छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज में कमी, फिर भी कुछ राहत संभव

By: | Last Updated: Friday, 18 March 2016 10:37 PM
Small savings rates slashed

नई दिल्ली:  नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी एनएससी और पब्लिक प्रॉविडेट फंड यानी पीपीएफ जैसी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कमी कर दी गयी है. नयी दरें पहले अप्रैल से तीन महीने के लिए लागू होंगी.

वैसे इस कटौती से ज्यादा दुखी होने की जरूरत नहीं. क्योंकि इस कटौती के बाद बैंकों के लिए कर्ज पर ब्याज दर में करने का रास्ता साफ होगा. मतलब ये कि आपके लिए घर और गाड़ी के कर्ज की मासिक किश्त यानी ईएमआई कम हो सकती है.

ये पहला मौका है जब छोटी बचत योजनाओं पर तीन महीने के लिए ब्याज दरों में फेरबदल किया गया है. इसके पहले हमेशा साल भर के लिए एक ब्याज हुआ करती थी. ध्यान देने की बात ये है कि पीपीएफ और सुकन्या समृर्द्धि जैसी योजनाओं में पहली अप्रैल के बाद की गयी नयी जमा पर ही नयी ब्याज दर लागू होगी. पुरानी जमा पर ब्याज की दर पुरानी दर ही लागू होगी.

वैसे सरकार कह रही है कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में बदलाव बाजार के आधार पर किया गया है. इन योजनाओं पर ब्याज दर के लिए समान अवधि वाले सरकारी बांड यानी जी-सेक पर ब्याज दर को आधार बनाया जाता है. यानी जी सेक पर जितना ब्याज दर, उस मियाद की छोटी योजना पर उसी हिसाब से ब्याज दर. हां कुछ योजनाओं जैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत योजना, पीपीएफ या फिर किसान विकास पर जी-सेक की ब्याज दर से कुछ ज्यादा दी जाएगी.

पिछली सरकार के समय ही छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों के आकलन के लिए जी सेक का फॉर्मूला अपनाया गया था. इस तरह छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर बाजार के हिसाब से तय होती है. मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था में एक बदलाव किया कि ब्याज दर की समीक्षा तिमाही आधार पर होगी. मतलब ये हुआ कि अगर अप्रैल से जून के महीने मे जी सेक पर ब्याज दर में बढ़ोतरी हुई तो हो सकता है कि जुलाई मे छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर बढ़ जाए.

ब्याज दर में कमी के बावजूद कई छोटी बचत योजनाएं अब भी बैंक जमा की तुलना में थोड़ा आकर्षक हैं, क्योंकि एऩएससी, पीपीएफ या सुकन्या समृर्धि जैसी योजनाओं से टैक्स बचाया जा सकता है. पीपीएफ और सुकन्या समृर्द्धि में जहां पैसा जमा करते वक्त, कुल जमा पैसे (ब्याज समेत) और निकाले पैसे यानी हर स्तर पर टैक्स नहीं चुकाना होगा, वहीं एनएससी में जमा किया गया पैसा टैक्स योग्य आमदनी से घटा (इनकम टैक्स कानून की धारा 80सी के तहत 1.50 लाख रुपये तक) दिया जाता है. हालांकि मियाद पूरी होने पर मिलने वाले ब्याज को अगर फिर से निवेश नहीं किया तो उस पर टैक्स चुकाना होगा.
टेबल – ब्याज दरें

 

छोटी बचत योजना ब्याज दर – फीसदी में
(1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च, 2016 के लिए)
ब्याज दर – फीसदी में

( 1 अप्रैल 2016 से 30 जून 2016 के लिए)

बचत खाता 4.0 4.0
1 साल की मियादी जमा 8.4 7.1
2 साल की मियादी जमा 8.4 7.2
3 साल की मियादी जमा 8.4 7.4
5 साल की मियादी जमा 8.5 7.9
5 साल की आवर्ति जमा 8.4 7.4
5 साल की वरिष्ठ नागरिक जमा योजना 9.3 8.6
5 साल की मासिक जमा योजना 8.4 7.8
5 साल का एनएससी 8.5 8.1
पब्लिक प्रॉविडेंट फंड 8.7 8.1
किसान विकास पत्र 8.7 (100 महीने में पैसा होगा दुगना) 7.8 (110 महीने में पैसा दुगना होगा)
सुकन्या समृर्द्धि योजना 9.2 8.6

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