क्या इस तरह की उत्पाती सेनाओं को बैन कर देना चाहिए?

By: | Last Updated: Wednesday, 28 October 2015 3:22 PM
should government ban these hindu organization?

नई दिल्ली: केरल हाउस में बीफ के नाम पर कथित तौर पर गोमांस परोसने की शिकायत करने वाले हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता को शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं विश्व हिंदू परिषद ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग करते हुए हिंदू सेना और राम सेना जैसे संगठनों पर मोदी सरकार की छवि खराब करने का आरोप लगाया है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह की उत्पाती सेनाओं को बैन कर देना चाहिए?

 

हिंदू सेना का अध्यक्ष विष्णु गुप्ता गिरफ्तार हो चुका है. लेकिन हंगामा खड़ा करना उसकी पुरानी आदत रही है. सुर्खियां बटोरने के लिए ना तो इसे मारपीट से परहेज है और कानून हाथ में लेने से. आइए आपको दिखाते हैं कि कौन है ये विष्णु शर्मा और क्या है उसकी हिंदू सेना?

 

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दिल्ली की हिंदू सेना कभी स्याही तो कभी मारपीट. अपने को हिंदुओं की हितैषी बताने वाली ये सेना कई मुद्दों पर विवाद खड़ा कर चुकी है. इस कथित हिंदू सेना के अध्यक्ष हैं विष्णु गुप्ता. विष्णु गुप्ता पर कई केस भी दर्ज हो चुके हैं लेकिन इन सबके बाद भी नफरत फ़ैलाने वाले अपने कामों को गर्व से बताते हैं विष्णु गुप्ता.

 

हिन्दू सेना यूं तो साल 2011 से काम कर रही है लेकिन इसका रजिस्ट्रेशन साल 2015 में हुआ है. कहने को ये संस्था पूर्वी दिल्ली के लक्षमी नगर ने पंजीकृत है लेकिन हिन्दू सेना का दिल्ली के लुटियन जोन के मंदिर मार्ग में दफ्तर है. हिन्दू सेना का दफ्तर हिन्दू महासभा के कार्यालय में है. आधिकारिक रूप से हिंदू महासभा का संबंध हिंदू सेना से नहीं है. संस्था का दावा है की पूरे देश भर में उसके 10 हज़ार कार्यकर्ता हैं जिसमें ज्यादातर दिल्ली, असम, मणिपुर, मध्य प्रदेश और राजस्थान में है. लेकिन हकीकत में ये हिंदू सेना ने सिर्फ दिल्ली में सुर्खियां बटोरी हैं.

 

हिंदू सेना चर्चा में आई थी 2014 में जब उसने आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर हमला किया था. ये हमला मशहूर वकील प्रशांत भूषण के कश्मीर पर बयान के बाद किया था. इस हमले पर कोई अफसोस विष्ण गुप्ता को नहीं है

 

इसी तरह आम आदमी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा खड़ा किया था विष्णु गुप्ता ने. इस तरह की तमाम हरकतों को सही ठहराने की हर संभव कोशिश करती है हिंदू सेना.

 

हिंदू सेना का दावा है कि वो बीजेपी या ऱाष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से नहीं जुड़ी है. पर फिर भी 2014 में हिंदू सेना ने नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार किया. नरेंद्र मोदी के के नाम का ऐलान होने से पहले ही लाल कृष्ण आडवाणी के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाली हिंदू सेना ही थी.

 

अब हिंदू सेना को मोदी और आरएसएस से भी परेशानी है. विष्णु गुप्ता के मुताबिक उन्होंने बीजेपी के लिए इस प्रचार किया क्योंकि बीजेपी आने के बाद हिन्दू मुद्दों को बढ़ावा मिलेगा लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हो रहा है.

 

इस संगठन ने अब तक जो काम किया है जोकि कानून की नज़र में गलत है साथ ही समाज को बाटने वाले है इनमे

 

आम आदमी पार्टी के दफ्तर पर हमला

आप पार्टी के प्रेस कांफ्रेंस में हंगामा

बीजेपी नेता लाल कृष्ण अडवाणी के खिलाफ प्रदर्शन

समाजवादी पार्टी के दफ्तर पर हमला

इंजीनियर रशीद पर बीफ को लेकर स्याही फेंकना

केरला हॉउस का बीफ विवाद

 

फिलहाल ये संगठन आज भी नफरत फ़ैलाने का काम कर रहा है. वहीं सोशल मीडिया में भी ये संगठन सक्रिय नजर आता है.  

 

अब जबलपुर में

 

हिन्दू हितों की रक्षा का दावा करने वाले करीब आधा दर्जन संगठन जबलपुर में सक्रिय है. ये संगठन लव जिहाद, गौ परिवहन और धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर जिले भर में हंगामा मचाते हैं.

 

सड़कों पर गुंडागर्दी करने वाला जबलपुर में अकेला संगठन नहीं है. मध्यप्रदेश के जबलपुर में हिंदू हितों की रक्षा के नाम पर एक नहीं आधा दर्जन संगठन हैं जो धर्म के नाम कभी भी सड़क पर उतर आते हैं.

 

विश्व हिंदू परिषद,बजरंग दल और अखिल भारत हिंदू महासभा की यहां शाखाएं हैं पर साथ ही हिंदू धर्म सेना हिंदू क्रांति दल, हिंदू सेवा परिषद जैसे छोटे दल भी हैं.

 

इनमें से कई बरसों से हिन्दू धर्मसेना सबसे ज्यादा सक्रिय है. ये संगठन लव जिहाद, गौवध और धर्मांतरण जैसे मुद्दे पर सड़कों पर उतरता रहा है. हिंदू सेना के संस्थापक योगेश अग्रवाल के खिलाफ बीस से ज्यादा मुकदमे चल रहे है.

 

कांग्रेस का आरोप है कि हिंदूवादी संगठन सरकार की शह पर आतंक फैलाते है. ये सामाजिक नहीं गैर सामाजिक संगठन है.

 

दिलचस्प ये है कि इन संगठनों की शिकायत पुलिस के साथ-साथ एमपी और केंद्र की बीजेपी सरकार से भी है. उनका मानना है कि हिन्दुत्ववादी सरकार होने के बावजूद उनका दमन किया जाता है.

 

मुंबई में गुंडागर्दी

 

मुंबई के पास पनवेल से चलता है एक संगठन जो गांधी की जयंती पर कालादिन मनाता है और गोडसे के फांसी वाले दिन को शौर्य दिवस. भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का इरादा रखने वाले इस संगठन का नाम है महाराणा प्रताप बटालियन.

 

ये हैं खुद को जालौन के राजघराने के वंशज बताने वाले ठाकुर अजयसिंह सेंगर. हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर मुंबई के पास न्यू पनवेल से ये एक संगठन चलाते हैं महाराणा प्रताप बटालियन. 44 साल के सेंगर ने अपने संगठन का नाम महाराणा प्रताप पर इसलिये रखा है क्योंकि इनके मुताबिक महाराणा प्रताप ने हिंदू धर्म की रक्षा के लिये अपनी जिंदगी न्यौछावर की थी.

 

महाराणा प्रताप बटालियन आरएसएस की विचारधारा की समर्थक है. इस संगठन का मकसद है भारत को हिंदू राष्ट्र में तब्दील करना और इसके लिये अगर हिंसा भी करनी पडे तो उससे इन्हें परहेज नहीं और ये बात ये संगठन खुलकर कहता है.

 

ये संगठन सबसे पहली बार चर्चा में आया अपने गांधी विरोध को लेकर. 15 नवंबर जब महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे को फांसी की सजा दी गई थी, उसे ये संगठन शौर्य दिवस के तौर पर मनाता है. गांधी के जयंती 2 अक्टूबर को सेंगर का संगठन काला दिन के तौर पर मनाता है और 30 जनवरी जब गांधी की हत्या हुई थी उस दिन इनका संगठन आनंदोत्सव मनाता है.

 

यहां देखें वीडियो-

क्या इस तरह की उत्पाती सेनाओं को बैन कर देना चाहिए? 

 

 

सेंगर का कहना है कि भारतभर में उसके संगठन के साथ करीब 3 लाख जुडे हैं. गोडसे की फांसी वाले दिन के कार्यक्रम तक इसके सदस्यों की संख्या सिर्फ 10 हजार थी, लेकिन सेंगर के मुताबिक जब उस कार्यक्रम की चर्चा हुई तो उसके बाद से इसके सदस्यों की संख्या लगातार बढ रही है. संगठन के ज्यादातर सदस्य युवा हैं. सेंगर का कहना है कि इनके संगठन को हिंदुत्ववादी विचारधारा वाले कारोबारी और व्यापारी फंड देते हैं. इस संगठन की गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने इसके खिलाफ 10 आपराधिक मामले भी दर्ज कर रखे हैं.

 

केंद्र और महाराष्ट्र में हिंदुत्व के एजेंडे वाली बीजेपी की सरकार है, लेकिन सेंगर दोनो सरकारों से खुश नहीं हैं. इनके मुताबिक सरकार उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है.

 

महाराणा प्रताप बटालियन अब श्रीलंका के मारे गये लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरम का भी जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि इनका मानना है कि प्रभाकरन हिंदुओं के लिये लड़ रहा था.

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