मोदी सरकार कुछ लोगों की, एक व्यक्ति द्वारा, चुनिंदा लोगों के लिए हैः सोनिया गांधी

By: | Last Updated: Wednesday, 6 May 2015 2:02 PM
sonia gandhi

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा निशाना साधा और काफी आक्रामक अंदाज में उन पर राज्यों को कमजोर करते हुए सत्ता के ‘‘केंद्रीकरण ’’ के जरिए ‘‘कुछ लोगों की , एक व्यक्ति द्वारा और चुनिंदा लोगों के लिए’’ सरकार चलाने का आरोप लगाया.

 

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी ने फ्रांस में विदेशी धरती पर अपने सम्मानित पूर्ववर्ती के खिलाफ जो घरेलू राजनीतिक खेल खेला तथा कनाडा में जिस ‘तिरस्कार के अंदाज’’ में यूपीए का जिक्र किया वह ‘‘स्तर में नयी गिरावट’’ है.

 

करीब साल भर के शासन में सभी मोर्चों पर मोदी सरकार के कार्य प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि अल्पसंख्यकों को धमकाया जा रहा है जबकि राजनीतिक संवाद में ‘‘जहर घोलकर ’’ लोगों को असुरक्षित महसूस कराया जा रहा है.

 

सरकार के कामकाज के तौर तरीकों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मंत्रियों को ‘‘कौन पूछता’’ है , ‘‘शक्तिसंपन्न ’’ नौकरशाह भी ‘‘पंगु’’ महसूस कर रहे हैं क्योंकि सभी महत्वपूर्ण फाइलें प्रधानमंत्री कार्यालय में लंबित रहती हैं.

 

समाप्ति की ओर बढ़ रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री को आम सहमति की बात करना पसंद है. लेकिन परंपराओं को नजरअंदाज करते हुए यह सरकार घोर हठधर्मिता के साथ काम कर रही है.’’ सोनिया गांधी ने आज लोकसभा में भी मोदी सरकार पर हमले की कमान संभाली और पारदर्शिता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर ‘‘सरेआम अपनी बात से मुकरने’’ का आरोप लगाया. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘जानबूझकर’ मुख्य सूचना आयुक्त , सीवीसी और लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण पदों को खाली रखे हुए है.

 

प्रधानमंत्री पर सत्ता का केंद्रीकरण करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि ‘‘लोकतंत्र की नयी परिभाषा’’ गढ़ने का श्रेय सरकार को जाता है. उन्होंने कहा, ‘‘ यह अब जनता की , जनता द्वारा , जनता के लिए सरकार नहीं है बल्कि कुछ लोगों की , एक व्यक्ति द्वारा , चुनिंदा लोगों के लिए सरकार है.’’ उन्होंने कहा कि ‘विकास ’ के धुएं के पीछे सरकार केवल सांठगांठ वाले पूंजीपतियों को अच्छे दिन मुहैया करा रही है. ‘मेक इन इंडिया’ की आड़ में सरकार की कामगारों और श्रमिकों के अधिकार को कमजोर करने की योजना है. उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा, ‘‘ क्या वे भारत में कुछ नहीं बनाते?’’ सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार को भारत को एक ऐसी भूमि के रूप में बदलने का श्रेय दिया जा सकता है जहां हर रोज अल्पंसख्यकों के पूजा स्थलों को अपवित्र किया जा रहा है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के सदस्यों की ओर से लगातार भड़काउ बयानों की झड़ी लगी हुई है. यहां तक कई बार मंत्रियों तक की ओर से पूरे समुदाय और हमारे लोकतंत्र के संस्थानों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं.’’ कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि संघ परिवार के कुछ लोग एक समुदाय के मताधिकार को समाप्त करना चाहते हैं. उन्होंने परोक्ष रूप से भाजपा की सहयोगी शिवसेना द्वारा की गयी मांग के संबंध में यह बात कही.

 

उन्होंने कहा, ‘‘अन्य लोग गोड्से की प्रतिमा लगाना चाहते हैं , वह आदमी जिसने राष्ट्रपिता की हत्या की थी. हां, हम उन्हें इस बात का श्रेय दे सकते हैं कि वे हमारे महान राष्ट्र के राजनीतिक संवाद में जहर घोल रहे हैं और भारतीयों को भारत में असुरक्षित महसूस करा रहे हैं. ’’ सोनिया गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार का ‘‘पाखंड और संवेदनहीनता’’ ‘‘अद्भुत’’ है. प्रधानमंत्री सुखिर्यों में बने रहने के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं का ऐलान करते हैं जबकि वित्त मंत्री उन्हें पर्याप्त कोष से वंचित करते हैं और गरीबों तथा कमजोर लोगों के लाभ संबंधी महत्वपूर्ण कार्यक्रम दम तोड़ रहे हैं.

 

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘ उसी समय, वित्त मंत्री कोरपोरेट सेक्टर के लिए दिल खोलकर सौगातें देते हैं.. अगले चार सालों में करीब दो लाख , 50 हजार करोड़ रूपये मूल्य की कर कटौती की जाती है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमें इस बात से असहमति नहीं है कि कोरपोरेट सेक्टर में भी वृद्धि होनी चाहिए और रोजगार सृजन तथा राष्ट्रीय संपदा के लिए उद्यमियों को फलना फूलना चाहिए लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार हर किसी को छोड़कर केवल कुछ कोरपोरेट हितों की पक्षधर है. भारत के भविष्य की नींव ऐसे अन्यायपूर्ण नींव पर नहीं बनायी जा सकती.’’

 

पिछले वर्ष के लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी द्वारा ‘अच्छे दिन’ का नारा दिए जाने पर सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘ मैं पूछना चाहती हूं कि उन अच्छे दिनों की सचाई क्या है जिनका प्रधानमंत्री ने वादा किया था?’’ सोनिया ने कहा, ‘‘ पेट्रोल की कीमतों में कमी का हम सब को पता है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के कारण ऐसा हुआ है जिस पर उनका नियंत्रण नही है और इसके लिए वे किसी श्रेय के हकदार नहीं हैं.’’ सोनिया गांधी कटाक्ष करते हुए कहा, उन्हें किस बात का श्रेय चाहिए ? उन्हें हमारे भूमि अधिग्रहण विधेयक में बेहद किसान विरोधी संशोधन करने का श्रेय जाता है. उन्हें देशभर में किसानों की पीड़ा को अनदेखा करने का श्रेय जाता है. ऐसी बेपरवाही पहले कभी नहीं देखी गयी.’’

 

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, उन्हें भारत के हालिया इतिहास में सर्वाधिक केंद्रीकृत सरकार की स्थापना करने का श्रेय जाता है. मंत्रियों की कोई अहमियत नहीं है. यहां तक कि शक्ति सम्पन्न समझे जाने वाले नौकरशाह भी पंगु महसूस करते हैं क्योंकि सभी महत्वपूर्ण फाइलें फैसले लेने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में पड़ी हैं.’’

 

प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आम सहमति की बात पसंद करते हैं. उन्होंने दो उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री को सूचित किए बिना अरूणाचल प्रदेश में सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम थोप दिया और वे असम को अलग कर बांग्लादेश भूमि समझौते पर बढ़ रहे हैं.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ यह हठधर्मिता संसद में जबरदस्ती अपनी बात मनवाने से भी साफ झलकती है. 51 विधेयकों में से 43 विधेयकों को स्थायी समिति के पास नहीं भेजा गया.’’ लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष ने पारदर्शिता के मुद्दे पर ‘‘ सरेआम अपनी बात से पलटने ’’ के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आज तगड़ा हमला बोला और आरोप लगाया कि उनकी सरकार ‘‘जानबूझकर’’ मुख्य सूचना आयुक्त , सीवीसी और लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं कर रही है.

 

सरकार में महत्वपूर्ण पदों के खाली पड़े रहने पर हैरानी जताते हुए सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘ सरकार को किस बात का डर है ? ’’ उन्होंने कहा कि सरकारी ढांचे के भीतर वे पद जो स्वतंत्र प्राधिकार होने के नाते सरकारी मशीनरी के कामकाज पर सवाल उठाते हैं , वे विशेष रूप से खाली पड़े हैं.

 

सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘मित्रों, हमारे सामने चुनौती स्पष्ट है. हमारा सामना ऐसी सरकार से है जो हर उस मूल्यवान चीज पर हमला करती है जिसके लिए भारत और कांग्रेस पार्टी खड़ी है..़हमें मुकाबला करना होगा और सरकार की कारगुजारियों का खुलासा करना होगा.’’ भाजपा सरकार पर ‘‘आरटीआई अधिनियम को निष्प्रभावी’’ बनाने के प्रयास करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि नागरिकों को अब सरकार से सवाल करने का अधिकार नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय , उच्च न्यायालय और कैग के अलावा अब प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय आरटीआई के तहत उल्लंघन के लिए जवाबदेह नहीं हैं और सार्वजनिक जांच से सुरक्षित हैं.

 

सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर इस पर चर्चा कराए जाने की मांग की थी लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें प्रश्नकाल के बाद यह मुद्दा उठाने को कहा.

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