स्मृति ईरानी ने केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन के बदले संस्कृत लाने का बचाव किया

By: | Last Updated: Friday, 14 November 2014 5:24 PM

नयी दिल्ली: केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन के बदले संस्कृत लाए जाने को लेकर छिड़े विवाद के बीच मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने आज इस फैसले का जोरदार बचाव किया और कहा कि मौजूदा व्यवस्था ‘‘त्रिभाषा’’ फार्मूला का उल्लंघन करती है.

 

उन्होंने हालांकि कहा कि जर्मन को छात्रों के लिए अतिरिक्त विषय के रूप में पढाया जाएगा.

 

इस फैसले से छठी से आठवीं कक्षाओं के करीब 68 हजार छात्रों के प्रभावित होने का अनुमान है. वाषिर्क परीक्षाओं में करीब तीन महीने ही बाकी रहने के कारण छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने का विकल्प दिया जाएगा.

 

मंत्री ने कहा कि 2011 में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने की जांच पहले ही शुरू कर दी गयी है. इस एमओयू के तहत जर्मन तीसरी भाषा के रूप में पढायी जाने लगी.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ बोर्ड की बैठक में हमने सवाल किया कि उस एमओयू पर हस्ताक्षर कैसे किए गए जो शिक्षा की राष्ट्रीय नीति का उल्लंघन है.’’ इस मुद्दे पर अपने मंत्रालय की ओर से स्पष्टीकरण देते हुए मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ इससे राज्य और बच्चे के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होता है. यह मामला संस्कृत को बढ़ावा देने का नहीं है बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का है.’’

 

स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के संचालक मंडल (बीओजी) ने 27 अक्तूबर को अपनी बैठक में फैसला किया था कि ‘‘संस्कृत के विकल्प के रूप में जर्मन भाषा की पढ़ाई खत्म की जाएगी.’’

 

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि केवीएस और गोएथे इंस्टीट्यूट-मैक्समूलर भवन के बीच 2011 में एक सहमति पत्र पर हुए हस्ताक्षर के बारे में भी मंत्रालय को नहीं बताया गया. यह मामला उस समय सामने आया जब एमओयू के नवीनीकरण की नौबत आयी.

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