जासूसी कांड: एक और गिरफ्तार, नए जासूसी रैकेट का भंडाफोड़

By: | Last Updated: Monday, 23 February 2015 5:24 PM

नई दिल्ली: संसद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संदेश के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से लीक हुए गोपनीय दस्तावेजों के मामले में दिल्ली पुलिस ने सोमवार को एक और व्यक्ति की गिरफ्तारी की.

 

इस गिरफ्तारी से पुलिस ने एक अन्य जासूसी रैकेट का पर्दाफाश किया है जो कोयला, ऊर्जा और अन्य मंत्रालयों की जासूसी करता था और यहां के दस्तावेज कॉरपोरेट घरानों को उपलब्ध कराता था. पुलिस इससे पहले इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार किए गए लोगों में एक पूर्व पत्रकार और पांच कॉरपोरेट अधिकारी शामिल हैं.

 

दिल्ली पुलिस आयुक्त बी.एस. बस्सी ने संवाददाताओं को बताया, “हमने इस मामले में लोकेश नामक एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो कोयला और पेट्रोलियम मंत्रालयों से चोरी किए गए दस्तावेजों को कुछ कॉरपोरेट घरानों को उपलब्ध कराता था. लोकेश की गिरफ्तारी से हमें एक अन्य रैकेट का भंडाफोड़ करने में मदद मिली है.”

 

लोकेश (30) शास्त्री भवन के मल्टी-टास्क स्टाफ (एमटीएस) का पूर्व सदस्य है. वह पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में विजय नगर का रहने वाला है. लोकेश को द्वारका से गिरफ्तार किया गया.

 

लोकेश को द्वारका अदालत में मुख्य महानगर दंडाधिकारी सतीश अरोड़ा के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

 

पुलिस ने बताया कि लोकेश मौजूदा समय में नोएडा स्थित ऊर्जा सलाहकार कंपनी इंफ्रालाइन एनर्जी के साथ काम कर रहा था. वह कोयला और ऊर्जा मंत्रालय से चुराए गए दस्तावेजों का सौदा करता था और उन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाता था. कंपनी के पास ग्राहकों का एक विशाल डाटाबेस है, जिसमें कॉरपोरेट और व्यक्तिगत दोनों प्रकार के ग्राहक शामिल हैं.

 

पुलिस सूत्रों ने कहा कि लोकेश केवल शास्त्री भवन स्थित कोयला मंत्रालय से ही दस्तावेज चोरी नहीं करता था बल्कि वह श्रम शक्ति भवन स्थित ऊर्जा मंत्रालय से भी दस्तावेज चोरी करता था.

 

पुलिस के मुताबिक, लोकेश और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है. क्योंकि वे एक अन्य रैकेट में शामिल पाए गए हैं, जो पेट्रोलियम, ऊर्जा और कुछ अन्य मंत्रालयों से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को चुराने के मामले में लिप्त है.

 

सूत्रों के मुताबिक, पेट्रोलियम मंत्रालय के दस्तावेज चोरी मामले में चल रही जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को लोकेश के बारे में जानकारी मिली. शास्त्री भवन के दो पूर्व एमटीएस कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद 17 फरवरी को लोकेश के बारे में पता चला.

 

जासूसी मामला सामने आने के बाद लोकेश गायब हो गया था. पुलिस को लोकेश की स्थिति के बारे में रविवार को ही पता चल गया था, लेकिन उसे सोमवार को गिरफ्तार किया गया.

 

दिल्ली पुलिस की टीम ने सोमवार को शास्त्री भवन से आठ लोगों को हिरासत में लिया है. ये सभी लोग कोयला, पेट्रोलियम और ऊर्जा सहित विभिन्न मंत्रालयों में काम करते थे.

 

पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि वे राजीव सिंह नामक एक युवक की तलाश में हैं, जो कोयला मंत्रालय का कर्मचारी है और जितेंद्र नाम के एक अन्य व्यक्ति की भी तलाश है जो लोकेश का सहयोगी है.

 

पुलिस सूत्रों ने कहा कि कॉरपोरेट और सरकारी विभागों में काम करने वाले कई और लोगों की इस मामले में गिरफ्तारी हो सकती है.

 

पेट्रोलियम मंत्रालय से दस्तावेज लीक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को पूर्व पत्रकार शांतनु सैकिया सहित तीन अन्य लोगों को छह मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

 

अदालत ले जाने से पहले सैकिया ने संवाददाताओं से कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने उनसे पांच कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए हैं.

 

शांतनु सैकिया कई सालों तक अपराध पत्रकारिता करते रहे हैं. फिलहाल वह एक वेबसाइट चलाते थे. अदालत ने सैकिया के साथ ही प्रयास जैन (मेलबर्न में रहने वाले ऊर्जा सलाहकार) और राकेश कुमार (30) और लालता प्रसाद (36) को 11 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कुमार और प्रसाद, आपस में भाई हैं.

 

सूत्रों ने सोमवार को बताया कि दिल्ली पुलिस इस मामले में पांच कॉरपोरेट अधिकारियों से जांच में शामिल होने के लिए समन भेजेगी.

 

इसी बीच अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि पूरे देश में किसी भी जगह पर कंपनी के दफ्तरों पर पुलिस ने छापेमारी नहीं की है. समूह ने कहा कि वह अधिकारियों के साथ जांच में पूरा सहयोग कर रहा है.

 

बयान में कहा गया है, “रिलायंस पावर के केवल एक कर्मचारी के दफ्तर की तलाशी ली गई है और वहां से भी किसी प्रकार की फंसाने वाली वस्तु नहीं मिली है.”

 

संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए सोमवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, “यद्यपि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कड़े कदमों के प्रावधान किए जा रहे हैं और इस बात को सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं कि लोकहित में लिए गए सद्भावपूर्ण निर्णयों को संरक्षण प्रदान किया जाए जिससे सिविल सर्विस में विश्वास को प्रोत्साहित किया जा सके.”

 

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