स्मृति ईरानी को लगा सबसे बड़ा झटका, PMO ने लगाई OSD की नियुक्ति पर रोक

By: | Last Updated: Friday, 17 April 2015 3:44 PM

नई दिल्ली: शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को सबसे बड़ा झटका लगा है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने आईबी की एक रिपोर्ट के बाद स्मृति ईरानी के ओएसडी की नियुक्ति पर रोक लगा दी है. चौंकाने वाली बात ये है कि सरकार बनने के बाद से काम कर रहे संजय काचरू की अब तक औपचारिक नियुक्ति हुई ही नहीं थी.

 

मोदी सरकार में मंत्री स्मृति ईऱानी ने जब से मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा संभाला है तब से स्मृति किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहती हैं.. शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार स्मृति ईरानी को एक साथ दो झटके लगे हैं.

 

आपको बता दें कि पहला झटका पीएमओ ने दिया है और दूसरा चार पार्टियों के सांसदों का स्मृति के खिलाफ मोर्चे ने दिया है. चार पार्टियों के सांसदों ने चिट्ठी लिखकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के कामकाज में दखल देने की मांग की है. जेडीयू, एनसीपी, सीपीआई और कांग्रेस चारों स्मृति के खिलाफ सुर में सुर मिला रहे हैं.

 

सांसदों की शिकायत तो आपने सुन ली अब पीएमओ से मिले झटके के बारे में भी जान लीजिए. खबर है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्मृति ईरानी के ओएसडी संजय काचरू की नियुक्ति पर रोक लगा दी है. सूत्रों के मुताबिक काचरू अब मंत्रालय भी नहीं आ रहे हैं. नियुक्ति पर रोक स्मृति के लिए झटका इसलिए है क्योंकि स्मृति ईरानी ने खुद पीएमओ से काचरू की नियुक्ति की सिफारिश की थी.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता संभालने के बाद ही निजी स्टाफ और ओएसडी जैसों पदों को लेकर सरकार का रुख साफ कर दिया था. राजनाथ सिंह को अपनी पसंद का निजी सचिव नहीं रखने दिया गया. रामविलास पासवान के मनपसंद ओएसडी को हरी झंडी नहीं मिली थी लेकिन शिक्षा मंत्री स्मृति ईऱानी ने ना सिर्फ मनमुताबिक ओएसडी रखा बल्कि उसकी नियमों के मुताबिक नियुक्ति भी नहीं हुई.

 

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक मई 2014 से ही संजय काचरू मानव संसाधन मंत्रालय में काम कर रहे हैं लेकिन उनकी नियुक्ति के आदेश अब तक जारी नहीं हुए थे. दरअसल पिछले दिनों ही काचरूर की नियुक्ति से जुड़ी फाइल पीएम की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मंगवाई थी. मंत्री स्टाफ में निजी सचिव और ओएसडी के पद पर नियुक्ति के प्रस्ताव को कमेटी मंजूरी देती है.

 

इस समिति में गृहमंत्री, पीएम के प्रधान सचिव, कैबिनेट सचिव और विभागीय सचिव होते हैं. काफी वक्त से काचरू की नियुक्ति का प्रस्ताव नियुक्ति समिति के पास पड़ा था. दरअसल दोनों पदों पर नियुक्ति के लिए खुफिया ब्यूरो से क्लीयरेंस कराई जाती है लेकिन IB की तरफ से रिपोर्ट थी कि संजय कचरू अब भी अपने पुराने कॉरपोरेट ऑफिस के संपर्क में हैं जिसके बाद उनकी नियुक्ति की फाइल अटक गई.

 

कमेटी की मंजूरी मिलने तक उन्हें मंत्रालय नहीं आने के लिए कहा गया था. खबर ये भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन देशों के दौरे पर रवाना होने से पहले ही पीएमओ ने स्मृति ईरानी के ओएसडी काचरू की नियुक्ति से जुड़ी फाइल मंगाई थी.

 

कौन हैं संजय काचरू?

 

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़े संजय काचरू अपने कॉलेज के दिनों से ही बीजेपी के छात्र संघटन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ जुड़े रहे.. और स्मृति ईरानी के मंत्रालय का काम काज संभालने के साथ ही काचरू के मंत्रालय में आने की खबरें तेज़ हो गई.

 

गौरतलब है कि आज तक मंत्रालय में इनके कमरे के बाहर काचरू के नाम का बोर्ड और ओहदा कभी नहीं लिखा रहा हालांकि खबरें जरूर हैं कि शास्त्री भवन के मानव संसाधन मंत्रालय में तीसरी मंजिल पर मंत्री के कमरे के नजदीक कमरा नंबर 314 में बैठते थे.

 

स्मृति ईरानी से जुड़ने से पहले संजय काचरू रिलायंस और एस्सार जैसे कॉरपोरेट घरानों से जुड़े रहे हैं. काचरू रिलायंस में वाइस प्रेजीडेंट कॉरपोरेट के पद पर थे. और इसलिए काचरू की नियुक्ति को उनके विरोधी कॉरपोरेट लॉबी का हिस्सा बता रहे हैं. हालांकि पीएमओ, स्मृति  ईरानी और संजय कचरू में से किसी ने अभी तक खबर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

 

15 अप्रैल को टेलीग्राफ के मुताबिक संजय काचरू पिछले दस महीनों से सरकार की तरफ से अपनी नियुक्ति का रास्ता साफ होने का इंतजार कर रहे थे लेकिन फाइल जब अटक गई तो काचरू ने कहा मैंने ऑर्डर आने तक इंतजार करने का फैसला किया है उसके बाद ही मैं ऑफिस आऊंगा.

 

सवाल ये है कि दस महीनों तक बिना किसी औपचारिक नियुक्ति के संजय काचरू मंत्रालय में काम कैसे रहे थे? अगर औपचारिक नियुक्ति हुई ही नहीं थी तो कौन से पद की तनख्वाह सरकार से ले रहे थे या फिर बिना तनख्वाह के ही काम कर रहे थे.

 

सबसे बड़ा सवाल ये कि जब ओएसडी जैसे पद के लिए खुफिया विभाग की क्लीयरेंस लेनी होती है तो बिना आईबी की हरी झंडी लिए वो मानव संसाधन मंत्रालय की फाइलें क्यों देख रहे थे

 

पिछले दिनों ही स्मृति ईरानी को बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया गया. बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी पार्टी का एजेंडा तय करती है इस बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 111 सदस्य हैं लेकिन इनमें स्मृति को जगह नहीं मिली. इसके बाद पीएमओ से झटका मिला और रही सही कसर चार सांसदों के स्मृति के खिलाफ पीएम और राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी ने पूरी कर दी.

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