सिख दंगों की जांच के लिए मोदी सरकार बनाएगी एसआईटी

By: | Last Updated: Thursday, 12 February 2015 1:41 AM

नई दिल्ली: केंद्र सरकार 1984 के सिख दंगों की नए सिरे से जांच के लिए एक हफ्ते के भीतर एसआईटी के गठन का एलान कर सकती है. जस्टिस जीपी माथुर की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में एसटीआई के गठन की सलाह दी थी.

जस्टिस जीपी माथुर की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 24 जनवरी को गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में पीड़ितों को 5-5 लाख की आर्थिक सहायता देने की भी सलाह दी गयी.

 

31 अक्तूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे.

 

इन दंगों में 3325 लोगों में से अकेले दिल्ली में 2733 लोग मारे गए थे जबकि बाकी लोग उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में मारे गए थे.

 

बीजेपी ने पूर्व में सभी सिख विरोधी दंगों की फिर से जांच किए जाने की मांग की थी.

 

न्यायमूर्ति नानावटी आयोग ने पुलिस द्वारा बंद किए गए 241 मामलों में से केवल चार को ही फिर से खोलने की सिफारिश की थी लेकिन भाजपा अन्य सभी 237 मामलों की फिर से जांच करवाना चाहती थी.

 

तत्काल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि न्यायमूर्ति माथुर समिति ने कितने सिख विरोधी दंगा मामलों को फिर से खोले जाने की सिफारिश की है. 241 संबंधित मामलों में से केवल चार को फिर से खोला गया और सीबीआई ने फिर से जांच की. दो मामलों में सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया और एक मामले में एक पूर्व विधायक समेत पांच लोगों को दोषी ठहराया गया.

 

10 दिसंबर 2014 को सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिजनों को पांच लाख रूपये अतिरिक्त मुआवजा देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की थी.

 

दंगा पीड़ितों के परिजनों को यह मुआवजा उस राशि के अतिरिक्त होगा जो वे सरकार और अन्य एजेंसियों से पहले हासिल कर चुके हैं.

 

नए मुआवजे से सरकारी खजाने पर 166 करोड़ रूपये का बोझ पड़ेगा.

 

सरकार ने न्यायमूर्ति माथुर समिति को 23 दिसंबर 2014 को नियुक्त किया था जिसका काम एसआईटी से सिख विरोधी दंगों की फिर से जांच की संभावनाओं का पता लगाना था.

 

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