एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज ने कहा- पर्चियों से भर्ती कराते थे दिग्विजय सिंह

By: | Last Updated: Saturday, 8 August 2015 2:40 PM
shivraj singh chauhan

एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से पूछे गए तीखे सवाल.

 

सवाल दिबांग- आप व्यापमं का नाम ही बदल देना चाहते हैं, क्या आपको लगता है कि नाम बदल देने से जो दाग है वो धुल जाएगा ? ये किस तरह की कोशिश है

 

जवाब नं. शिवराज- पहले तो मैं बताऊं कि जिसको महा घोटाला कहा जा रहा है उसके बारे में भ्रम है. 2005 के अंत में मैं मुख्यमंत्री बना. उसके पहले भर्ती परिक्षाओं की कोई ट्रांसपैरेंट व्यवस्थाएं नहीं थी. अगर पुलिस में भर्ती होनी है तो आईजी और एसपी भर्तियां करते थे, शिक्षकों की भर्तियां जिला पंचायत के अध्यक्ष और एक शिक्षा समिति करती थीं. पटवारी की भर्तियां होती थी तो कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर मिल कर करते थे. कोई ट्रांसपैरेंट व्यवस्था नहीं थी. मैंने भर्ती परिक्षाओं में ये फैसला किया कि हम भर्ती परिक्षाओं को ट्रांसपैरेंट करेंगे. मेरिट के आधार पर भर्ती हो इसकी व्यवस्था हम बनाएंगे. मैं एक उदाहरण दूंगा जैसे पुलिस की भर्ती में फीजिकल पुलिस वाले करेंगे और लिखित परिक्षा दूसरी जगह होगी. फीजिकल की भी वीडियोग्राफी होगी और दौड़ाएंगे तो आरएफ टैग बांध कर दौड़ाएंगे ताकि कम्प्यूटराइज स्पीड निकल कर आ जाए, कोई बेईमानी ना हो सके. ऐसे हर एक परीक्षा चाहे वो शिक्षकों की हो चाहे वनरक्षक की हो, चाहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हो. हमने तय किया कि जो सबसे नं.1 वन होगी वो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होगी अगर नं.1 इन्कार करेगी तो न.2, न.3,नं.4…. हमने भर्ती  की पूरी की पूरी ट्रांसपैरेंट व्यवस्था बनाने का काम किया. और उसमें ये व्यापमं का मामला सामने आया कैसे?

 

दिबांग- इसपर सवाल ये है आगे, फिलहाल सवाल ये है कि क्या नाम बदल देने से सब कुछ बदल जाएगा?

शिवराज- नाम बदलने का सवाल नहीं है, ना नाम बदला है. हम लोगों ने व्यवस्था को ठीक करने की कोशिश और काम किया है. लेकिन पिछले 6 महीने में जो काम हुआ है उसके लिए ISO सर्टिफिकेट भी व्यवापं को मिला है.

सवाल राशिद किदवई- क्या वजह रही कि व्यापमं का मामला बहुत तेजी से उछला, संदिग्ध हालत में कुछ लोगों की मौत हुई, हत्याओं के भी आरोप लगे तो इसके पीछे लगता है कि कोई राजनैतिक षड़यंत्र था? अंदरूनी था या बाहर से हुआ इसके बारे में आप का क्या कहना है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवराज का खुलासा- पर्चियों से भर्ती कराते थे दिग्विजय सिंह

 

जवाब शिवराज- मैं केवल दो चीजें कहना चाहूंगा. कुछ तो परिस्थितियां ऐसी बनी कि एक के बाद एक मृत्यू हुई और विशेषकर हमारे भाई अक्षय जी उनकी मृत्यू हुई. उसके कारण लोगों का ध्यान उस तरफ गया लेकिन कांग्रेस लगातार कोशिश कर रही थी. 10 साल से मैं मुख्यमंत्री हूं और अभी तक मैदान में मुझे कांग्रेस कभी पराजित नहीं कर पायी. अभी 20 दिन पहले जो उपचुनाव हुई उसमें भारतीय जनता पार्टी फिर जीत कर आयी है. लेकिन कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता जो राजा भी रहें, महाराजा भी रहें, जो ये मानते थे कि मुख्यमंत्री रहना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. एक छोटे से परिवार का गांव रहने वाला 10 साल से लगातार मुख्यमंत्री है, उसको मैदान में नहीं हटा सकते तो आरोपों का भट्टी में जलाने की कोशिश करो, छवि खराब करो, प्रतिमा खंडित करो. लंबे समय से लगातार कांग्रेस एक के बाद एक झूठे आरोप लगाती जा रही है. एक असत्य निकलता तो दूसरा असत्य निकलता तो तीसरा लगाने का प्रयास करती. मुझे सिर्फ तकलीफ इतनी है कि वो शिवराज को बदनाम नहीं करते उससे ज्यादा मध्यप्रदेश की छवि पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करने का काम करते हैं.

 

सवाल दिबांग- गवर्नर की बात करें. गवर्नर आरोपी नं.10, गवर्नर पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया आप सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गए. गवर्नर को बचाने की आपको क्यों लगी रही, क्या इसमें ये बात थी कि अगर गवर्नर जाते हैं तो अगला नं. मुख्यमंत्री का आता है. क्या ये डर था?

 

जवाब शिवराज- देखिए डरने का सवाल कहीं नहीं है. और इसलिए गवर्नर को लेकर लोग हाईकोर्ट गए, हाईकोर्ट ने कहा जांच ठीक है, सुप्रीम कोर्ट में गया, सुप्रीम कोर्ट ने कहा जांच ठीक है और सीबीआई को भी दिया है. हमने इसलिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की है कि अगर कहीं संदेह की सुई भी आपके तरफ उठे तो लोकतंत्र लोकलाज से चलता है. अगर कोई भी संदेह की सुई उठे तो सीबीआई जांच कर लें हमने हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की है. “हाथ कंगन को आरसी का, सांच को आंच कहां” इसलिए उसका सवाल ही नहीं है. जहां तक गवर्नर साहब का सवाल है, गवर्नर का पद संवैधानिक पद है. मैं उस पद के बारे में कुछ नहीं कहूंगा.

 

दिबांग- कांग्रेस के सारे राज्यपाल आप ने हटा दिए, इनमें क्या खास बात है. कोई आपकी अच्छी जान-पहचान है या आपको लगा कि इनकी उम्र बहुत हो गई है, इनको रखे रहें. कोई तो एक बात रही होगी.

शिवराज- इस पर फैसला भारत सरकार करती है, मुख्यमंत्री तय नहीं करता.

दिबांग- आपकी क्या राय है, आप एक तरफ कह रहे हैं कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, आप कह रहे हैं कि किसी को बख्शा नहीं जाएगा.

 

शिवराज- कह नही रहा मेरे मित्र दिबांग करवाई है. जांच मैंने करवाई है ये ना तो मीडिया को पता था ना तो कांग्रेस को. जब मैंने जांच करवाई तब लोगों के सामने आया और इसलिए करवाई कि अगर उसमें छोटी भी गड़बड़ है तो सामने आनी चाहिए. केवल एक लाइन में बताना चाहता हूं कि एक करोड़ सात लाख बच्चों ने भर्ती परिक्षाएं दी उनमें से तीन लाख चौव्वन हजार का सलेक्शन हुआ और जो गड़बड़ पायी गई वो एक हजार छ: सौ इकतालिस जो कि पीएमपी को मिलाकर पायी गयी. जो जिरो प्वाइंट जिरो वन परसेंट होती है और मैं ये दावे से कह सकता हूं कि ऐसी जांच किसी भी प्रदेश में कर लें ऐसी कुछ ना कुछ गड़बड़ निकल जाएगी.

 

दिबांग- आपके कहने का मतलब है कि मैं जांच करवाउंगा लेकिन गवर्नर कुछ करेंगे तो वो संवैधानिक पद है इसलिए मैं छोड़ना चाहूंगा.

शिवराज- एसटीएफ ने जांच की, जांच में जो तथ्य उनको मिले उसके आधार पर एफआईआर हुई. उसके आधार पर कार्रवाई होगी और किसी चीज का सवाल ही नहीं है.

सवाल इरा झा-  इस मामले में बहुत से छात्र भी आरोपी हैं, गिरफ्तार भी हुए हैं, उनके पैरेंट्स भी गिरफ्तार हुए हैं. आपका जो ये व्यापमं है ये तो पूरी तरह से सत्ता और दलालों का खेल था एकदम. तो ये लोग तो बेकसूर लोग फंस गए, इनके बारे में कभी सोचा है?

 

जवाब शिवराज-  हम लोगों ने इस जांच को एसटीएफ को सौंपा है. कुल मिलाकर इसमें एक करोंड़ सात लाख लोगों ने भर्तियों में भाग लिया. अब एसटीएफ ने जांच की उसके आधार पर उनको जो लिंक्स मिले. उसके आधार पर लोगों को आरोपी बनाया. इस जांच में हमने कोई इंटरफेयर नहीं किया. बीच में जांच की मॉनिटरिंग हाईकोर्ट ने फैसला किया कि इसकी जांच की मॉनिटरिंग हम करेंगे. और एसटीएफ अब रिपोर्ट हाईकोर्ट को करेगी. वो राज्य शासन को रिपोर्ट नहीं करेगी. तथ्यों के आधार पर कार्रवाई हुई लेकिन मैं ये निवेदन करना चाहूंगा कि अगर ये तथ्य भी गलत गया कि इतने लोग गिरफ्तार हैं. कुल मिलाकर दो हजार छ: को आस-पास आरोपी बने उनमें से 22 सौ पकड़े गए, उनमें से 18 सौ के आस-पास की जमानत हो गई जिनमें विद्यार्थी थे, उनके अभिवावक थे लेकिन जो मेन रैकेटियर या इस तरह के लोग थे वो जेल में हैं.

 

दिबांग- शिवराज जी कहीं ना कहीं जो छात्र हैं, निर्दोष छात्र हैं. उनका हिस्सा छूट जा रहा है, उनकी बात नहीं सुनाई दे रही है, उनकी तरफ आप मुखातिब नहीं दिखाई दे रहे हैं.

शिवराज- जो निर्दोष है, उसके खिलाफ कार्रवाई होने का सवाल ही पैदा नहीं होता. लेकिन जब एक जांच एजेंसी आपने तय कर दी तो उसने जांच की और जांच में जो भी तथ्य मिले उसके आधार पर कार्रवाई हुई. और मैंने वो संख्या भी आपको बताई.

दिबांग- इसी तरह का घोटाला हुआ हरियाणा में. चौटाला जी जो मुख्यमंत्री जेल में गए, बड़े अधिकारी जेल में गए. यहां बड़े पैमाने पर आप के राज्य में आत्महत्याएं हुई क्योंकि आप ने पाया कि यहां तो बहुत बड़े लोग शामिल हैं. आरएसएस और बीजेपी के बड़े-बड़े लोगों के नाम आ रहे हैं. तो आपने चेहरा घुमाया उन लोगों की तरफ जिन्होंने इक्जाम दिए थे. वहां परिवार टूटे, शादियां टूटी, लोगों ने आत्महत्याएं की तो एक तरफ आप ने उन पर असर कम करने के लिए इधर नजर मोड़ी. अगर मैं ऐसा कहूं तो गलत है क्या?

 

शिवराज- आप बिल्कुल गलत हैं. गलत इसलिए हैं आप क्योंकि आप कह रहे हैं किसी को बचाने के लिए. इसमें किसी को बचाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. सबसे पहले तो ये देखिए कि अगर किसी को बचाना होता तो जांच होती क्यों. जांच के लिए किसी ने कहा था क्या? वो तो जैसे मुझे पता चला कि पीएमटी की परिक्षा में पीएमटी परिक्षा में कुछ फर्जी छात्र बैठ रहे हैं. उन फर्जी छात्रों को पकड़ा गया. तो हमने कहा कि इनके पीछे कौन है? उनके पीछे के लोगों को पकड़ा गया तो पता चला कि ये लोग भर्ती परिक्षा तक पहुंच हैं. मेरे मित्र दिबांग जी जांच के लिए किसी ने मुझसे कहा नहीं था, ये जांच मैंने खुद करवाई थी. इसलिए ना तो किसी को फंसाया गया है और ना तो किसी को बचाया गया है. जो तथ्य थे उसके आधार पर कार्रवाई हुई है.

 

सवाल दिबांग-ये आप की बहन हैं, आपके राज्य से आती हैं. कह रही हैं कि मैं भयभीत रहती हूं लोगों में भय का वातावरण हैं आप कह रहे हैं मैं बहुत अच्छा काम कर रहा हूं. क्यों नहीं आप उनके पास जाते, बैठते, समझते कि गड़बड़ कहां हो रही है आप से.   

 

जवाब शिवराज- मैं आपको बताकर बैठूंगा क्या, जब जरुरत होती है तो रोज बैठता हूं.

दिबांग-  उसके बावजूद वो ऐसा कह रही हैं तो मामला गड़बड़ है उनकी बात सुनकर तो यही ध्वनि निकल रही है.

शिवराज- उनसे कई बार चर्चा हुई है. हमलोग साथ बैठे हैं और उन्होंने ने उसे सार्वजिनक रुप से व्यक्त किया है. और इसलिए अगर कोई गड़बड़ होती तो वो आप से भी कहती. ऐसी कहीं कोई बात नहीं हुई है आप उनसे बात कर लीजिएगा. उन्होंने ने कई बार ये स्पस्ट किया है कि एसटीएफ की ये जांच अच्छी हुई है, ट्रांसपैरेंट हुई है. उसकी तारीफ भी उन्होंने कई बार की है. उन्होंने पहले कहा था कि इसको सीबीआई को दिया जा सकता है अब सीबीआई को भी दे दिया गया.

 

सवाल प्रदीप-  आप ने पारदर्शिता की बात की कि आप 2005 में मुख्यमंत्री बने. 2007 में ये पता चल गया कि ये घोटाला बड़े पैमाने पर आर्गनाइज्ड घोटाला है. इसमें आपके कैबिनेट के सहयोगी शामिल हैं, आप के अधिकारी शामिल, आपके निजि सहायक शामिल तो ये किस तरह की पारदर्शिता है, कैसा सुशासन है कि मुख्यमंत्री को पता नहीं और इतना बड़ा घोटाला इस तरह से चलता रहा?

 

जवाब शिवराज- आपका ये कहना बिल्कुल गलत है कि आर्गनाइज घोटाला 2007 से चल रहा है. पहले जो गड़बड़ हुई पीएमटी की भर्ती परिक्षा में गड़बड़ हुई. और वो मुन्ना भाई टाइप की गड़बड़ हुई कि एक की जगह दूसरा बैठ गया. जब ये पता चला तो मुन्नाभाई टाइप के लोग 2007 में पकड़े गए. 9 में,11 में भी गिरफ्तार हुए. लेकिन होता ये था कि गिरफ्तारी होने के बाद वो जमानत पर छूट जाते थे. और जिनके बदले वो बैठते थे उनकी परिक्षा निरस्त हो जाती थी. 2013 में खुद मैंने ये फैसला किया कि केवल पीएमटी की परिक्षा में जो छात्र बैठते हैं केवल उनको नहीं, उनके पीछे कौन हैं इसको देखने की कोशिश होनी चाहिए. इस तरह की पीएमटी की परिक्षा में गड़बड़ी एक नहीं अनेकों प्रदेश में होती हैं.

 

सवाल प्रदीप- लेकिन आप के जो निजी लोग थे, कैबिनेट के सहायक वो ये काम कर रहे थे आप को खबर क्यों नहीं हुई?

शिवराज- मैं पूरी बात कर लूं कि पहले पीएमटी में ये फर्जीवाड़ा होता था. तब वो गिरफ्तार भी हुए हैं. अगर आप आंकड़े उठा कर देखेंगे कि विद्यार्थी पकड़े गए और पकड़ने के बाद कार्रवाई हुई. लेकिन भर्ती की परिक्षा में क्योंकि ये जो भर्ती की व्यवस्था बनाई थी. ये बनायी हमने 2007 में थी. इसके पहले तो खुला खेल फर्रुखाबादी था. और उसके बाद जब हमने इस गैंग को पकड़ा तब हमें पता चला कि 2012 में, 13में भर्ती परिक्षओं में भी गड़बड़ हुई है. और 2013 में हमने पकड़ लिया. ये तो मैं कहता हूं पूरे जिम्मेदारी के साथ कि व्यापमं की जांच पर मुझे अफसोस नहीं गर्व है कि जो उसमें पाये गए तथ्यों के आधार पर उन पर कार्रवाई की गई.

 

दिबांग- अगर ये आर्गनाइज नहीं होता तो आपके मंत्री एक जेल में हैं. सुदर्शन जी का नाम आ जाता है, सोनी जी का नाम आ जाता है, आरएसएस के बड़े लोगों के नाम आ जाते हैं. लगता है कि आपने कोई चोर दरवाजा खोल रखा था जहां से लोग नौकरी पा रहे थे. अचानक वहां धर-पकड़ हुई और आपको चोर दरवाजा बंद करना पड़ा.

 

शिवराज- ये आप न्याय नहीं कर रहे हैं मध्य प्रदेश के साथ चोर दरवाजे की बात करके. पहले तो कहीं दरवाजा ही नहीं था, मैंने दरवाजा बनाया और उसमें अगर सेंध लगाने की कोशिश हुई तो पकड़ा. और इसलिए इस बात का आज नहीं इतिहास कभी मुल्यांकल करेगा कि पकड़ने वाला कौन है, जांच करवाने वाला कौन है? आप ने जो कुछ नाम लिए हैं, बेमतलब के वो नाम लिए गए. कहीं किसी का कोई संबंध नहीं था. कहीं किसी का रिश्ता नहीं था और इसलिए मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जो इस तरह का कोई व्यक्ति सामने आया, उसके खिलाफ कार्रवाई हुई. और ये कार्रवाई करने का हमें गर्व है. नहीं तो ये चलता रहता. हमने जरा सी भी गड़बड़ हुई उसे पकड़ने का काम किया. तो जिसने जांच की वो अपराधी कैसे हो गया? जिसने जांच की उसे ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश क्यों हुई और ये कोशिश किसने की? उन्होंने कभी कोई नई व्यवस्था बनाई ही नहीं थी.

 

दिबांग- आरएसएस की तरफ से कोई भी सिफारिश नहीं की गई, क्या जो लोग अदालत में लिखित में बयान दे रहे हैं वो गलत है?

शिवराज- एसटीएफ ने पूरी जो जांच की है वो तथ्यों के आधार पर की है और उस जांच पर किसी को संदेह होने का सवाल नहीं है. ये शिवराज सिंह चौहान नहीं कह रहा. हाईकोर्ट ने ये कहा कि एसटीएफ ने जांच बहुत अच्छी की है. और अपने फैसले में कहा कि सीबीआई को देने की जरुरत नहीं है उससे गलत संदेश जाएगा. सुप्रीम कोर्ट लोग गए. सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि एसटीएफ ने जो जांच की है वो बहुत अच्छी हुई है. और इसलिए इसको सीबीआई को देने की जरुरत नहीं है. एसटीएफ ने जिनको माना कि तथ्य हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हो गई. अब राजनैतिक द्वेष के कारण किसी का भी नाम लेलो तो हर कोई अपराधी हो जाएगा क्या?

 

दिबांग- आपको ये कैसा लगता है कि आप के एक वरिष्ठ सहयोगी जो आरएसएस के इतने करीब थे. इस पर भी आप गर्व करते हैं?

शिवराज- मैं किसी के बारे में कुछ नहीं कहना चाहुंगा. मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि जो तथ्य मिले उसके आधार पर एसटीएफ ने कार्रवाई की. कोई बड़ा है छोटा ये नहीं देखा गया. किसी को बचाया नहीं गया, किसी को फंसाया नहीं गया.

 

सवाल दिबांग- ये आप कह रहे हैं कि पर्ची लिख कर देते थे, कौन लिख कर देते थे. ये आप हवाई आरोप लगा रहे हैं या आपके दिमाग में कोई नाम भी है.

 

जवाब शिवराज-मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ साथी यहां पर बैठे हुए हैं और वो भी ये जानते थे कि उस जमाने में भर्तियां कैसे होती थीं? पर्ची भी लिखी जाती थी, नोटशीट भी लिखी जाती थी कि समस्त नियमों को शिथिल कर के फलाने को सब इंजिनियर बना दिया जाए, फलाने को शिक्षक बना दिया जाए. संविधान किसी मुख्यमंत्री को इजाजत देता है कि सभी नियमों को शिथिल करो और नियुक्तियां दे दो. एक नहीं सैकड़ों नियुक्तियां दे दी गई. उसकी भी जांच चल रही है.

 

दिबांग- कौन से मुख्यमंत्री थे? क्यों आप नाम नहीं लेते, क्यों आप हिचकते हैं?

शिवराज- श्री दिग्विजय सिंह जी थे उस समय मुख्यमंत्री. उनकी पर्चियां आप को मिल जाएगी. नोटशीट घूम रही है, लगातार घूमा करती थी. समस्त नियमों को शिथिल कर के फलाने-फलाने जी को फलाना बना दिया जाए. उस समय ये अंधेर हुआ है. उस मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष जो दिग्विजय सिंह के समय में थे, उनको अधिकार था 6 महीने के लिए वो अस्थाई नियुक्ति कर सकते थे. अस्थाई नियुक्ति करते थे फिर दूसरे विभाग में समविलियन हो जाता था. और फिर उनकी नौकरी परमानेंट हो जाती थी. और धीरे-धीरे वो सचिव स्तर पर पहुंच गए. इसलिए तो मैं कह रहा हूं कि उस समय भर्ती की कोई प्रकिया ही नहीं थी. मुख्यमंत्री राजा हुआ करते थे, जो मर्जी में आए लिख दिया कि इसकी भर्ती कर दी जाए.

 

सवाल आलोक- पहले जो छवि बिहार और उत्तर प्रदेश की होती थी कि बड़ा भ्रष्ट है, नकल होती थी. मध्य प्रदेश में पिछले वर्षों में अगर व्यापमं से हटकर भी अगर बात करें बड़े पैमाने तक क्लर्क से लेकर सचिव और मंत्री के पास करोड़ों रुपया मिला मशीनें आप को लगानी पड़ी. तो क्या मध्य प्रदेश सबसे भ्रष्ट राज्य हो गया या ये छापे पड़े तो आप कहेंगे कि सबसे ईमानदार राज्य हो गया.

 

जवाब शिवराज- अगर कोई तकलीफ है तो यही है कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश बीमारू राज्य था, एमपी की हालत बहुत खराब थी, एमपी के विकास की तरफ किसी का ध्यान आ ही नहीं जा रहा है. उस पर भी अगर आप इजाजत देंगे तो मैं बोलना चाहूंगा. एपी में भ्रष्टाचार समाप्त हो इसके लिए हमने तीन कदम उठाए. नं.1 सबसे पहले हमने मध्य प्रदेश में लोक सेवा गारंटी अधिनियम बनाया और उसमें हमने तय किया कि हर एक व्यक्ति को जो सेवा चाहिए वो निश्चित समय सीमा में दी जाएगी. उसके लिए अफसर तय किये और अगर वो अधिकारी निश्चित समय सीमा में सेवा नहीं देगा तो उसपर जुर्माना लगेगा और वो जुर्माना हर्जाने के रुप में जिसका काम नहीं हुआ है उसको दिया जाएगा. कई अफसरों पर जुर्माना लगा, जिनका काम देर से हुआ उनको हर्जाने के रुप में दिया गया. जिसका बाद में कई राज्यों ने अनुशरण किया. नं2 पहले क्या होता था रैकेट बने रहते थे ठेकेदारों की और वो आपस में मिलकर अलग-अलग टेंडर डालते थे. हमने ई-टेंडरिंग, ई-पेयमेंट और ई-मेजरमेंट की व्यवस्था लागू की. अब एमपी में 2 लाख से भी कम के टेंडर भी ई-टेंडरिंग के माध्यम से होते हैं. उस सारे रैकेट को हमने तोड़ने का काम किया. फिर नं3 कि हमने मध्य प्रदेश में कानून बनाया कि आय से अधिक संपत्ति प्रथम दृष्टया अगर किसी के यहां पायी जाएगी तो उसके यहां छापा पड़ेगा और वो संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और सालों तक भ्रष्टाचार के मामले में कोई फैसला नहीं होता था, एक साल के अंदर फैसला हो जाएगा. एमपी में हमने लोकायुक्त कानून को ऐसा बनाया कि वो कहीं भी जाकर छापे मार सकते हैं.

 

आलोक- मैं ये जानना चाहता था कि समय रहते जो क्लर्क पैसा ले रहा था, जो अफसर पैसा ले रहा था तब क्यों नहीं कराया जब करोड़ों इकठ्ठा हो गया तब कराया?

शिवराज- आलोक जी ये आज का थोड़ी है कि आज ही कमा लिया. 10 साल-15 साल पुराना है. उसके बारे में सूचना मिली, लोकायुक्त ने छापे मारे, राजसाद की. राजसाद करके हमने अपने इंदौर में ही आंगनबाड़ी और स्कूल खोलने का काम हमने किया. अब देखो दो चीजें थी, या तो मारो ही मत दबा पड़ा रहने दो. इस बदनामी के डर से कि लोग क्या कहेंगे? मैं तो कहता हूं कि और कहीं मार कर देखो. दिल्ली में मार कर देखो यहां निकलेगा कि नहीं निकलेगा. मध्य प्रदेश की खूबी ये है कि वहां गड़बड़ थी तो कार्रवाई की और कार्रवाई करके गड़बड़ को बाहर उजागर करने का काम किया. और कार्रवाई करने के कारण अगर कोई ये कहता है कि मध्य प्रदेश भ्रष्ट है तो मुझे अफसोस नहीं है लेकिन मैं कोई गड़बड़ रहने नहीं दूंगा. भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हमारी लगातार जारी रहेगी.

 

सवाल अभिलाष- दस साल हो गए सरकार में आपको कि शिवराज के नाम से भ्रष्ट लोगों में कोई डर है क्या ? उज्जैन का चपरासी या खरगोन का या अरविंद जोशी या टीनू जोशी अफसर पकड़े जाते हैं. तो दस साल से आप लगातार काम कर रहे हैं, आपको सिस्टम मालूम है कि ब्यूरोक्रेसी कैसे काम कर रही है, पॉलिटिसियन कैसे काम कर रहे हैं. तो आपका मुख्यमंत्री के तौर पर कोई टेरर है क्या?

 

जवाब शिवराज- अभिलाष जी आप पूरे राज्य को अच्छे से जानते हैं और आप जानते हैं कि पहले मध्यप्रदेश में क्या होता था? गड़बड़ होती थी पकड़ी नहीं जाती थी. हमने तीनों तरह के काम किये.

 

अभिलाष- जैसे व्यापमं का ही मामला था तो आपका इंटलिजेंस का कुछ सिस्टम होगा गड़बड़ियां ऐसे रातो-रात तो हुई नहीं.

शिवराज- जब जानकारी मिली तभी तो कार्रवाई की. मैंने कहा ना कि जो भर्ती वाला मामला वो 12-13 में हुआ, इससे पहले पीएमटी में जरुर होती थी. पीएमटी में पूरे देश में मुन्ना भाई टाइप के लोग बैठते रहे हैं. लेकिन जहां भी गड़बड़ हुई हमने प्रभावी कार्रवाई की. हमने किसी को नहीं छोड़ा. जहां जरुरत पड़ी हमने कार्रवाई की.

 

अभिलाष- मध्य प्रदेश का जो इमेज परसेप्सन बन रहा है उससे आप कहीं व्यथित नहीं हैं. आप जो उसकी 28 परसेंट तक एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट को ले गए, काफी बीमारू के क्लब से बाहर लाए फिर भी आज मध्य प्रदेश का ऐसा हाल हुआ है.

शिवराज- मध्य प्रदेश की छवि आप देखेंगे तो आप इससे हट कर देखेंगे. मैं फिर कह रहा हूं कि जहां गड़बड़ है वहां कार्रवाई की. इतने बड़े राज्य के सिस्टम में कहीं कोई गड़बड़ नहीं होगी ये कोई राज्य नहीं कह सकता है. मैं केवल मध्य प्रदेश की बात नहीं कर रहा लेकिन मध्य प्रदेश ऐसा राज्य है जो आगे बढ़ कर उस गड़बड़ को पकड़ा और उसके कारण अगर किसी ने कहा कि देखो गड़बड़ होती है तो मैं नहीं मानता कि मुझे कोई अफसोस होना चाहिए. यह कार्रवाई हम आगे भी लगातार जारी रखेंगे. लेकिन दूसरी तरफ वो मध्य प्रदेश जो पहले तबाह और बर्बाद कर दिया गया था. क्या बचा था मध्य प्रदेश में? वहां सड़कें नहीं थीं, तीन-तीन, चार-चार घंटे बिजली नहीं मिलती थी, पानी नहीं था. आज मध्य प्रदेश ऐसा राज्य है जहां 24/7 बिजली, पानी हम दे रहे हैं. 4 हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता नहीं थी आज हमारे 14 हजार 4 सौ मेगावाट बिजली हमारे पास है. साढे 7 लाख हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती थी दिबांग जी. कांग्रेस, राजा, नवाब सबकी मिलाकर और अकेल 10 साल में हमने उसे बढ़ाकर 36 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दिया और 3 साल में 50 लाख हेक्टेयर तक ले जाएंगे.

 

सवाल दिबांग- जो ये हैंडलिंग हुई वो बहुत खराब हुई. आप आते ही नहीं प्रेस के सामने, अब आप आना शुरु हुए हैं. वरना बाबू लाल गौड़ जी कहा कि जो आया है वो जाएगा. लोग मर रहे हैं आप के नेता ऐसे बोल रहे हैं. कैलाश विजयवर्गीय जो हमारे संवादाता मारे गए उनके बारे में कहा कि मुझसे बड़ा कोई पत्रकार है कौन है. ये तो अंसवेदनशील बाते हैं.

जवाब शिवराज- उन्होंने अपने स्थिति को स्पष्ट किया था, इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहूंगा.

 

दिबांग- आप ने ये सब बातें सूनी. आप कहां छूपे थे आप क्यों नहीं आए सामने?

शिवराज- मैं तीन दिन बाद जिस भी चैनल ने कहा बात करो मैंने की.

सवाल – क्या इस पूरे घोटाले से आपकी छवि पर असर पड़ा है?

जवाब शिवराज- देखिए जो सच होता है वो सच होता है. सच के सूरज को असत्य के बादल लंबे समय तक ढांक कर नहीं रख सकते. जो चीज है वो सामने आती है तो भ्रम का निवारण हो जाता है लेकिन मुझे बड़ी तकलीफ ये है कि मध्य प्रदेश की छवि जो खराब करने की कोशिश की गई है. वो मध्य प्रदेश जहां हमने सड़कों का जाल बिछाया, उसकी विकास की आप बात करें तो सात साल से लगातार डबल डीजिट में विकास दर बनी हुई है. दो साल से हम विकास दर के मामले में नं.1 हैं हिंदूस्तान में. एग्रीकल्चर के मामले में हिंदूस्तान ही नहीं दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है. 18 परसेंट 20 परसेंट 24 परसेंट की विकास दर हम हाशिल करने का काम कर रहे हैं. तो उस मध्य प्रदेश के बारे में चित्र केवल ये जाए तो ठीक नहीं है. मैं निवेदन करना चाहूंगा. मध्य प्रदेश आज सबसे तेज गति से बढ़ने वाला राज्य है.

 

सवाल अशोक वानखेडे- एक जमाना था कि मध्य प्रदेश में पांच साल में पांच चीफ मिनिस्टर थे फिर दिग्विजय जी ने 10 साल स्थिर सरकार दी और आपने भी 10 दिए और आगे भी आप सरकार में हैं और जिस हिसाब से मिजॉरटी है आप स्थिर सरकार देंगे. दो मुख्यमंत्रियों के स्थिर सरकार देने के बाद जो विकास मध्य प्रदेश का होना चाहिए वो नहीं हुआ. आप को लगता है कि विकास बहुत हुआ है तो क्या आप नं1 स्टेट हो गए हैं . खुश हैं इस विकास से क्योंकि जिस रोड की बात आप कर रहे हैं, भोपाल और इंदौर के बीच बसें चलना बंद हो गई. ये रोड की स्थिति है. बिजली की बात भले करते हों लेकिन आज भी कई ऐसे गांव हैं जहां बिजली का संकट है. ये एक्सेप्ट करना पड़ेगा आपको. जब आप के पास पैदावार ज्यादा हो गई तो भंडारण की प्राब्लम हो गई तो ये सारी दिक्कतें स्थिर सरकार होने बाद भी क्यों नहीं हो पायी.

 

जवाब शिवराज- मध्य प्रदेश की जो हालत 10 सालों में हुई जब श्रीमान दिग्विजय सिंह जी मुख्यमंत्री हुआ करते थे वहां के सड़क, बिजली, पानी कुछ था ही नहीं वहां पर. मध्य प्रदेश ऐसा राज्य था कि डामर सड़क पहले गिट्टी सड़क हुई फिर गिट्टी सड़क मिट्टी सड़क हो गई. पिछे जा रहे थे हम विकास दर का हाल ये था कि एग्रीकल्चर ग्रोथ के मामले में माइनस में थे, प्लस का तो सवाल ही नहीं था. उस मध्य प्रदेश में अगर आप 10 साल में देखेंगे तो मैं निवेदन किया कि हमारी ग्रोथ रेट डबल डीजिट में बनी रही. देश के ग्रोथ से लगभग हमने दुगनी हासिल की. आप अभी सिंचाई की बात करें तो नर्मदा और क्षिप्रा को जोड़ने से लेकर हमने 36 लाख हेक्टेयर जमीन में शिकायत करके दिखायी. आप भंडारण की बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश का जो हमार वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन है वो एफसीआई के बाद दूसरे नम्बर पर है जिसने इतना भंडारण करने का काम किया है. आप सड़कों की बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के स्टेट हाईवे पर कहीं से कहीं चले जाइए इंदौर हो भोपाल हो. भोपाल से सागर हो कहीं भी जले जाइए, शानदार सड़कें हमने बनाने का काम किया है. हमने बिजली 14 हजार 4 सौ मेगावाट तक उत्पादन का काम किया है और 18 हजार तक हम तीन साल में पहुंच जाएंगे. और इन्वेस्टमेंट की दृष्टि से देखें तो अभी 1 लाख 15 हजार करोड़ का निवेश अभी आया है. टीसीएस, इंफोसिस, नरसिंमुंजी और सिंमब्यायसिस मध्य प्रदेश में आ रही है.

 

अशोक वानखेड़े-  मेरा सवाल ये है कि क्या आप इस विकास से खुश हैं?

शिवराज- मैं ये कहना चाहूंगा कि जितने गढ्ढे कांग्रेस की सरकार मध्य प्रदेश में कर के गई थी. उनको भर के हम तेजी से आगे बढ़े हैं और ये मैं नहीं कहता जमाना कहता है. तीन-तीन बार कृषि कर्मण पुरस्कार हमने हासिल किया है. मैं कहना चाहूंगा कि मध्य प्रदेश के बच्चों को बदनाम ना करें. अभी आईआईटी की परिक्षा हुई नम्बर एक, दो, तीन पर मध्य प्रदेश के बेटा-बेटी. यूपीएसी की परिक्षा वो तो हम नहीं करा रहे हैं, उसमें मध्य प्रदेश के बच्चे सलेक्ट हो रहे हैं. क्लैट के इक्जाम, एनआईटी में एमपी के बच्चे सलेक्ट हो रहे हैं. मध्य प्रदेश में सब गड़बड़ हो गया कहीं कुछ ठीक नहीं है ऐसी स्थिति नहीं है. आप शिक्षा के मामले में देख लीजिए, स्वास्थ्य के मामले में देख लीजिए. मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में डाकुओं का आतंक होता था. शाम को कोई घर से बाहर नहीं निकलता था. डाकू सारे मार दिए गए या जेलों में पहुंच गए. आज एक भी सूचिबद्ध डाकुओं का गिरोग नहीं है. नक्सलवाद को पूरी तरह से कंट्रोल करने का काम किया है. ऑर्गनाइज क्राइम मध्य प्रदेश में नहीं होते, मैं ये नहीं कहता की छुट-पुट अपराध नहीं होते. मध्य प्रदेश की खूबियां भी देखिए. कांग्रेस ने ऐसी छवि बनाने की कोशिश की जैसे सब गड़बड़ हो गया.

 

सवाल दिबांग- आप मध्य प्रदेश में एक तरह से आरएसएस का एजेंडा कैसे चला देते हैं? बच्चों से सूर्य नमस्कार करवा दिया. आदिवासी इलाको में बच्चों से कहा अण्डे नहीं खाने चाहिए. क्या ये बाते सही हैं?

 

जवाब शिवराज- कोई एजेंडा है तो विकास का एजेंडा है, जनकल्याण का एजेंडा है. विकास के मापदंड पर मध्य प्रदेश को माप लीजिए. मैं ये कह सकता हूं कि जितना बेहतर काम पिछले 10 सालों में हुआ है उसके पहले कभी नहीं हुआ. और जहां तक संघ की बात करते हैं तो हां मैं संघ का स्वयं सेवक हूं. हमें गर्व है उस पर. उसका सवाल नहीं है. लेकिन कोई एजेंडा थोड़ी है, एजेंडा केवल जनकल्याण का है. और आदिवासी लोगों की बात कि तो उस पर मैं कहूंगा कि अभी जो आईआईटी की परिक्षा हुई उसमें मध्य प्रदेश के बेटा-बेटी सलेक्ट हुए हैं. अभी मैंने उन्हें सीएम हाउस में सम्मानित किया है. बेगा जाति जो विलुप्त होने के कगार पर थी, उस बेगा जाति के बेटा-बेटी मध्य प्रदेश के आईआईटी में सलेक्ट हो रहे हैं. और वो सरकारी स्कूलों के बच्चे हैं, जिनको हमने सरकारी कोचिंग देने का काम किया है.

 

सवाल नेस्तुला हैबर-आप ने पुरानी कांग्रेस सरकार के बारे में कहा कि उन्होंने कोई व्यवस्था नहीं की लेकिन आप पर आरोप लगाया है. पर प्रधानमंत्री ने समय दिया इन लोगों को मिलने के लिए, मार्च में दिग्विजय सिंह जी गए थे मिलने. क्या आप पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से खुश हैं कि उन्होंने आप का साथ दिया?

जवाब शिवराज- देखिए प्रधानमंत्री जी का ये बड़प्पन है कि वो किसी भी राजनैतिक दल का नेता हो मिलना चाहे तो उसको समय देते हैं. ये प्रधानमंत्री जी का बड़प्पन है और इसलिए मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री जी ने बिल्कुल ठीक किया. जहां तक सवाल है कि प्रधानमंत्री जी के पास क्यों गए थे. वो बोले जो एक्सेल सीट निकली थी उसमें 48 जगह मुख्यमंत्री लिखा था उसको काट कर गवर्नर, मिनिस्टर लिख दिया. मैंने खुद एसआईटी से निवेदन किया कि इसकी जांच करो. जांच में पाया गया और हाईकोर्ट ने कहा कि जितने भी दस्तावेज पाये गये वो कूट रचित थे और जांच को भटकाने के लिए किए गए थे. जहां तक आपने सपोर्ट की बात की तो मैं भारतीय जनता पार्टी का साधारण कार्यकर्ता हूं. तीसरी बार इस पार्टी ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया है तो मैं गर्व के साथ ये कहता हूं कि पूरी पार्टी एकजुट है और हम सब लोग साथ खड़े हैं.

 

दिबांग– शिवराज जी आपने भी तो नहले पर दहला मारा आप ने भी 10 जनपथ सोनिया जी को चिट्ठी लिखी, मैं जानना चाहूंगा कि समय मिल रहा है कि नहीं क्या लिखा आपने

 

शिवराज- मैंने मैडम से निवेदन किया था चिट्ठी लिख कर कि आप के नेता जमीन पर तो हमें हरा नहीं पाते, झूठे आरोप लगाकर छवि खंडित करने का काम करते हैं. मैंने समय मांगा उन्होंने अभी तक समय नहीं दिया.

दिबांग- मैं ये जानना चाहूंगा कि आप के पार्टी के जो बड़े नेता हैं, पार्टी अध्यक्ष, प्रधानमंत्री जी से मुलाकात होती है, वो आपको समय दे रहे हैं.

 

शिवराज-   हम तो लगातार मिलते रहते हैं, लगभग 15 दिन में 1 बार मेरी प्रधानमंत्री जी से भेंट होती है. अलग-अलग मुद्दों पर भेंट होती है. आपकी जानकारी में होगा जो प्रमुख सब ग्रुप बनाया नीति आयोग का. उसका मुझे चेयरमैन बनाया. मुझे प्रमुख जवाबदारी ये सौंपी सेंट्रल स्पांसर्ड स्कीम में फंडिग पैटर्न क्या होना चाहिए. एक नहीं ऐसी अनेको जवाबदारियां हमको सौंपते हैं.

सवाल गिरिजाशंकर-यूपीए सरकार के दौरान आपने आपने चुनाव सुधार को लेकर, फसल बीमा को लेकर उसकी गड़बड़ी को सुधारने की बात बड़े जोर-शोर से की थी. अब सरकार दिल्ली में भी आप की है और राज्य में भी आप की है. इन मुद्दों पर आप क्या कर रहे हैं.  

 

जवाब शिवराज-  मुझे ये खुशी है कि चुनाव सुधार के बारे में पहले भी लगातार बोलता रहा हूं. अब प्रधानमंत्री जी सजग हैं और प्रधानमंत्री जी ने ये प्रयास प्रारंभ किए हैं कि लगातार होने वाले चुनाव, ये कुल मिलाकर देश में विकास को अवरुद्ध करते हैं. इसलिए वो कंसेसेस बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि सब राजनैतिक दलों में अगर सहमति बन जाए तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हो जाए. सब चुनाव एक साथ होंगे तो विकास भी अवरुद्ध नहीं होगा और धन का अव्यय भी रुकेगा और व्यवस्था को हम और ठीक बना पाएंगे.

 

फसल बीमा योजना के बारे में मैं जरूर कहना चाहूंगा कि केन्द्र सरकार भी विचार कर रही है पूरी गंभीरता के साथ कि देश में अगर किसानों को बचाना है तो तीन योजनाएं बनानी पड़ेगी. एक- उत्पादन की लागत कम करनी पड़ेगी, दूसरा-उत्पादन के ठीक दाम देने पड़ेंगे, और तीसरा अगर किसान की फसलों का नुकसान हो जाए तो उसकी भरपाई करनी पड़ेगी. और वो भरपाई हो सकती है अच्छी फसल बीमा योजना से. पुरानी सरकारों ने जो फसल बीमा योजना चलायी वो बहुत डिफेक्टिव थी. वो किसान के लिए,वस्तुत: बीमा कंपनियों के लिए थी. नई फसल बीमा योजना के लिए हमने मध्य प्रदेश में हमने एक कार्यशाला बुलायी थी जिसमें देश के ही नहीं दुनिया के लोगों को हमने बुलाया था. मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि फसल बीमा योजना ऐसी हो जिसमें बीमा कंपनियों का कोई काम ही ना हो. क्योंकि बीमा कंपनी मुनाफा कमाने आएगी. इसलिए किसान कल्याण कोष जैसी रचना करके  हम ये तय कर दें कि 50 परसेंट से ज्यादा नुकसान अगर किसान का होगा तो 30 हजार प्रति हेक्टेयर की दर से उसको फसल बीमा योजना का पैसा दे देंगे. उसके नुकसान की अगर पूरी भरपाई हो जाएगी तो वो आत्महत्या नहीं करेगा,वो जिंदगी से निराश नहीं होगा. इसलिए मध्य प्रदेश सरकार इसपर गंभीरता से विचार कर रही है. केंद्र की अनुमति लेकर हम जल्द ही नयी फसल बीमा योजना लाने वाले हैं.

 

दिबांग- आपको लगता है कि राज्य में जाने का एक रास्ता दिल्ली से भी है, जैसे आप आए थे पहले दिल्ली आओ फिर राज्य में जाओ क्या ये डर है आपको कहीं?

शिवराज- देखिए शिवराज सिंह चौहान को डर नाम की चीज कभी नहीं होती, पता नहीं डर आप के मन में कैसे बैठ गया? मैं कभी किसी से नहीं डरता लेकिन मैं विनम्र कार्यकर्ता हूं भारतीय जनता पार्टी का, राजनीति मेंरा शौक नहीं है, धंधा नहीं है, राजनीति को मैंने धर्म के रुम में स्वीकार किया है. राजनैतिक कार्यकर्ता के नाते मैं जो भी अपनी जिंदगी का योगदान अपने प्रदेश की बेहतरी में दे सकता हूं, सेवा में दे सकता हूं वो मैं करने की कोशिश कर रहा हूं. इसलिए डर का कहां सवाल है हम तो विकास में लगे हैं.

 

सवाल- बहुत सारे पुराने घोटाले अब सामने आ रहे हैं. जैसे विधानसभा का खुद आपने जिक्र किया कि वहां पर गलत तरीके से वहां नियुक्तियां हुई थी. वो अब सामने आया उस पर पुलिस केस हुआ, सरला मिश्रा कांड अब सामने आ रहा है, सत्यू कटारे जो ऑपोजिशने के लीडर हैं उनके पैन कार्ड अब निकलकर सामने आ रहे हैं. तो जो आपके विरोधी हैं वो इसको आपके छवि के विपरीत मान रहे हैं कि आप तो ऐसा करते नहीं है. आप बदले की राजनीति कर रहे हैं और आप के जो समर्थक हैं वो कह रहे हैं कि बस ये संयोग है तो हम लोग बतौर पत्रकार इसको कैसे देखें इन घटनाओं को. 

 

जवाब शिवराज- सरला जी वाला जो मामला था, उनके दोनों भाई इसके पहले भी मिले. उन लोगों ने ज्ञापन सौंपे, हम लोगों ने ज्ञापन लिए. कोई पहली बार नहीं मिले. ये संयोग था कि मैं विधान सभा जा रहा था तो उन्होंने मुझे रोका और बहुत आग्रहपूर्वक पांव पकड़ के निचे बैठ गए. मुझे कहा कि इसकी आप सीबीआई जांच करवाएं. मैं बड़ी मुश्किल से उन्हें साथ ले गया और कहा कि हम इसका परिक्षण करवाएंगे ये तो आंनद जी आप जानते हैं. ये लगातार सत्तनवे से ये मामला बीच-बीच में उठता रहा है. तो हमने कहा देखते हैं कि इसमें क्या तथ्य है फिर परिक्षण करके देखेंगे इसको. हमारे एक कार्यकर्ता हैं जो नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ लड़े थे वो कुछ तथ्य निकाल कर लाए और उन्होंने बकायदा प्रमाणिकता के साथ प्रेस कांफ्रेस में प्रस्तुत किया. तो ये संयोग भी हो सकता है और तथ्य भी हो सकते हैं. मैंने कभी भी प्रतिशोध की राजनीति नहीं की. हमने ये कहा पुलिस को 17-18 साल हो गए इसका परिक्षण करके देखिए कैसा मामला बनता है.

 

सवाल निमिश- मेरा छोटा सा सवाल ये है कि आप पिछले दस साल में आप लगातार इनवेस्टर सम्मिट करते हैं. आप मध्य प्रदेश में करते हैं आप मुंबई, दिल्ली आते हैं, विदेशों तक में जाते हैं. सबको कहते हैं कि आप मध्य प्रदेश आइए, बड़ी कंपनियां नहीं आती. कुछ एक-दो बड़ी कंपनियां आती हैं वो अच्छी घोषणाएं करती है लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं होता है. आप ही के पड़ोस में आप ही के साथी रहे हैं जो अब प्रधानमंत्री हैं देश के, वो भी सम्मिट करते थे, उनके पास इनवेस्मेंट आता था. आपका पड़ोसी इस मामले में बहुत सफल होता है लेकिन आप पिछड़ रहे हैं. क्या आप को लगता है कि अब ब्यूरोक्रेसी से थोड़ा सा ध्यान हटा कर युवाओं की टास्कफोर्स बनाएं और इसको प्रोफेसनल तरीके से करें.

 

जवाब शिवराज-  मैं दो चीजें केवल आप से कहना चाहूंगा. एक तो ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश में इन्वेसमेंट नहीं आया है. 1 लाख 15 हजार करोड़ का इन्वेसमेंट जमीन पर उतर गया है,उत्पादन प्रारंभ हो गए हैं. एशिया का सबसे बड़ा सोलर पावर प्लांट नीमज में शुरु हो गया है. कई टेक्सटाइल इंडस्ट्री पंजाब से मध्य प्रदेश आए हैं. टीसीएस, इंफोसिस के कैंपस इंदौर में बनाने का काम हो रहा है. दवाईयों के निर्माण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश काफी आगे है. ये गलत है कि निवेश नहीं आया है. मध्य प्रदेश में निवेश तेजी से आ रहा है. नम्बर दो मध्य प्रदेश के नौजवान उद्यमी बने हैं. हमने मुख्यमंत्री उद्यमी युवा योजना शुरु किया है और उसमें यह तय किया है कि मध्य प्रदेश के बेटा-बेटी जो मध्य प्रदेश में इंड्रस्टी लगाना चाहें तो उनको 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक लोन बैंक देगी और बैंक को लोन वापस करने की गारंटी सरकार लेगी. और 7 साल तक इंट्रेस्ट सब्सिडि भी देंगे. ऐसा नहीं है कि इंड्रस्टी नहीं आ रही हैं,आ रही हैं लेकिन और प्रयास की जरुरत अभी है.

 

सवाल राजीव रंजन- पिछले दिनों जो आंकडे आए है उनके अनुसार मध्य प्रदेश के लगभग 60 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार हैं तो ऐसे में जब बच्चों का भविष्य ही नहीं सुरक्षित है तो आपके विकास के दावे कितना मायने रखते हैं.

जवाब शिवराज- मैंने जो बातें कही वो तथ्यों के आधार पर कही और मध्य प्रदेश में अगर कृषि की बात करें तो लगभग चार साल में दोगुना हो गया. 2003-04 तक प्रति व्यक्ति आय 13 हजार रुपए थी अब वो बढ़ कर लगभग 59 हजार रुपए के बराबर हो गई है. हम लोगों ने कुपोषण दूर करने के लिए आंगनबाड़ी में दूध देने की योजना शुरू की. IMR,MMR अगर आप देखेंगे तो उसमें तेज गिरावट दर्ज की गयी है तो लगभग सभी सेक्टर में काम हो रहा है. और सभी पैमाने अगर आप देखेंगे तो मध्य प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है.

 

सवाल –जिसको ग्राउंड पर कहते हैं ना कि शहर बढ़े, कोई और उद्योग आए तो जमीन पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. अर्जुन सिंह जी ने जो इंड्रलाइजेशन किया था 1984 में जिसके कारण काइनेटिक, होंडा उसके बाद ऑप्टिक फाइबर में, ना किसी एरिया में एमपी में कोई काम नहीं हुआ आपको क्या लगता है, इसका कारण क्या है?

जवाब शिवराज– ऑप्टिक फाइबर का जाल पूरे मध्य प्रदेश में फैला हुआ है. मध्य प्रदेश में तीन-तीन टेक्सटाइल यूनिट आयी हैं, पावर प्लांट मध्य प्रदेश में आए हैं. आईटी सेक्टर में आए हैं, सिमेंट फैक्ट्री आयी हैं. एक नहीं अनेको क्षेत्रों में कोरी बात थोड़ी ही कर रहा हूं. हमने 27 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का काम किया है. छोटे-छोटे शहरों में लघु और कुटिर उद्योगों का जाल बिछ रहा है. लगभग 2 लाख यूनिट लघु और कुटिर उद्योगों की लगी है.

 

दिबांग- अगर ये बात आप की सही है तो गुजरात कैसे आप से आगे निकल जाता है?

शिवराज- गुजरात तो बहुत आगे है ही. गुजरात ऐतिहासिक रुप से गुजरात विकसित प्रांत रहा है और दूसरी बात की जो प्लांट समुद्र के पास रहे हैं उनके पास एक अलग एडवांटेज रहता है. हम तो लैंड लॉक्ड प्रदेश हैं लेकिन हमने उसको अपनी ताकत बनाने की कोशिश की है.

दिबांग- जो आडवानी जी ने कहा कि गुजरात की अपेक्षा एक बीमारु राज्य को खड़ा करना ज्यादा चुनौतीपूर्ण है आप सहमत हैं इससे.

शिवराज- गुजरात की अपनी विशेषता है और नरेंद्र मोदी जी जैसा कल्पक नेतृत्व गुजरात को मिला. कल्पनाशील मस्तिष्क के वो धनी हैं और आइडियाज उनके पास इतने हैं कि मैं बेजोड़ उनको कह सकता हूं. निसंदेह गुजरात को आगे बढ़ाने में उनका योगदान जबरदस्त है लेकिन मध्य प्रदेश एक बीमारु राज्य जिसके पास कुछ था ही नहीं उसको वहां से उठाकर यहां तक लाना अपने आप में एक उपलब्धी है. मैं मानता हूं जो प्रयास किये जा सकते थे वो मैंने किये इसलिए हम संतुष्ट हैं. लेकिन विकास और होना है, आगे और बढ़ना है. उसके लिए हम लगातार प्रयास करते रहेंगे. परिश्रम की पराकाष्ठा और प्रयत्नों की परिसीमा करेंगे.

 

दिबांग- आडवानी जी ने जो बात कही उसके साथ और भी कई बातें कही गयी. अखबारों में तो यहां तक छपा कि अगले प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार शिवराज जी होंगे, उन्होंने ये-ये काम किए हैं तो उन बातों का असर आपके जीवन पर कुछ पड़ा

 

शिवराज-श्रीमान नरेंद्र मोदी जी और शिवराज सिंह चौहान में बहुत अंतर है. मोदी जी वैश्विक नेता हैं उनकी तुलना और किसी से नहीं की जा सकती है. हमने और हमारी पार्टी ने कभी ये नहीं सोचा कि उनके अलांवा कोई दूसरी लीडरशिप हो सकती है. और इसलिए आप इस तुलना को मत कीजिए. मोदी जी बेजोड़ हैं और उनके नेतृत्व में हम सब काम कर रहे हैं.

सवाल प्रदीप- इस समय बीजेपी के तीन बड़े नेता संकट में हैं, विवाद में हैं-शिवराज सिंह चौहान, सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे सिंधिया क्या ये सिर्फ इत्तेफाक की बात कि ये किसी ना किसी समय मोदी विरोधी थे?

 

जवाब शिवराज– कोई सवाल ही नहीं है हम सब मोदी जी के साथ हैं. ये कयास केवल लगाए जाते हैं. मैं पूरे गर्व के साथ ये कह सकता हूं कि मोदी जी प्रधानमंत्री के नाते, अमित शाह जी पार्टी अध्यक्ष के नाते हम सब लोग एक टीम की तरह साथ खड़े हैं.

सवाल दिबांग- जिस तरह की बातें सोशल मीडिया में कही जा रही है आप के नाम पर चुटकुले बनाए जा रहे हैं. आप का नाम भी लोगों ने बदल दिया है शिवराज की जगह शवराज बोलते हैं कैसा आप महसूस करते हैं?

जवाब शिवराज- केवल एक ही चीज मेरे मन को चुभती है जिसको मैं साफ करके ही दम लूंगा वो ये कि मध्य प्रदेश के बारे में गलत परसेप्सन बनाने की कोशिश की है. शवराज मध्य प्रदेश को कहेंगे क्या? मुझे तो इसलिए फर्क नहीं पड़ता कि सच तो सच है अगर आज भ्रम का कोहरा है तो कल सारी चीजें साफ हो जाएगी. जो चीज नहीं हैं उसे कोई बनाकर नहीं रख सकता ना राजनैतिक विरोधी और क्षमा कीजिएगा कि केवल आरोप के आधार पर बिना तथ्य के  कोई समाचार आएगा तो उसके कारण भी भ्रम फैलेगा. मेरा पूरा विश्वास है कि मीडिया ही इस भ्रम को साफ करेगा. इसलिए मुझे कोई चिंता नहीं है.

 

सवाल राशिद किदवई- आपको नहीं लगता कि बेहतर होता 2013 में ही सीबीआई जांच करा देते क्योंकि कुछ मामलों शैला मसूद मामले में,डागा वाले मामले में सब में आप ने सीबीआई की जांच के तुरंत आदेश दिया तो इसमें एक तरीके की हिचकिचाहट क्यों रही.

प्रेस कॉन्फ्रेस में शिवराज सिंह चौहान 

जवाब शिवराज- इस मामले में हिचकिचाहट नहीं रही, जब हमने जांच शुरु की और लोग पकड़े गए तो हम जांच से संतुष्ट थे. चुकि कुछ मित्र हमारे हाईकोर्ट गए तो हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है. अब हमारा अपने देश की न्याय व्यवस्था में पूरा विश्वास है तो हम अपने मन से कहते कि सीबीआई जांच करो तो उनपर अविश्वास भी होता और एक तरह से अवमानना भी होती. इसलिए उस समय हमने सीबीआई को जांच हमने नहीं दी. ये बात सच है कि उस समय भी सीबीआई को जांच दी जा सकती थी. लेकिन जब लगा कि ये जरुरी है तो मैंने कोर्ट से प्रार्थना की कि अब ये जांच सीबीआई से कराई जाए और सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि हम स्टेट गवर्नमेंट के स्टैंड को हम एप्रीशिएट करते हैं और उनके आग्रह पर ये जांच सीबीआई को देते हैं.

 

सवाल आलोक- जैसे अटल जी, आडवानी जी ने आप जैसे कई नेताओं को तैयार किया जो प्रधानमंत्री पद के योग्य हो सकते हैं, उम्मीदवार न भी हों तो क्या आप अपना कोई ऐसा नेता दूसरी पंक्ति का तैयार किया या वहां ऐसे भ्रष्ट निकम्में लोगों को रखा है जिसकी वजह से छवि खराब हुई और अब भी वो आप के खिलाफ बोलते हैं, बूढ़े हो गए हैं, कुछ भी हो गए हैं लेकिन आप सबको पाले हुए हैं ताकि कोई उत्तराधिकारी ना दिखायी दे.

 

जवाब शिवराज- नहीं-नहीं मध्य प्रदेश में बहुत संभावनाओं वाले नेता है. हमारी बाद वाली पीढ़ी में भी हैं. अनेकों नौजवान नेता ऐसे हैं जो बहुत कुशल हैं, योग्य हैं, मेहनत से काम कर रहे हैं और अपना स्थान बनाने का काम कर रहे हैं. मैं निश्चिंत हूं कि प्रदेश में एक नहीं एक से अधिक व्यक्ति होंगे जो प्रदेश को संभाल सकते हैं.

 

रैपिड फायर राउंड

सवाल दिबांग- आप बेहतर प्रधानमंत्री किसको मानते हैं अटल विहारी बाजपेयी या नरेंद्र मोदी ?

जवाब- अटल जी हमारे मार्गदर्शक हैं इन्क्लूडिंग नरेंद्र भाई और वो आज भी अटल जी से मिलने जाते हैं लेकिन नरेंद्र भाई ने जो काम किया वो वैश्विक लीडर के रुप में उभरे हैं. जब अटल जी थे तब बेहतर थे और आज नरेंद्र भाई बहुत बेहतर काम कर रहे हैं और उस काम के कारण उनका नेतृत्व पूरी दुनिया में निखरा है.

सवाल दिबांग-  आपके अनुसार अच्छा भजन कौन गाता है शिवराज सिंह चौहान या कैलाश विजयवर्गीय ?

जवाब- अनूप जलौटा.. नहीं भजन तो कैलाश विजयवर्गीय अच्छा गाते हैं.

सवाल दिबांग- आप अगला राष्ट्रपति किसे देखना चाहेंगे- लालकृष्ण आडवानी या मुरली मनोहर जोशी?

जवाब- इसका जवाब तो मैं नहीं दूंगा. पार्टी तय करेगी.

सवाल दिबांग- आप प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार कब बनेंगे- 2019 या 2024?

जवाब- कभी नहीं सवाल ही पैदा नहीं होता.

सवाल दिबांग- आप के जितने भी राजनैतिक विरोधी हैं उनमें आप किसको ज्यादा सक्षम मानते हैं- दिग्विजय सिंह या ज्योतिरादित्य सिंधिया?

जवाब- मैं तो इनको विरोधी नहीं मानता ये तो मित्र हैं. निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटि छवाय, बिन पानी साबुन करे, निर्मल करे सुभाय.

दिबांग- इनमें आप परम मित्र किसको मानते हैं

जवाब- दिग्विजय सिंह तो परम मित्र हैं ही हमारे शुरु से.

सवाल दिबांग– आप निजी तौर पर किससे ज्यादा परेशान रहते हैं- डंपर घोटाला या व्यापमं घोटाला?

जवाब- डंपर की पूरी सच्चाई आप को पता है आरोप लगा और गलत सिद्ध हो गया और ये भी गलत है लेकिन मैं व्यापमं के मामले में ये कहना चाहता हूं कि इसके कारण प्रदेश की जो इमेज खराब हुई है, उसने मुझे बहुत आहत किया है. इसलिए मैं मानता हूं कि इसके कारण प्रदेश की छवि खराब हुई है और मैं कटिबद्ध हूं कि सारी चीजें मैं देश के सामने साफ करुं.

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