हों लेकिन विधानसभा में पिछले कई सालों से पूछे जा रहे सवालों पर शिवराज या तो चुप रहे या फिर जानकारी इकट्टा करते रहे

 

एबीपी न्यूज ने पिछले 8 सालों में व्यापम को लेकर विधानसभा में पूछे गए सवाल जवाब की लिस्ट खंगाली है

 

 

नवंबर 2009 – निर्दलीय विधायक पारस सकलेचा ने सरकार से सवाल पूछा था – क्या राज्य के पीएमटी में अनियमितताएं हो रही हैं ?

 

सरकार ने जवाब में कहा- जानकारी एकत्रित की जा रही है

 

मुख्यमंत्री ने पीएमटी में गड़बड़ी की शिकायत के सवाल पर एक कमेटी गठित की. तब राज्य का चिकित्सा विभाग का जिम्मा शिवराज के पास ही था. 

 

31 मार्च 2011 – को विधानसभा में सवाल पूछा गया कि क्या मुख्यमंत्री बताएंगे कि मेडिकल कालेजों और डेंटल कालेजों में 2007 से लेकर 2010 तक कितने फर्जी दाखिले हुये ?

 

शिवराज ने जवाब दिया कि – 31 मार्च 2011 तक किसी भी फज़ी छात्र की पहचान नहीं हुई है.

 

29 नवंबर 2011 – विधायक पारस सकलेचा ने एक और सवाल पूछा कि मुख्यमंत्री ने जो कमेटी बनाई, उसमें कौन कौन थे और कितनी गड़बड़ियां पाई गईं ?

सरकार ने जवाब दिया कि 114 छात्रों की पहचान हुई है और जांच में व्यापम के अधिकारी, चिकित्सा विभाग, मेडिकल कालेज़ों के अधिकारी लगाए गये हैं.

 

हालांकि इस जवाब में मुख्यमंत्री ने कहीं भी ये नहीं बताया कि जांच कब तक होगी. इस कमेटी ने कभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी.

 

मुख्यमंत्री की चुप्पी जारी रही. उन्हें याद दिलाने के लिये कई विधायकों ने चिट्ठियां लिखीं. ऐसी 17 चिट्ठियों के दबाव में सिर्फ इतना कहा कि मेडिकल कॉलेज भी जांच 30 दिन में करके बताएं. लेकिन दिसम्बर 2013 में जाकर मेडिकल कालेजों ने जांच पूरी की. वो भी सिर्फ छात्रों की. मुख्यमंत्री ने कहीं भी जांच का दायरा नहीं बढ़ाय़ा.. जानने की कोशिश नहीं कि फर्जी छात्रों के पीछे कौन है.

 

एक बार फिर 21 मार्च 2103 को निर्दलीय विधायक ने विधानसभा में पूछा कि 2007-2008,2010, 2011 में जो डेंटल मेडिकल कालेज और पीएमटी की जांच कहां पहुंची.

 

सरकार का जवाब आया जानकारी एकत्रित की जा रही है.

 

सालों साल तक सिर्फ जानकारी इकट्ठा होती रही. किसी सवाल का कोई ठोस जवाब नहीं दिया शिवराज सिंह चौहान ने.

 

विधानसभा के पूरे रिकॉर्ड को देखें तो 50 से भी ज्यादा बार सवाल आये, दर्जनों चिट्ठियां लिखी गईं लेकिन मुख्यमंत्री या तो जानकारी जुटाते रहे, या चुप रहे या फिर कमेटियां बनाते रहे. अब फिर विधानसभा का मॉनसून सत्र सामने है देखना है शिवराज सिंह विपक्ष के सवालों का जबाव देते हैं या अब भी सिर्फ जानकारी इकट्ठा करने का हवाला देते हैं.

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