'मनरेगा ने किया है खेती को फिर से जीवित करने का काम'

By: | Last Updated: Sunday, 19 October 2014 6:43 AM
social groups protest modi government’s move to dilute mnrega

नई दिल्ली: एनडीए सरकार द्वारा मनरेगा में सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों का विरोध करते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आज कहा कि इस योजना ने दरअसल देश में कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में सहयोग दिया है. मुंबई के एक शोध संस्थान द्वारा किए गए नए अध्ययन के हवाले से उन्होंने कहा है कि इस योजना के तहत जितने कार्य किए गए, उनमें से अधिकांश (लगभग 79 प्रतिशत) कृषि से जुड़ी गतिविधियों में मददगार हैं, इन कार्यों में जमीन बराबर करना, बागवानी, जल-सरंक्षण आौर सार्वजनिक जमीनों पर फसल कटाई आदि शामिल हैं,

 

मुंबई के इंदिरा गांधी विकास शोध संस्थान द्वारा किया गया अध्ययन ‘मनरेगा कार्य और उनके प्रभाव: महाराष्ट्र में एक त्वरित आकलन’ कहता है, ‘‘शेष कार्यों में सड़क निर्माण और वनरोपण शामिल है, इनमें से कुछ कार्य निश्चित तौर पर कृषि के लिए मददगार हैं, मनरेगा के आलोचकों को लगता है कि महाराष्ट्र के मनरेगा का कृषि के लिए सहायक होने की बात अवास्तविक है,’’

 

सामाजिक कार्यकर्ता अरूणा रॉय के सहायक निखिल डे ने कहा कि मनरेगा पर आईजीडीआर का नया अध्ययन उन सभी के लिए आंखे खोलने वाला है, जो गरीबों के लिए बनाए गए इस कार्यक्रम को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, डे ने बताया, ‘‘इस अध्ययन ने दिखाया है कि महाराष्ट्र जैसे राज्य को मनरेगा के प्रभावी क्रियांवयन के चलते बहुत लाभ मिला है,’’ यह अध्ययन आकलन के लिए केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को भेज दिया गया है.

 

हालांकि सरकार ने इस तर्क के विरोध में मिशिगन विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री द्वारा मनरेगा पर किए गए अध्ययन का हवाला दिया, अर्थशास्त्री द्वारा किए गए उस अध्ययन में ऐसी योजना के अस्तित्व (कम से कम मौजूदा स्वरूप) पर सवाल उठाया गया था, सरकार के अनुसार, मिशिगन विश्वविद्याल की लॉरा जिमरमैन द्वारा किए गए अध्ययन ‘वाय गारंटी एंप्लॉईमेंट? एवीडेंस फ्रॉम ए लार्ज इंडियन पब्लिक-वर्क्‍स प्रोग्राम’ में कहा गया था कि श्रम बाजार पर मनरेगा के प्रत्यक्ष प्रभाव बेहद कम हैं.

 

अध्ययन में कहा गया, ‘‘परिणाम दिखाते हैं कि श्रम बाजार पर समग्र रूप से इसके प्रत्यक्ष प्रभाव बहुत कम हैं.’’ अध्ययन में कहा गया, ‘‘मनरेगा जैसे बड़े कार्यक्रम में, जहां भारतीय जीडीपी का एक प्रतिशत खर्च किया जा रहा है, वहां नतीजों से यह सवाल उठता है कि क्या इससे होने वाले कल्याणकारी लाभों की संख्या ऐसी महत्वाकांक्षी योजना के अस्तित्व (कम से कम मौजूदा स्वरूप) के लिए उपयुक्त है? या फिर धनराशि को दूसरे गरीबी-रोधी उपायों पर प्रभावी तरीके से खर्च किया जाना चाहिए?’’

 

आईजीडीआर रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब दो ही दिन पहले सरकार ने इसी संस्थान द्वारा पहले किए गए एक अध्ययन को निकाला था, उस अध्ययन में दर्शाया गया था कि किस तरह कांग्रेस ने मनरेगा का इस्तेमाल राजस्थान और आंध्रप्रदेश में ‘वोट जुटाने के औजार’ के रूप में किया, विभिन्न पक्षों की ओर से आपत्ति के बावजूद सरकार ने कहा है कि वह यूपीए शासनकाल की प्रमुख परियोजना की ‘पूरी समीक्षा’ कराने के लिए संकल्पबद्ध है. सरकार का तर्क है कि इसका इस्तेमाल पूरी तरह दलगत लाभों के लिए किया गया.

 

सरकार की ओर से यह दावा वाम दलों, पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों द्वारा मनरेगा कार्यक्रम को किसी तरह ‘हल्का’ किए जाने का विरोध जताए जाने की पृष्ठभूमि में आया है, यह योजना संसद में एक कानून के जरिए वर्ष 2005 में लागू हुई थी.

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Web Title: social groups protest modi government’s move to dilute mnrega
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