1984 दंगों की याद दिलाते हुए साहित्यकारों के खिलाफ सिखों का प्रदर्शन

By: | Last Updated: Friday, 30 October 2015 3:09 PM

नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों में जिस तरह साहित्यकारों और लेखकों ने देश के बिगड़ते माहौल का हवाला देकर अवॉर्ड वापसी का सिलसिला शुरू किय़ा, उसके विरोध में आज दिल्ली में सिखों ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अवॉर्ड लौटाने वाले यह लोग तब कहां थे जब 1984 के दंगे हुए.

 

1984 की सिख विरोधी हिंसा के शिकार लोगों को इंसाफ दिलाने की मांग कर रहे लोगों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर एक अनोखा प्रदर्शन किया. सिख प्रदर्शनकारियों ने 84 के दंगों पर लिखी गई करीब 500 किताबों को जला दिया.

 

दरअसल यह विरोध उन लेखकों और साहित्यकारों के खिलाफ है जो पिछले कुछ समय में देश का माहौल खराब होने और असहनशीलता बढ़ने की बात कर रहे हैं.सिख प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन लोगों ने तब अपनी आवाज क्यों नहीं उठाई जब 1984 के दंगे हुए थे.

 

लेखक एम एम कुलबर्गी की हत्या और दादरी में बीफ विवाद पर अखलाक की हत्या के बाद से पिछले कुछ दिनों में करीब 36 साहित्यकारों और 10 फिल्मकारों ने अपने अवॉर्ड लौटाने का एलान किया है. इनके अलावा इतिहासकारों और वैज्ञानिकों ने भी देश का माहौल खराब होने की बात कही है.

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Web Title: Sikh group protests against writers returning their awards
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